श्रम संहिताओं की प्रतियाँ जलाने के साथ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन

केंद्र सरकार ने श्रम संहिताओं को लागू करना टाला

मोदी सरकार की 4 श्रम संहिताओं के ख़िलाफ़ 1 अप्रैल को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हुआ और काले कानूनों की प्रतियां जलाई गईं। यूनियनों ने किसान मोर्चा द्वारा मई के पहले हफ्ते में संसद मार्च को समर्थन देते हुए मज़दूरों-किसानों की एकता की मजबूती का आह्वान किया। उधर केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल से इसे लागू करने को अगले आदेश तक रोक दिया है।

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रीय मंच और संघर्षशील मज़दूर संगांठनों के साझा मंच मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) के आह्वान पर श्रम संहिताओं और सरकारी व सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण, निगमीकरण, रोजगार व असंगठित श्रमिकों पर बढ़ते हमलों, कृषि कानूनों एवं महंगाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और 4 श्रम संहिताओं (लेबर कोडों) की प्रतियां जलाई।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि जब आम नागरिक कोरोना और आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है, ऐसे समय में सरकार लंबे संघर्षों और कुर्बानियों से हासिल श्रम कानूनों के स्थान पर अलोकतांत्रिक तरीके से चार श्रम संहिताएं लागू करने की तैयारी कर रही है।

निश्चित समय के लिए रोजगार के प्रावधान से स्थाई रोजगार समाप्त करने, मालिकों को श्रमिकों की मनमर्जी से निकालने का अधिकार देना, काम के घंटे बढ़ाने जैसे प्रावधान नए लेबर कोड में है। जहाँ छँटनी, बंदी को आसान बनाया गया है, वहीं यूनियन गठन व हड़ताल करना अत्यंत मुश्किल कर दिया गया है। ये प्रावधान व्यापार को सुगम बनाने अर्थात कारपोरेट हित में लाए गए हैं।

लेबर कोड के विरोध में ट्रेड यूनियनों का देशव्यापी प्रदर्शन, जंतर-मंतर पर जलाई प्रतियां

दिल्ली

गुरुवार को जंतर मंतर नई दिल्ली पर केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों, मासा के घटक संगठनों सहित विभिन्न मज़दूर संगठनों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और लेबर कोडों की प्रतियां जलाई। इस मौके पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने श्रम क़ानूनों में मज़दूर विरोधी बदलावों, निजीकरण, जनविरोधी कृषि कानूनों की खुली मुखालफत की और इन्हें रद्द करने और महँगाई पर विराम लगाने की मांग बुलंद की।

जंतर मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एक्टू, सेवा, टीयूसीसी, ऐक्टू, एआईयूटीयूसी, एलपीएफ और यूटीयूसी सहित तमाम सेंट्रल ट्रेड यूनियन, मासा के घटक जनसंगठनों के साथ-साथ दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय मज़दूर संगठन शामिल रहे।

इनमें इफ्टू, इफ्टू (सर्वहारा), इंकलाबी मजदूर केंद्र, Aiftu (new), Ictu Ntui, बिगुल मजदूर दास्ता, केएनएस, Mek, बेलसनिका इम्प्लाइज यूनियन आदि संगठनों ने भी नये श्रम कानूनों के खिलाफ़ प्रदर्शनों में भाग लिया और श्रम कानून की प्रतियों को जलाया।

उत्तराखंड

रुद्रपुर। भगतसिंह चौक रुद्रपुर जिला ऊधमसिंह नगर में श्रमिक संयुक्त मोर्चा ऊधमसिंह नगर द्वारा प्रतिरोध सभा हुई। कार्यक्रम के अंत में चारों श्रम संहिताओं की प्रतियां फूंकी गई। स्थापित किया गया कि भारत के मजदूरों के हिस्से के बतौर सिडकुल पंतनगर के मजदूरों को भी यह मजदूर विरोधी व पूंजीपरस्त श्रम संहिताएं मंजूर नहीं हैं।

प्रतिरोध कार्यक्रम में मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा), इंकलाबी मज़दूर केंद्र, मज़दूर सहयोग केंद्र, ऐक्टू, एटक, इंटक, यजाकी वर्कर्स यूनियन, इंटरार्क पंतनगर, नेस्ले कर्मचारी संगठन, रॉकेट रिद्धि सिद्धि, वोल्टास, सनसेरा, राणे मद्रास, एडविक, डेल्टा, इंटरार्क किच्छा, भगवती-माइक्रोमैक्स, कारोलीय लाइटिंग, बजाज मोटर्स आदि शामिल थे।

हल्द्वानी। ऐक्टू ने 1 बुद्धपार्क हल्द्वानी में राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस पर लेबर कोड की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही उपनल कर्मियों के आंदोलन और मांगों का समर्थन किया गया और सरकार से तत्काल उपनल कर्मियों की मांगों को मानने की मांग करते हुए आंदोलन के कारण बर्खास्त किये गए सभी कर्मचारियों को बहाल करने की मांग की गई।

हरियाणा

कुरुक्षेत्र। मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान( मासा) के आह्वान पर जन संघर्ष मंच हरियाणा की कुरुक्षेत्र इकाई के कार्यकर्ताओं ने लेबर चौंक कुरूक्षेत्र (नजदीक गुरूद्वारा छठी पातशाही) पर मजदूरों के अधिकारों को लगभग समाप्त करने वाले चारों लेबर कोड के खिलाफ प्रदर्शन किया व प्रतियां जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया।

गोहाना। केंद्र सरकार के काले श्रम कानूनों के खिलाफ जन संघर्ष मंच हरियाणा द्वारा गोहाना के भागात सिंह चौक पर विरोध प्रदर्शन के साथ लेबर कोड की प्रतियाँ जलाईं।

जींद। मनरेगा मज़दूर यूनियन के सदस्य स्थानीय डीआरडीए परिसर जींद में इकट्ठा हुए और मनरेगा मज़दूरों की समस्याओं पर विचार विमर्श किया और मनरेगा मज़दूरों की मांगों बारे मांगपत्र सीईओ जिला परिषद के नाम सोंपा गया। संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए पांचवीं बार जिला कमेटी चुनी गयी।

इसके बाद मनरेगा मजदूरों ने मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) के बैनर तले मजदूर विरोधी चारों लेबर कोड के विरोध में स्थानीय बस स्टैंड तक प्रदर्शन किया और वहां पर प्रतीकात्मक तरीके से चारों लेबर कोड की प्रतियां फाड़ कर जलाई गईं। धरना प्रदर्शन की अध्यक्षता मासा के घटक संगठन- जन संघर्ष मंच हरियाणा के राज्य कार्यकारिणी सदस्य- कामरेड पाल सिंह, जिला प्रधान सुधीर शास्त्री व मनरेगा मजदूर यूनियन के जिला प्रधान सुरेश कुमार ने की।

फरीदाबाद। इंकलाबी मजदूर केंद्र और औद्योगिक ठेका मजदूर यूनियन ने स्थानीय बी.के. चौक पर प्रदर्शन कर मोदी सरकार द्वारा नई श्रम संहिताओं को 1 अप्रैल से लागू करने का विरोध किया। 1 अप्रैल को मजदूरों के लिए काला दिवस बताते हुए प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारा लगाते हुए नई श्रम संहिताओं की प्रतियों को दहन किया।

बिहार

रोहतास। ग्रामीण मजदूर यूनियन बिहार, घटक-मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा), खेत मजदूर यूनियन, डॉ.बी.आर.अम्बेडकर-वीर भगतसिंह विचार मंच ने संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन और मोदी के पुतला दहन के बाद सभा किया।

उत्तर प्रदेश

रेनूकूट, सोनभद्र, 1 अप्रैल। संयुक्त ट्रेड यूनियन्स कमेटी और संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रव्यापी आवाहन पर वर्कर्स फ्रंट व ठेका मजदूर यूनियन के कार्यकर्ताओं नपे अपर श्रमायुक्त कार्यलय के बाहर प्रदर्शन कर चारों लेबर कोड की प्रतियां जलाई और इसे वापस लेने की मांग की।

effigy of 4 labor codes

श्रम कोड लागू होना टला

इस बीच केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल से लागू होने वाले श्रम कोड को फिलहाल के लिए रोक दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक राज्यों ने इस संदर्भ में नियमों को अभी अंतिम रूप नहीं दिया है। चूंकि श्रम का मामला देश के संविधान में समवर्ती सूची में है, अत: केंद्र और राज्य दोनों को संहिताओं को अपने-अपने क्षेत्र में उससे जुड़े नियमों को लागू करने के अधिकार हैं।

श्रम मंत्रालय ने औद्योगिक संबंधों, मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, पेशागत स्वास्थ्य सुरक्षा और कामकाज की स्थिति पर चार संहिताओं के लिए नियमावली को अंतिम रूप दे दिया है। लेकिन कई राज्यों ने अभी नियमावली तैयार नहीं किया है।

हांलाकि केंद्र सरकार ने इन कानूनों पर फिलहाल रोक लगाने का कारण राज्यों द्वारा नियम बनाने में देरी बता रही है। लेकिन ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार मज़दूर संगठनों के भारी विरोध और किसान आंदोलन के दबाव में है और उसे लागू करने के उचित अवसर की तलाश में है।

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