मोदी सरकार ने कोविड ड्यूटी में लगे स्वास्थ्य कर्मियों की बीमा योजना बंद की।

भारत सरकार के केंद्रीय स्वास्थ मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सचिव राजेश भूषण द्वारा राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे गए एक सर्कूलर के अनुसार कोविड-19 महामारी के दौरान स्वास्थ्य कर्मचारियों को मिलने वाली 50 लाख की बीमा योजना इस 24 मार्च को समाप्त हो गई है। 24 अप्रैल के बाद इस बीमा योजना के अन्तर्गत क्लेम नहीं किया जा सकेगा।

नई पॉलिसी की घोषणा अभी नहीं हुई है और कोरोना महामारी के इस दूसरे भयानक लहर में केंद्र सरकार जिस तरह से जनता को नजरअंदाज कर रही है उससे लगता है शायद किसी दूसरी पॉलिसी की घोषणा ना भी हो। इस योजना को जारी ना रखकर मोदी सरकार ने यह दिखा दिया कि उसे सत्ता और अदानी-अंबानी के सिवा किसी की परवाह नहीं है।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत कोविड महामारी के दौरान ड्यूटी पर लगे डॉक्टरों, नर्सों, आशा कर्मचारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सफ़ाई कर्मचारियों और कुछ निजी सेक्टर के कर्मचारियों की मृत्यु होने पर मिलने वाली 50 लाख की यह बीमा योजना कोरोना महामारी के पहले दौर में घोषित हुई 1.7 लाख करोड़ रुपए के कोविड-19 रिलीफ़ पैकेज का हिस्सा थी और इस योजना के दायरे में 22 लाख से ज्यादा स्वास्थ्य कर्मचारी शामिल थे।

आईएमए के अनुसार कोविड 19 के पहले दौर में करीब 739 एमबीबीएस डॉक्टरों की मौत हुई और अभी दूसरे दौर में 4 डॉक्टरों की मृत्यु हुई है। वहीं नर्सों, आशा वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सफाई कर्मचारियों की मौत का कोई आंकड़ा नहीं है। केंद्र सरकार ने भी अबतक कोविड से मरने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों की संख्या नहीं बताई है। सिर्फ इतना बताया गया कि बीमा कंपनी द्वारा 287 दावों को निपटाया गया है।

विडंबना देखिए कुछ दिनों पहले सरकार ने इन फ्रंट लाइन वर्कर्स को “कोविड वॉरियर्स” का नाम दिया था। फिलहाल कोरोना महामारी के दूसरे दौर में घातक संक्रमण के दौरान दम तोड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी लापरवाही के बीच बिना n95 मास्क, फेस शील्ड, पीपीई किट की सुरक्षा मिले अपनी जान और परिवार के भविष्य को दांव पर लगाकर कोविड ड्यूटी में लगे इन “कोविड वॉरियर्स” और उनके परिवार को मोदी सरकार ने बिना किसी सुरक्षा योजना और प्रोत्साहन के मरने के लिए छोड़ दिया है।

भारत में स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही अस्पतालों, संसाधनों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है और पिछले साल कोविड के पहले दौर के दौरान इसकी रही सही हकीकत खुलकर सामने आ गई थी फिर भी सरकार ने कोई सबक नहीं लिया, कोविड से निपटने की कोई तैयारी नहीं की गई जिसका नतीजा अब सामने आ रहा है। यही नहीं पिछले साल कोविड के दौरान दिल्ली सहित कई राज्यों में स्वास्थ्य कर्मियों, अस्पतालों की नर्सों और डॉक्टरों को वेतन नहीं दिया गया था जिसको लेकर काफी हो हल्ला भी हुआ था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार विश्व भर में कोविड के 14 प्रतिशत केस स्वास्थ्य कर्मचारियों के हैं। भारत में कोविड से प्रभावित स्वास्थ्य कर्मचारियों में 38 प्रतिशत महिलाएं हैं। अगस्त 2020 की टाईम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 87 हज़ार स्वास्थ्य कर्मचारियों को कोविड संक्रमण हुआ। स्वास्थ्य कर्मचारियों के संक्रमण ग्रस्त होने से कोविड की स्थिति को संभालना मुश्किल है। ठेके पर लगे सफाई कर्मचारियों तथा आशा वर्कर और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जिन्हें श्रमिक का दर्जा हासिल नहीं है उनके लिए तो ये स्थिति उनकी हत्या के साज़िश के समान है।

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