कर्नाटक: दिहाड़ी मज़दूर द्वारा संचालित जनता लाइब्रेरी में शरारती तत्वों ने आग लगाई।

बीते शुक्रवार को कर्नाटक के मैसूर शहर में हुई एक दुखद घटना में शरारती तत्वों ने एक 62 साल के दिहाड़ी मजदूर सय्यद इस्साक द्वारा स्थापित एक सार्वजनिक लाइब्रेरी में आग लगा दी। इस लाइब्रेरी में विभिन्न विषयों की करीब 11000 किताबें थी।

सय्यद इस्साक पिछले 10 साल से इस लाइब्रेरी को जनता की सहायता से चला रहे थे और शहर के राजीव नगर और कीर्ति नगर इलाके में काफी चर्चित है। यह लाइब्रेरी समाज के हर एक तबके लिए खुली हुई थी।

शिक्षा से वंचित सय्यद इस्साक पहले दिहाड़ी मजदूरी करते थे, उसके बाद अंडर ग्राउंड ड्रेनेज की सफाई का काम किया और अभी जीविका चलाने के लिए कोई भी काम कर लेते हैं।

आंसू भरी आंखों से सय्यद इस्साक के अनुसार सुबह 4:00 बजे लाइब्रेरी के करीब रहने वाले ने मुझे आकर बताया कि लाइब्रेरी में आग लग गई है। मैं भागकर वहां पहुंचा लेकिन तब तक सब कुछ राख हो चुका था।

लोगों की पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने और कन्नड़ भाषा सीखने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य के साथ इस्साक में राजीव नगर के इलाके में एक कॉरपोरेशन पार्क के अंदर टीन की छत के नीचे इस लाइब्रेरी की शुरुआत की। लाइब्रेरी में प्रतिदिन 100 से 150 लोग आते थे। लाइब्रेरी में गीता, कुरान और बाइबिल की मिली जुली 3000 से ज्यादा प्रतियां थी। लाइब्रेरी के लिए इस्साक रोज कन्नड़, तमिल, अंग्रेजी और उर्दू भाषा के 17 अखबार खरीदा करते थे।

लाइब्रेरी 85% किताबें कन्नड़ तथा अन्य किताबें दूसरी भाषा की थी। इस लाइब्रेरी की देखभाल और अखबारों को खरीदने में सय्यद इस्साक अपनी जेब से हर साल ₹6000 खर्च करते थे।

आगजनी की घटना को लेकर इस्साक ने उदयागिरी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने धारा 436 के अंतर्गत एफआईआर दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।

इस्साक का कहना है कि मैं पढ़ाई लिखाई से वंचित रहा मगर दूसरों को यह ना झेलना पड़े। इसलिए मैं चाहता हूं कि लोग लिखे-पढ़ें, अपनी मातृभाषा कन्नड़ सीखें। मैं इस घटना से हार मानने वाला नहीं हूं और इस लाइब्रेरी को दोबारा बनाकर ही दम लूंगा।

इस बीच सोशल मीडिया पर इस खबर के वायरल होने के बाद अनेक लोग सय्यद इस्साक की लाइब्रेरी का दोबारा निर्माण करने में सहयोग देने के लिए आगे आए हैं।

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