किसान आंदोलन : 28 मार्च को होगा काले क़ानूनों का होलिका दहन

आंदोलन के दौरान 310 किसान हो चुके हैं शहीद

किसान आंदोलन के तहत 28 मार्च को काले क़ानूनों की प्रतियाँ दहन होंगी। इस बीच संयुक्त किसान मोर्चा ने पंजाब में भिन्न परिस्थितियों में भाजपा नेता से दुर्व्यवहार की निंदा की है। मोर्चा ने कहा है कि इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताक़त रही है कि सत्ता के दमन व भड़काने के बावजूद यह शांतिपूर्ण रहा है।

संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से डॉ दर्शन पाल द्वारा 27 मार्च को जारी बयान में कहा गया है कि दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के धरनों को कल 4 महीने हो गए। किसानों ने हर मौसम में अपने आप को मजबूत रखा है व तीन कृषि कानूनो के खिलाफ व MSP के लिए अपनी लड़ाई को शांतमयी रहते हुए तेज किया है।

इस दौरान 310 के करीब किसान शहीद हुए है। सैंकड़ो किसान सड़क दुर्घटना व अन्य कारणों से बीमार भी हुए है। ऐसे वातावरण में सरकार का किसानों के प्रति अमानवीय व्यवहार रहा है जहां उसने अपने किसानों को दरकिनार करके रखा है।

सिर्फ 4 महीने नहीं, पंजाब व कई अन्य हिस्सों में यह आंदोलन तब ही शुरू हो गया था जब ये तीन कृषि कानून ऑर्डिनेंस के रूप मे लाये गए थे। पंजाब के किसानों ने अगुवाई करते हुए इस आंदोलन में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है।

सब्र व संतोष के साथ किसानों ने हर पड़ाव पर दिखाई ताक़त

मोर्चा ने कहा कि इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत रही है कि ये आन्दोलन शांतमयी रहा है व किसानों ने सब्र संतोष के साथ आन्दोलन के हर पड़ाव में ज़ोर से अपनी ताकत दिखाई है। किसान नेताओ ने भी हर जगह इसी बात पर ज़ोर दिया है कि हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा।

भाजपा व उसके सहयोगी दलों के नेता इस आंदोलन व किसानों के खिलाफ बयानबाजी से किसानों को उकसाते रहे है। इन नेताओं द्वारा शहीद किसानों तक का अपमान किया गया। इन सब के कारण व कृषि कानूनो के विरोध के संदर्भ में किसानों ने भाजपा व इसके सहयोगी दलों के नेताओ का सामाजिक बहिष्कार किया हुआ है।

भाजपा विधायक से दुर्व्यवहार की निंदा

मोर्चा ने आज (शुक्रवार) पंजाब के अबोहर के भाजपा विधायक का आसपास के किसानों ने विरोध करना प्रारंभ किया। विपरीत परिस्थितियों में किसानों का यह आंदोलन हिंसक हुआ व विधायक के साथ शारीरिक रूप से दुर्व्यवहार हुआ।

यह अफसोस की बात है कि एक चुने हुए प्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार किया गया। हम इस घटना की कड़ी निंदा करते है व इस तरह के व्यवहार को प्रोत्साहित नहीं करते।

हम इस घटना की की जिम्मेदार भाजपा व उसके सहयोगी दलों को मानते है। भाजपा की केंद्रीय लीडरशिप अपने अहंकार में चूर है व किसानों की समस्याओं का हल करने की बजाय चुनावी राज्यों में व्यस्त है। सरकार के इस व्यवहार का खामियाजा क्षेत्रीय नेताओ को भुगतना पड़ रहा है।

इसी तरह कल भारत बंद के दौरान कुछ जगह पर प्रदर्शनकारियों की तरफ से मीडियाकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की खबरें आई है। पत्रकारों के साथ इस तरह के बर्ताव की हम निंदा करते है। सयुंक्त किसान मोर्चा सभी डटे हुए किसानों से अपील करता है कि वे पत्रकारों का सहयोग करें व अनुशासित रहे।

मोर्चा ने कहा कि हम सभी किसानों से अपील करना चाहते है कि अब तक शांतमयी चल रहे आन्दोलन को इसी तरह शांतिपूर्ण बनाये रखे। किसान आंदोलन अब दिल्ली की सीमाओं से देश के कोने कोने में फैल रहा है। किसानों का यह ऐतिहासिक आंदोलन ज़रूर सफल होगा।

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