कार्यबहाली हेतु सत्यम ऑटो के मज़दूरों-महिलाओं का कंपनी गेट पर धरना

पुलिस-प्रशासन धरना खत्म कराने का दबाव बनाने में जुटी

हरिद्वार (उत्तराखंड)। चार साल से अवैध गेटबंदी के शिकार सत्यम ऑटो कंपोनेंट के 300 मज़दूरों ने परिवार सहित आज सोमवार को कंपनी के गेट पर कूच किया और वहीं धरने पर बैठ गए। बैठते ही शासन प्रशासन में खलबली मच गई और पूरा सरकारी अमला पहुँच गया। पिछले बीस दिनों से अनशन के बाद मज़दूरों ने यह कदम उठाया।

इस बीच मौके पर ही थाना सिडकुल, सीओ सदर हरिद्वार, एसडीएम गोपाल सिंह चौहान, एलसी हरिद्वार अरविंद सैनी पुलिस बल के साथ पहुंच गए। हरिद्वार के प्रशासन  ने मजदूरों की और कंपनी प्रबंधन की वार्ता भी कराई। समाचार लिखे जाने तक कोई हल नहीं निकाला और मज़दूरों, महिलाओं व बच्चों का धरना जारी है।

उधर धरना स्थल पर पुलिस मज़दूरों को परेशान करने के सभी हथकंडे उठा रही है। पुलिस ने लाइट व पानी बंद करा दिया है, शौचालय की व्यवस्था नहीं कराई और मजदूरों पर धरना खत्म करने का लगातार दबाव बनाए हुए है।

20 दिन से अनशन-धरना जारी रहा

हीरो मोटोकॉर्प की वेंडर कंपनी सत्यम ऑटो के श्रमिकों ने सिडकुल हरिद्वार रानीपुर के चारों कोनो- राजा बिस्कुट, शिवालिक नगर चौक, रौशनबाद और जिला अधिकारी कार्यालय हरिद्वार पर सत्यम ऑटो मजदूरों के परिवार की महिलाएं और बच्चे भी अनशन पर बैठे।

इस बीच हरिद्वार कुंभ में एक कार्यक्रम में पहुंचे उत्तराखंड के श्रम मंत्री हरक सिंह रावत का सत्यम ऑटो के मज़दूरों ने घेराव किया और कहा कि पिछले 20 दिन से श्रमिक व महिलाएं डीएम हरिद्वार कार्यालय पर धरने पर बैठे हैं लेकिन अब तक उत्तराखंड सरकार के किसी भी विधायक, श्रम मंत्री, सांसद, शासन व प्रशासन के किसी भी अधिकारी ने कर्मचारियों की सुध नहीं ली है।

कंपनी गेट पर धरना शुरू

20 दिन अनशन व धरने के बावजूद शासन-प्रशासन व सरकार के बहरे कानों तक आवाज नहीं पहुँची, तब मज़दूरों ने आपने परिवारों और बच्चों के साथ आज सोमवार को फैक्ट्री गेट कूच किया और वहीं धरने पर डट गए।

मार्च 2017 से 300 मज़दूर हैं बाहर

सत्यम ऑटो के मज़दूरों ने प्रबंधन को नए वेतन समझौते के लिए 29 जुलाई 2015 को अपना अट्ठारह सूत्री माँगपत्र दिया था। प्रबंधन की हठधर्मिता के कारण कई दौर की वार्ता में हल ना निकलने पर विवाद औद्योगिक न्यायाधिकरण हल्द्वानी को संदर्भित कर दिया गया।

इस बीच प्रबंधन ने 2 मार्च 2017 को गोपनीय तरीके से कुछ मज़दूरों से एक समझौता कर लिया। जिसका मज़दूरों ने विरोध किया और अपनी लिखित आपत्ति श्रम अधिकारियों को दी।

इससे नाराज प्रबंधन ने 17 अप्रैल 2017 को विरोध करने वाले 300 मजदूरों की जबरन गेट बंदी कर दी थी। तब से मज़दूरों का संघर्ष लगातार जारी है।

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