किसानों की चेतावनी : केंद्र सरकार को महंगा पड़ेगा ‘बिजली संशोधन बिल’ पर यू टर्न

गेहूं की कटाई के दौरान कर्मचारी संभालेंगे दिल्ली-मोर्चा

दिल्ली की सरहदों पर किसान आंदोलन 132वें दिन भी जारी रहा। संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया है कि गेहूं की कटाई के दौरान दिल्ली-मोर्चा की कमान कर्मचारी संभालेंगे। नेताओं ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि वह बिजली संशोधन विधेयक को कानून में बदलने का विचार न करे। उधर आन्दोलन के समर्थन में उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य ने अपने पद से इस्तीफा दिया है।

किसान नेताओं ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि वह बिजली संशोधन विधेयक, 2020 को कानून में बदलने का विचार न करे, जो कि वादे का उल्लंघन होगा। क्योंकि केंद्रीय मंत्रियों ने किसान-नेताओं को आश्वासन दिया था कि इस बिल को रद्द कर दिया जाएगा।

संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल किसान संगठनों ने दिल्ली के किसान मोर्चे को मजबूत बनाने के लिए तैयारी की है।  डेमोक्रेटिक मुलाजम फेडरेशन और पंजाब सबऑर्डिनेट सर्विस फेडरेशन के बैनर तले पंजाब के हजारों कर्मचारियों ने समर्थन देते हुए 11 अप्रैल को दिल्ली रवाना होने की तैयारी शुरू कर दी है।  नेताओं ने कहा कि आंदोलन को किसी भी तरह आन्दोलन को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

बीती रात आये तेज तूफान और हल्की बारिश ने किसानों को एक निराशा की स्थिति में छोड़ दिया है क्योंकि अपने बच्चों की तरह पाली हुई गेहूं की फसल पकने के लिए तैयार है और कुछ दिनों में कटाई शुरू हो जाती है।  किसानों ने कहा कि तेज हवाओं के कारण फसल खेतों में बिखर गई है और तूफान ने किसानों की उम्मीदों को धराशायी कर दिया है। उल्लेखनीय है कि तेज हवाओं के कारण फसलें खेतों में बिखर गईं और कुछ समय बाद हल्की बारिश भी हुई, जिससे पैदावार प्रभावित होगी।

केंद्र सरकार की चुपचाप बीटी कॉटन के बीज की कीमत में बढ़ोतरी की किसान नेताओं ने कड़ी निंदा की है। 37 ₹ प्रति पैकेट कीमतें बढ़ाकर किसानों पर एक और हमला किया है। किसानों ने कहा कि इससे केवल पंजाब के ही किसानों पर 14 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।  उन्होंने कहा कि पिछले साल यह पैकेट 730 ₹ में तय किया गया था और अब 767 ₹ में पैकेट की आपूर्ति शुरू की गई है जो कि कपास के किसानों को प्रभावित करेगी।

लगातार सातवे महीने भी पूरे पंजाब में पक्के धरने जारी रहे।  पंजाब के 32 किसान संगठन, जो कि संयुक्त किसान मोर्चा का हिस्सा हैं, 68 स्थानों पर दिन-रात धरना दे रहे हैं, जिनमें भाजपा नेताओं के घरों के सामने, टोल प्लाज़ा, रेलवे स्टेशन पार्क और अंबानी अडानी का व्यावसायिक परिसर शामिल है।

हरियाणा के किसान संगठन भाजपा व जजपा के नेताओ का लगातार विरोध कर रहे है और चेतावनी दी है कि जब तक किसान आंदोलन चल रहा है वे किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में न जाएं। भाजपा के ओमप्रकाश धनखड़, नायब सैनी व अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ वोट डालने वाले विधायक गोपाल कांडा का विरोध कर रहे किसानों पर पुलिस द्वारा कार्रवाई करने के बाद प्रस्ताव पास किये है। किसान मोर्चा सभी किसानों से अपील करता है कि शांतमयी रहते हुए भाजपा व जजपा नेताओ का सामाजिक बहिष्कार जारी रखें।

किसान आन्दोलन के समर्थन में उत्तर प्रदेश महिला आयोग की एक सदस्य ने अपने पद से इस्तीफा दिया है। हम साथ ही अन्य नेताओं से अपील करते है कि वे भी अपने पदों से इस्तीफा देकर किसानों के प्रति सवेंदनशीलता दिखाए।

%d bloggers like this: