किसान आंदोलन की घोषणा, 14 अप्रैल संविधान बचाओ, मई में संसद कूच

कन्याकुमारी मे किसान पंचायत, मिट्टी सत्याग्रह यात्रा जारी

सयुंक्त किसान मोर्चा की आमसभा में 5 अप्रैल को एफसीआई बचाओ दिवस,10 अप्रैल को केएमपी ब्लॉक, 13 अप्रैल को वैशाखी, 14 अप्रैल को सविंधान बचाओ दिवस, 1 मई मजदूर दिवस मज़दूर-किसान एकता को समर्पित करने तथा 6 मार्च को संसद कूच का निर्णय हुआ। उधर मिट्टी सत्याग्रह यात्रा के तहत दांडी में 100 गांव की तथा बारदोली में 50 गाँव से लाई गई मिट्टी सौंपी गई।

Farmer big announcement Parliament will be traveled in the first fortnight  of May संयुक्त किसान मोर्चा का बड़ा ऐलान- मई के पहले पखवाड़े में संसद कूच -  News Nation

सयुंक्त किसान मोर्चा की आमसभा में लिए गए निर्णय-

  1. 5 अप्रैल को FCI बचाओ दिवस मनाया जाएगा जिस दिन देशभर में FCI के दफ्तरों का घेराव किया जाएगा।
  2. 10 अप्रैल को 24 घण्टो के लिए केएमपी ब्लॉक किया जाएगा।
  3. 13 अप्रैल को वैशाखी का त्यौहार दिल्ली की सीमाओं पर मनाया जाएगा।
  4. 14 अप्रैल को डॉ भीम राव अम्बेडकर की जयंती पर सविंधान बचाओ दिवस मनाया जाएगा।
  5. 1 मई मजदूर दिवस दिल्ली के बोर्डर्स पर मनाया जाएगा। इस दिन सभी कार्यक्रम मजदूर किसान एकता को समर्पित होगा।
  6. मई के पहले पखवाड़े में संसद कूच किया जाएगा। इसमें महिलाएं, दलित-आदिवासी-बहुजन, बेरोज़गार युवा व समाज का हर तबका शामिल होगा। यह कार्यक्रम पूर्ण रूप से शांतमयी होगा। अपने गावों शहरों से दिल्ली के बॉर्डर तक लोग अपने वाहनों से आएंगे। इसके बाद दिल्ली के अनेक बॉर्डर्स तक पैदल मार्च किया जाएगा। निश्चित तारीख की घोषणा आने वाले दिनों में कर दी जाएगी।

इन घोषणाओं के साथ 31 मार्च की प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुरनाम सिंह चढूनी, प्रेम सिंह भंगू, सतनाम सिंह अजनाला, रविंदर कौर, संतोख सिंह, बूटा सिंह बुर्जगिल, जोगिंदर नैण व प्रदीप धनकड़ मौजूद रहे।

भाजपा आरएसएस के कार्यकर्ताओं द्वारा हमले की निंदा

त्रिवेन्द्रम में No Vote for BJP/NDA के बैनर लगा रहे किसान नेता बीजू व अन्य नेताओं पर भाजपा आरएसएस के कार्यकर्ताओं द्वारा हमला किया गया व उनको पीटा गया। हम इसकी कठोर शब्दो मे निंदा करते है व इस व्यवहार का विरोध करते है। किसान मोर्चा ने आह्वान किया है कि जनता भाजपा के खिलाफ वोट करें।

मिट्टी सत्याग्रह यात्रेस प्रारंभ..16 राज्यांतील माती शेतकरी आंदोलक  स्मारकाच्या पायाभरणीत वापरणार... - National Alliances of People Movements  Start the soil satyagraha ...

मिट्टी सत्याग्रह यात्रा

मिट्टी सत्याग्रह यात्रा के तहत यात्रियों को दांडी में किसानों द्वारा 100 गांव की मिट्टी तथा बारदोली में 50 गाँव से लाई गई मिट्टी सौंपी गई। उमराची में यात्रा का स्वागत किया गया। यात्रियों ने  बताया कि मोदी सरकार किसानों की मिट्टी (जमीन) छीनकर पूँजीवादियों को सौंपना चाहती है।  इसके खिलाफ यह यात्रा निकाली जा रही है। किसान आंदोलन के दौरान देश की मिट्टी को बचाने के लिए 320 से ज्यादा किसान शहीद हुए हैं। शहीद स्मारक बनाकर उन्हें याद करने के लिए यह यात्रा गांधी जी की प्रेरणा से निकाली जा रही है।

यात्रा को उमराची में गुजरात पुलिस ने रोक दिया। देश का  किसान लोकतंत्र बचाने की लड़ाई को लड़ रहा है।

मिट्टी सत्याग्रह की दूसरी यात्रा नर्मदा बचाओ आंदोलन और जन आंदोलन के राष्ट्रीय समन्वय की नेत्री मेधा पाटकर के नेतृत्व में मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में राजघाट से शुरू की गई। मिट्टी सत्याग्रह यात्रा में शामिल  नर्मदा घाटी के किसान, मजदूर, मछुआरों के प्रतिनिधि गांधी समाधि, राजघाट (कुकरा) बड़वानी से रतलाम, मंदसौर होकर राजस्थान के डूंगरपुर जाएंगे, जहां पर दोनों यात्राएं मिलेगी तथा दिल्ली बॉर्डर (शाहजहांपुर, टिकरी, गाजीपुर, सिंघू) की ओर बढ़ेंगी।

कन्याकुमारी में किसान महापंचायत

तमिलनाडु के कन्याकुमारी के नजदीक मनाकुडी में किसानों व मछुआरों की एक बड़ी महापंचायत आयोजित की गई। इस रैली में हज़ारों की संख्या में किसान, मजदूर व मछुआरे शामिल हुए। कई क्षेत्रीय मुद्दों समेत राष्ट्रीय मुद्दों पर हुई इस पंचायत में लोगों ने कहा कि वे चुनावो ने भाजपा व उसके सहयोगियों को सबक सिखायेंगे। इस कार्यक्रम में 300 से ज्यादा नावों ने समुद्र में काले झंडे दिखाकर सरकार के खिलाफ अपना विरोध जताया।

गाजीपुर बार्डर पर परिपत्र जारी

आज गाजीपुर बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा गाजीपुर बॉर्डर की ओर से प्रेस वार्ता करके एक परिपत्र जारी किया गया जिसमें बताया गया है कि:

  •  इन कानूनों में काला क्या है
  • किसान एमएसपी की मांग क्यों कर रहे हैं,
  • गन्ना किसानों पर व समय पर भुगतान पर क्या खराब असर पड़ेगा,
  • इन कानूनों का बंटाईदारों व पशुपालकों पर क्या असर है
  • बिजली बिल से क्या परेशानी होने  जा रही है
  • सरकार द्वारा कानूनों को स्थगित करने पर किसानों का क्या विरोध है।

भूली-बिसरी ख़बरे

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