संकट झेलता भारत, ऑक्सीजन दूसरे देश भेजता रहा

Navi Mumbai: A worker arrange oxygen cylinders at Covid care centre, Vashi in Navi Mumbai, Saturday, April 17, 2021. (PTI Photo)(PTI04_17_2021_000077B)

कोविड संकट से घिरे भारत ने बीते 10 माह में ऑक्सीजन का दोगुना निर्यात किया

नई दिल्ली: भारत ने वित्त वर्ष 2020-21 के पहले दस महीनों में इससे पिछले पूरे वित्त वर्ष की तुलना में विश्व भर के कई देशों को दोगुनी मात्रा में ऑक्सीजन बेची.

बिजनेस टुडे के अनुसार, वाणिज्य मंत्रालय से मिले डेटा में यह बात सामने आई है. ऐसा तब हुआ जब भारत खुद इस पूरी अवधि में खुद कोरोना वायरस महामारी से बुरी तरह प्रभावित था.मालूम हो कि बीते साल से भारत लगातार उन शीर्ष देशों की सूची में बना हुआ है जो इस वायरस से सर्वाधिक प्रभावित हैं.

प्राप्त डेटा के अनुसार, अप्रैल 2020 से जनवरी 2021 के बीच भारत ने दुनियाभर में 9,301 मीट्रिक टन ऑक्सीजन निर्यात की, जिससे 8.9 रुपये प्राप्त हुए. इसके विपरीत, इससे पहले वित्त वर्ष 2019-20 में देश ने केवल 4,514 मीट्रिक टन ऑक्सीजन निर्यात की थी, जिससे 5.5 करोड़ रुपये मिले थे.

कोरोना संक्रमितों मरीजों के गंभीर रूप से बीमार होने पर मेडिकल ऑक्सीजन की उनके इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका होती है. देश में कोरोना की मौजूदा लहर के दौरान इसकी मांग बहुत तेजी से बढ़ी है और राजधानी दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों से अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी की खबरें आ रही हैं.

मंगलवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने बताया था कि शहर के अस्पतालों में कुछ ही घंटो की ऑक्सीजन बची है, जिसके बाद रात भर में आनन-फानन में कई अस्पतालों को यह गैस पहुंचाई गई.

बुधवार को ऑक्सीजन की तत्काल आपूर्ति की एक याचिका को सुनते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को बुरी तरह फटकार लगाई थी.अदालत ने कहा था कि यह राष्ट्रीय इमरजेंसी है और देखकर ऐसा लगता है कि आपके लिए मानव जीवन कोई मायने नहीं रखता.

पीठ ने आगे कहा, ‘आप सरकार होने के बतौर यह नहीं कह सकते कि देखिये हम इतना दे सकते हैं, इतना नहीं दे सकते तो अगर लोग मरते हैं, तो मरने दीजिये. यह स्वीकार्य नहीं है हमें लोगों के बुनियादी अधिकार सुनिश्चित करने होंगे.

अदालत ने कहा कि लोग मर रहे हैं, और हम लोगों को ऑक्सीजन की कमी के कारण मरते हुए नहीं देख सकते. आप ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाने के लिए सभी संभावनाओं की तलाश नहीं कर रहे. भीख मांगें, उधार लें या चोरी करें. लेकिन ऑक्सीजन लाना आपकी जिम्मेदारी है.

सुनवाई में केंद्र सरकार के कुछ उद्योगों को ऑक्सीजन के इस्तेमाल करने की छूट को लेकर अदालत ने कहा था, ‘केंद्र हालात की गंभीरता को क्यों नहीं समझ रहा? हम इस बात से स्तब्ध और निराश हैं कि अस्पतालों में ऑक्सीजन खत्म हो रही है लेकिन इस्पात संयंत्र चल रहे हैं.’

उच्च न्यायालय ने कहा कि जब तक ऑक्सीजन का आयात नहीं होता तब तक अगर इस्पात और पेट्रोलियम जैसे उद्योग कम क्षमता के साथ काम करें तो कोई पहाड़ नहीं टूट पड़ेगा. लेकिन अस्पतालों को चिकित्सीय ऑक्सीजन नहीं मिली तो तबाही मच जाएगी.

दिल्ली की ही तरह महाराष्ट्र में भी ऑक्सीजन की कमी है, जिसने संक्रमितों की बढ़ती संख्या के चलते केंद्र से अधिक मेडिकल ऑक्सीजन मुहैया कराने का आग्रह किया है. इस समय देश के कुल मामलों में से साठ फीसदी महाराष्ट्र में हैं.

इसके अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और कई राज्यों में भी ऑक्सीजन की कमी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है.वेबसाइट ने हटाई ऑक्सीजन निर्यात के बारे में प्रकाशित खबरइस बीच ऑक्सीजन निर्यात के बारे में बिजनेस टुडे जैसी ही रिपोर्ट प्रकाशित करने के बाद वेबसाइट मनीकंट्रोल ने इसे डिलीट कर दिया.

न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्ट के अनुसार, 21 अप्रैल को यह रिपोर्ट वेबसाइट से हटा दी गई और उसकी जगह खेद प्रकट करते हुए लिखा कि यह रिपोर्ट ‘अनावश्यक डर’ पैदा करते हुए भारत के ऑक्सीजन निर्यात के बारे में ‘भ्रामक तस्वीर’ बना रही थी और इसे प्रकाशित नहीं किया जाना चाहिए था.

अब यह रिपोर्ट हटा दी गई है लेकिन इसके आर्काइव्ड वर्ज़न को इस लिंक पर पढ़ा जा सकता है. वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों पर आधारित इस रिपोर्ट को लेकर सरकार की ओर से सीधे तौर पर मनीकंट्रोल का नाम लिए बगैर समाचार एजेंसी एएनआई पर बयान जारी किया गया था.

इसमें कहा गया था कि सरकार ने अप्रैल 2020 से फरवरी 2021 के बीच 9,884 मीट्रिक टन औद्योगिक ऑक्सीजन और 12 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन निर्यात की है.वेबसाइट ने यह कहते हुए रिपोर्ट को हटाया कि उसका 9,294 मीट्रिक टन निर्यात की बात कहना ‘देश की एक दिन में उत्पादित हो रही क्षमता से कुछ ज्यादा है.’

गौरतलब बात यह है कि डिलीट की गई रिपोर्ट में भारत की उत्पादन क्षमता का जिक्र पहले ही किया गया था. इसमें लिखा था, ‘पिछले हफ्ते… सरकार ने स्पष्टीकरण दिया कि भारत की ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता 7,127 मीट्रिक टन/प्रतिदिन की है.’

जहां तक बात औद्योगिक और मेडिकल ऑक्सीजन के अंतर की है, वेबसाइट की रिपोर्ट में इस बारे में भी बताया गया था. इसमें लिखा था कि ‘निर्यात लिक्विड ऑक्सीजन की शक्ल में हुआ जिसे बाद में औद्योगिक और मेडिकल कामों में इस्तेमाल किया गया.’

डिलीट किए जाने से पहले इस रिपोर्ट को सोशल मीडिया पर बहुत से लोगों ने साझा किया था, जिनमें कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी समेत विपक्ष के कई नेता भी शामिल थे.

मनीकंट्रोल नेटवर्क 18 समूह द्वारा संचालित वेबसाइट है, जिसका स्वामित्व मुकेश अंबानी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के पास है.

द वायर से साभार

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