गुजरात : दो साल में 1128 मजदूरों की मौत, सरकार ने स्वीकारा

देश : पिछले 5 सालों में कार्यस्थलों पर कम से 6500 श्रमिकों की मौत

विधानसभा में पूछे गये एक सवाल का जवाब देते हुए गुजरात के श्रम मंत्री दिलीप ठाकोर ने बताया कि  में पिछले दो साल में हुए हादसों की वजह से कृषि और निर्माण क्षेत्रों से जुड़े कुल 1,128 मजदूरों की मौत हो चुकी है।प्रश्नकाल के दौरान राज्य के श्रम एवं रोजगार मंत्री दिलीप ठाकोर ने कहा कि राज्य में 35.30 लाख पंजीकृत मजदूर हैं, जिनमें कृषि क्षेत्र में 28.65 लाख और निर्माण क्षेत्र में 6.65 लाख मज़दूर काम कर रहे हैं।

दिलीप ठाकोर ने विधानसभा में बताय कि “पिछले दो वर्षों में दुर्घटनाओं में मारे गए 1,128 मजदूरों में से 842 कृषि क्षेत्र से थे और 286 निर्माण क्षेत्र के थे।”उन्होंने आगे कहा कि’ पिछले दो साल में भावनगर में 98 कृषि श्रमिकों की मौत हो गई और अहमदाबाद जिले में 37 निर्माण श्रमिकों की मौत हो गई।’

राज्य सरकार के आंकड़ों से पता चला है कि आणंद जिले में 2.18 लाख से अधिक पंजीकृत कृषि श्रमिक थे, जबकि अहमदाबाद में 1 लाख पंजीकृत निर्माण श्रमिक थे।हाल ही में केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने संसद को सूचित करते हुए बताया था कि पिछले पांच सालों में कारखानों, बंदरगाहों, खानों और निर्माण स्थलों पर कम से 6500 कर्मचारियों की ड्यूटी पर मौत हो गई है।

साथ ही केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ो से यह भी पता चला कि इस दौरान देश में कार्यस्थलों पर विभिन्न दुर्घटनाओं में मज़दूरों की सबसे ज्यादा मौत गुजरात में ही हुई है।गौरतलब है कि मौजूदा सरकार द्वारा विभिन्न मंचों पर गुजरात को एक मॉडल स्टेट के तौर पर दर्शाया जाता रहा है।

ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या विकास मॉडल की इस परिभाषा में मज़दूरों के जान की सुरक्षा कोई मुद्दा नहीं है।आगामी 1 अप्रैल से देश भर में लागू होने वाले नये लेबर कोड में श्रमिकों के सुरक्षा संबंधी उपायों में फैक्ट्री या कंपनी को भयानक रुप से समझौता करने की छूट मिल गई है।

ऐसे में इस बात की पूरी आशंका है कि भविष्य में इन फैक्ट्रियों या कार्यस्थलों पर मज़दूरों के साथ होने वाले दुर्घटनाओं में जबरदस्त तेजी आये।

वर्कर्स यूनिटी से साभार

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