कोरोना : ऑक्सीजन की किल्लत से हाहाकार, अस्पताल बोल रहे, सिलेंडर लाओ तब मिलेगा दाखिला

कोविड से ज्यादा अव्यवस्था व अभाव से दम तोड़ते लोग

शहर-शहर कोरोना का कहर अब और खौफनाक रूप ले चुका है। कोरोना संक्रमण में सांसों को चलाए रखने वाली ऑक्सीजन की भारी किल्लत हो रही है। शहरों में ऑक्सीजन की किल्लत जानलेवा साबित हो रही है। दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में कहा जा रहा है कि अगर मरीजों के पास ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं है तो उन्हें भर्ती नहीं किया जाएगा।

बता दें कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह राष्ट्रीय राजधानी के छह अस्पतालों में जल्द से जल्द किसी भी तरह से ऑक्सीजन की आपूर्ति करे। दिल्ली-एनसीआर में अपने अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सीजन की कमी को लेकर मैक्स हेल्थकेयर की याचिका पर सुनवाई करते हुए HC की पीठ ने यह आदेश जारी किया। अस्पतालों में मैक्स हॉस्पिटल (साकेत), मैक्स स्मार्ट हॉस्पिटल (साकेत), मैक्स हॉस्पिटल (पटपड़गंज), मैक्स हॉस्पिटल (शालीमार बाग), मैक्स हॉस्पिटल (वैशाली) और मैक्स हॉस्पिटल (गुरुग्राम) शामिल हैं।

उच्च न्यायालय को सूचित किया गया कि 2,000 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन दिल्ली के पटपड़गंज के मैक्स अस्पताल में दो घंटे में पहुँच जाएगी। इससे पहले बुधवार को, मैक्स हेल्थकेयर ने एक प्रेस बयान जारी कर कहा था कि उसके पास केवल कुछ घंटों की ऑक्सीजन शेष थी। बयान में कहा गया कि सात मैक्स हेल्थकेयर अस्पतालों में 1,400 कोविड -19 रोगियों का इलाज किया जा रहा है।

तब मैक्स हेल्थकेयर ने इस संबंध में तत्काल सुनवाई के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया। दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस विपिन सांघी और रेखा पल्ली ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह नागरिकों के जीवन के मौलिक अधिकार की रक्षा करे, जो कोविड -19 के कारण गंभीर रूप से बीमार हैं, और उन्हें मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति करे।

पीठ ने इस संबंध में उच्च न्यायालय के 20 अप्रैल के आदेश के बावजूद केंद्र सरकार द्वारा निष्क्रियता पर आश्चर्य व्यक्त किया। कोर्ट ने कहा, “कल, हमने ऑक्सीजन की कमी के पहलू पर एक विस्तृत आदेश पारित किया था। हमें सूचित किया गया था कि कुछ महत्वपूर्ण उद्योगों, को छोड़कर सभी औद्योगिक ऑक्सीजन का उपयोग चिकित्सा के लिए किया जा रहा है।”

इसके अलावा, दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि केंद्र को उद्योगों में इस्तेमाल की जाने वाली ऑक्सीजन को मेडिकल उपयोग के लिए डायवर्ट करना चाहिए।

जनसत्ता से साभार

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