श्रमिक समस्या विकट, मोर्चा ने की प्रशासन से मुलाकात, जताया आक्रोश

निदान के लिए बनी कमेटी निष्प्रभावी, मज़दूरों में आक्रोश

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। वोल्टास, माइक्रोमैक्स, एलजीबी में श्रमिकों की कार्यबहाली, गुजरात अम्बुजा प्रबन्धन की गिरफ्तारी सहित सिडकुल की श्रमिक समस्याओं को लेकर श्रमिक संयुक्त मोर्चा ने प्रशासन से मुलाकात कर रोष जताया। कहा कि निदान के लिए बनी प्रशासनिक कमेटी ने 4 महीने में एक भी श्रमिक की समस्या का समाधान नहीं किया।

3 मार्च को मोर्चा के नेतृत्व में कई यूनियनों के प्रतिनिधि डीएम से मिलने गए, लेकिन कोरोना की व्यस्तता बताकर उन्होंने मुलाकात नहीं कीं। एडीएम की ने भी खुद मिलना ज़रूरी नहीं समझा और पहले तहसीलदार को भेजा, फिर एसडीएम रुद्रपुर ने मुलाकात की।

मुलाकात के दौरान समस्याओं को सुनने के बीच एसडीएम महोदय मोर्चा नेताओं को डराने-धमकाने का भी काम करते रहे। जबकि कार्यबहाली की माँग के साथ वोल्टास के मज़दूर 6 अप्रैल से हड़ताल पर जाने वाले हैं।

कमेटी उद्योगपतियों के दबाव में

ज्ञात हो कि श्रमिक संयुक्त मोर्चा की ओर से क्षेत्र में औद्योगिक शांति कायम करने और श्रमिक समस्याओं के निस्तारण के संबंध में जिलाधिकारी (डीएम) से कई बार मुलाकात की गई और ज्ञापन दिए गए।

डीएम द्वारा दिसम्बर, 2020 में एडीएम की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन भी हुआ। जिसमे जिला प्रशासन ने एक माह में समस्त मामलों के समाधान का वायदा किया था।

लेकिन चार माह का लंबा समय बीत जाने के बावजूद महज 3-4 कंपनियों की वार्ता की औपचारिकता के अलावा कोई प्रगति नहीं हुई। स्पष्ट है कि प्रशासन उद्योपतियों के दबाव में है।

वोल्टास, माइक्रोमैक्स श्रमिकों का दमन तेज

मोर्चा ने बताया कि इस दौरान क्षेत्र में मज़दूरों का दमन तेज होता जा रहा है।

वोल्टास लिमिटेड, सिडकुल, पंतनगर में पिछले डेढ़ साल से गैरकानूनी गेटबन्दी के शिकार 9 श्रमिकों के मामले सहित माँगपत्र का कोई समाधान नहीं निकला। ऐसी स्थिति में मज़दूर 2 अप्रैल से हड़ताल पर जाने वाले थे, लेकिन मोर्चा के अनुरोध पर हड़ताल की तिथि आगे बढ़ते हुए वोल्टास इम्पालाइज यूनियन ने टूल डाउन शुरू किया। अब 6 अप्रैल 2021 से मज़दूर हड़ताल पर जाएंगे। यह क्षेत्र में एक बड़े औद्योगिक अशांति का कारण बन सकता है।

भगवती प्रोडक्ट (माइक्रोमैक्स) में औद्योगिक न्यायाधिकरण के स्पष्ट आदेश और उच्च न्यायालय नैनीताल द्वारा इसकी पुष्टि के बावजूद 303 श्रमिकों की छँटनी अवैध घोषित होने के बावजूद कार्यबहाली नहीं हुई।

साथ ही 47 श्रमिक ले ऑफ के शिकार हैं। इसी दौरान प्रबन्धन ने यूनियन अध्यक्ष को मनमाने रूप से बर्खास्त कर दिया। ऐसे में 351 श्रमिकों की कार्यबहाली का विवाद विगत 27 महीने से लगातार मौजूद है और मज़दूरों का संघर्ष लगातार जारी है।

गुजरात अंबुजा, सितारगंज में श्रमिकों के पीएफ घोटाले के मामले में अदालत के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद प्रबंधन की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हुई है। जबकि बगैर किसी मामले के मज़दूरों की गिरफ़्तारी आम बात है।

एलजी बालाकृष्णन एंड ब्रास लिमिटेड, सिडकुल, पंतनगर में यूनियन महामंत्री और श्रमिक पूरन चंद पांडे की कमेटी गठन के बाद गैरकानूनी रूप से बर्खास्तगी हुई। प्रशासन की निष्क्रियता से अभी तक उनकी कार्यबहाली नहीं हुई है ना ही कोई वार्ता हो रही है।

मज़दूर उत्पीड़ित, प्रशासनिक कमेटी महज शोपीस

मोर्चा ने कहा कि कमेटी बनने और एक माह मे समाधान के आश्वासन के बावजूद श्रमिकों का उत्पीड़न बढ़त जा रहा है और समाधान तो दूर कमेटी द्वारा महज तीन-चार कंपनियों की वार्ता की खानापूर्ति के अलावा कुछ नहीं हुआ। और अब प्रशासन मिलने से भी बच रहा है।

हालत ये हैं कि करोलिया लाइटिंग में यूनियन उपाध्यक्ष सुनील यादव, बजाज मोटर्स, इंटरार्क आदि के श्रमिकों सहित किसी भी श्रमिक की कार्यबहाली का मुद्दा नहीं हल हो रहा है। तमाम कंपनियों के माँगपत्र के विवाद जैसे के तैसे पड़े हैं और प्रशासनिक कमेटी शो पीस बनकर रह गया है।

फिलहाल दमन और प्रशासन का रवैया श्रमिकों के बड़े आक्रोश का कारण बन गयी है।

प्रशासन से मिलने वालों में श्रमिक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश तिवारी, महासचिव चंद्र मोहन लखेड़ा के नेतृत्व में वोल्टास एंप्लाइज यूनियन, भगवती श्रमिक संगठन, रॉकेट रिद्धि सिद्धि कर्मचारी संघ, इंटरार्क मज़दूर संगठन, एलजीबी वर्कर्स यूनियन, इंकलाबी मज़दूर केंद्र, मज़दूर सहयोग केंद्र आदि शामिल थे।

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