वर्तमान किसान आंदोलन के मज़दूर व मेहनतकश किसानों के लिए महत्व पर जींद में आयोजित गोष्ठी

जींद: कल दिनांक 4 अप्रैल को जिंद में जन संघर्ष मंच हरियाणा व मेहनतकश किसान मोर्चा के संयुक्त तत्वाधान में ‘वर्तमान किसान आन्दोलन: मेहनतकश किसान व मजदूर वर्ग के लिए महत्व’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन स्थानीय शिव धर्मशाला में किया गया। गोष्ठी में हरियाणा के विभिन्न जिलों, राजस्थान व पंजाब से आए किसान और यूनियन कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। सदन में बड़ी मात्रा में महिलाओं की भागीदारी भी सराहनीय रही।

विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए जन संघर्ष मंच हरियाणा के सलाहाकार डाॅ. सी. डी. शर्मा ने सबसे पहले साढ़े चार महीने से दिल्ली बार्डर पर किसान आन्दोलन में शहीद हुए किसानों को क्रांतिकारी श्रद्धांजलि पेश की। उन्होंने कल किसानों पर हरियाणा पुलिस द्वारा बर्बर लाठीचार्ज, किसान नेताओं की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की। उन्होंने वर्तमान किसान आन्दोलन पर चर्चा करते हुए कहा कि आज लगातार कृषि संकट के चलते किसान तबाह होते जा रहे है व मजदूर बनते जा रहे हैं। आंकड़े बताते हैं आज 90 प्रतिशत किसान आधा मजदूर बन रहा है। ये तीनों काले कानून न सिर्फ किसानों के बल्कि मजदूर वर्ग के भी खिलाफ हैं, लेकिन सरकार मेहनतकश किसान व मजदूर वर्ग को अलग-अलग बांट कर रखना चाहती है। कारपोरेट्स के खिलाफ यह आन्दोलन, फांसीवाद के खिलाफ भी लड़़ाई है। पूंजीपतियों के हितों में पास किए गए ये तीनों काले कृषि कानूनों को पास करते हुए मोदी सरकार कहती है कि ये तो 20-25 साल पहले ही पारित हो जाने चाहिए थे, मोदी सरकार से पहले की सरकारों ने भी काॅरपोरेट्स के हितों में ही काम किए जिसे मोदी सरकार ने तेज़ी से आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि काॅरपोरेट्स के हितों में बने इन कानूनों के खिलाफ आन्दोलन को और तेज करना होगा। इस आन्दोलन ने लोगों के भाईचारे को बढ़ाया है। क्षेत्रवाद व जाति-पाति की दीवारों को कमजोर किया है।

सभा को संबोधित करते जन संघर्ष मंच के सलाहकार सी डी शर्मा

मेहनतकश किसान मोर्चा के नेता शैलेन्द्र ने किसान आन्दोलन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि ये तीनों कानून पूंजीपति वर्ग के मुनाफे को बढ़ाने, जमाखोरी-कालाबाजारी को बढ़ावा देने वाले, नीजिकरण को बढ़ाने व ठेका प्रथा को तेजी से लागू करने वाले हैं। साथ ही उन्होंने ने इस पक्ष पे ज़ोर रखा की वर्तमान कृषि कानून हरित क्रांति की नीतियों में जड़ रखने वाले मौजूदा कृषि संकट को और गहरा करेंगे। हरित क्रांति की नीतियों ने भारतीय कृषि से उत्पन्न मुनाफे को अंतर्राष्ट्रीय पूंजी के ख़ज़ाने में पहुंचा कर भारत के छोटे मझोल मेहनतकश किसानों का दिवालिया निकाला है। इस लिए जरूरत है की आन्दोलन अपनी तात्कालिक मांगों के साथ हरित क्रांति के कृषि व्यवस्था के विकल्प का भी सवाल उठाए जो सही मायने में भारत के किसान और मजदूर आबादी को राहत और सम्मानजनक जीवन मुहैय्या करा सके।

सभाको संबोधित करते हुए इंकलाबी मज़दूर केंद्र के नेता अजीत

इंकलाबी मजदूर केन्द्र के नेता अजीत ने खेती संकट की चर्चा करते हुए कहा कि इन तीनों खेती कानून के साथ-साथ मज़दूरों के अधिकारों को खत्म करने वाले चार लेबर कोड पास किए गए हैं। मजदूरों और किसानों पर कड़ा प्रहार जारी है। आजादी के बाद यह उत्पादक वर्ग का बड़ा आन्दोलन है। बीजेपी सरकार फांसीवादी एजेंडे को आगे बढ़ा रही है, जनता को जाति धर्म सम्प्रदाय के नाम पर बांटने का काम किया जा रहा है। लेकिन इस आन्दोलन ने सरकार की फूटपरस्त नीति को परास्त किया है।

भारतीय किसान यूनियन डकौंदा, पंजाब से आए हरनेक सिंह ने कहा कि इस आन्दोलन ने पंजाब-हरियाणा की सांझ को मजबूत किया है। कोरोना की आड़ में पास किए मजदूर-किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ आन्दोलन छिड़ा हुआ है और बाॅर्डर पर बैठे किसानों ने साबित कर दिया है कि आन्दोलन को तोड़ने के सरकार की तमाम साजिशों को फेल किया है। आंदोलन ने लोगों के सांस्कृतिक स्तर को भी उठाया है।

पंजाब से आए किसान नेता सुखदेव ने कहा कि इस आंदोलन ने लोगों में बोलने की हिम्मत को बढ़ाया है, लोगों से अंध राष्ट्रवाद के चश्मे को हटाया है व धर्म आधारित भेदभाव को धक्का दिया है।

मेहनतकश किसान मोर्चा के खुशीराम ने कहा कि इस आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी बहुत महत्वपूर्ण है, यह आंदोलन सामाजिक व सांस्कृतिक स्तर को ऊंचा उठाने में भूमिका निभा रहा है।

गोष्ठी का दूसरा सत्र प्रश्नोत्तर व चर्चा के लिए खुला रहा और श्रोताओं से कई महत्वपूर्ण सवाल उठे, जैसे कृषि संकट का मुकाबला करने में वैकल्पिक खेती की व्यावहारिकता, आनोलन में मज़दूर किसानों के संयुक्त संघर्ष के उदाहरण, एम एस पी पर कानून का महत्व, वर्तमान आंदोलन का तानाशाही ताकतों से देश बचाने के संघर्ष में भूमिका, भारतीय पूंजीपति वर्ग के हितों का हरित क्रांति से संपर्क इत्यादि। सदन ने परसों रोहतक में किसानों पर हुए लाठीचार्ज और किसान नेता राकेश सिंह टिकैत पर एबीवीपी के हमले की निंदा करने का प्रस्ताव ग्रहण किया। कार्यक्रम का समापन घुसकानी गांव की महिलाओं द्वारा क्रांतिकारी गीत की पेशकश से लिया गया।

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