क्यों हुई बदरंग होली माइक्रोमैक्स और वोल्टास के मज़दूरों की?

मज़दूरों के सामने भुखमरी की स्थिति, प्रशासन मस्त

एक तरफ त्यौहारों के रंग कमर तोड़ती महँगाई ने फीकी कर दी है। दूसरी तरफ लगातार छँटनी-बंदी झेलते संघर्षरत मज़दूरों के सामने पैदा अर्थीतंगी त्यौहार की खुशियाँ लील गईं। चाहें पंतनगर में माइक्रोमैक्स हो, वोल्टास हो या रूचीज़ बेवरेजेस नीमराना या सत्यम ऑटो हरिद्वार के मज़दूर, होली बदरंग ही रही।

गैर कानूनी रूप से मज़दूर कहीं छँटनी की मार झेल रहे हैं, तो कहीं अवैध गेटबन्दी, ले ऑफ, सेवा समाप्ति या बर्खास्तगी झेल रहे हैं। हालात बेहद कठिन हैं। पॉकेट में घर चलाने तक के लिए पैसे नहीं है तो भला वे त्यौहार किस प्रकार मनाएंगे?

भगवती-माइक्रोमैक्स मज़दूरों की तीसरी बदरंग होली

भगवती प्रोडक्ट (माइक्रोमैक्स), पन्तगर (उत्तराखंड) के 303 मजदूर 27 दिसंबर 2018 से अवैध छँटनी झेल रहे हैं, तो 47 मज़दूर गैर कानूनी लेऑफ के शिकार हैं। औद्योगिक न्यायाधिकरण से 1 साल पूर्व ही छँटनी अवैध घोषित हो चुकी है। उच्च न्यायालय नैनीताल द्वारा भी अवार्ड के परिपालन का निर्देश दिया जा चुका है।

इसके बावजूद 351 मज़दूर श्रम विभाग और प्रशासन के उलझाव के शिकार बने हुए हैं और अभी तक कार्यबहाली नहीं हुई। मज़दूरों का धरना कंपनी के गेट पर पिछले 27 महीने से लगातार जारी है।

लम्बी बेरोजगारी का दंश झेलते मज़दूरों के सामने भुखमरी की स्थिति मौजूद है और संघर्ष के जज्बे के बावजूद हालात बेहद कठिन हो गए हैं।

डेढ़ साल से बेरोजगारी झेलते वोल्टास के मज़दूर

वोल्टास लिमिटेड पंतनगर में नए वेतन समझौते के लिए मांग पत्र देने के बाद से पिछले 3 साल से लगातार जारी दमन के बीच डेढ़ साल से यूनियन के अध्यक्ष महामंत्री सहित 9 मज़दूर बाहर हैं। प्रबंधन द्वारा काम ना होने का बहाना लगाकर इन मजदूरों की सेवा समाप्ति की गई है, जबकि धड़ल्ले से उत्पादन जारी है।

उल्लेखनीय है कि एयर कंडीशनर का उत्पादन करने वाली टाटा ग्रुप की इस प्रतिष्ठित कंपनी 500 से ज्यादा श्रम शक्ति के लिए पंजीकृत है लेकिन यहां महज 38 स्थाई श्रमिक है और बाकी सारा काम ग़ैरकानूनी रूप से ठेके व नीम ट्रेनी मज़दूरों से होता है।

श्रम विभाग इसपर मौन है। यही नहीं, स्थाई मज़दूरों की पूर्ववर्ती सुविधाओं में लगातार जारी कटौतियों और जारी अवैध गतिविधियों पर भी वे मामले को विलंबित करने और उलझने में ही संलग्न हैं।

कठिन हालात में मज़दूरों का संघर्ष जारी है। कंपनी के बाहर धरना तो भीतर भूखे रहकर काम करने का मज़दूरों का आंदोलन चल रहा है। 2 अप्रैल से मज़दूर हड़ताल पर जाने की तैयारी में हैं।

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