संसदीय समिति की रिपोर्ट कॉरपोरेट के सामने समर्पण, संयुक्त किसान मोर्चा ने किया विरोध

New Delhi: Yogendra Yadav (2nd L), Rakesh Tikait (2nd R) and other leaders of Sanyukt Kisan Morcha during a press conference regarding the violence in their Jan 26 tractor march, at Singhu border in New Delhi, Wednesday, Jan 27, 2021. (PTI Photo/Shahbaz Khan) (PTI01_27_2021_000190B)

सभी राजनीतिक दलों की कॉरपोरेट पक्षधरता उजागर

मोदी सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ और एमएसपी की गारंटी का कानून बनाने की मांग को लेकर दिल्ली के बॉर्डर्स पर चल रहा आंदोलन आज 115 वें दिन भी जारी है। इस बीच ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ ने खाद्य, उपभोक्ता मामले व जन वितरण की स्टैंडिंग कमेटी की उस रिपोर्ट का विरोध किया है जिसमें उसने केंद्र सरकार से आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम 2020 को लागू करने को कहा है। ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ ने कहा है कि हम संसदीय समिति के इस कदम की संख्त निंदा व विरोध करते हैं।

‘संयुक्त किसान मोर्चा’ ने कहा कि ‘सरकार के साथ बातचीत में व अन्य प्लेटफॉर्म पर यह बार बार समझाया जा चुका है कि ये तीनों कानून ही गलत हैं और किसानों और आम नागरिकों का शोषण करने वाले हैं। यह कानून पूरी तरह से गरीब विरोधी है क्योंकि यह भोजन, जो मानव के अस्तित्व के लिए सबसे आवश्यक है, उसे आवश्यक वस्तु की सूची से हटाता है। यह असीमित निजी जमाखोरी और कालाबाजारी की अनुमति देता है। यह पीडीएस सुविधाओं और इस तरह की अन्य संरचनाओं का खात्मा करेगा। यह खाद्यान्नों की सरकारी खरीद को नुकसान करेगा। यह खाद्य आवश्यकताओं के लिए 75 करोड़ लाभार्थियों को खुले बाजार में धकेलेगा। इससे खाद्य बाजारों में कॉर्पोरेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा।

‘संयुक्त किसान मोर्चा’ ने कहा कि ‘यह पूरी तरह से अपमानजनक है कि कई राजनैतिक दल जो 3 कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए किसानों के आंदोलन को समर्थन देने का दावा कर रहे हैं, उन्होंने ECAA के कार्यान्वयन के लिए मतदान किया है। यह इन कानूनों पर इन दलों के बीच व्यापक सहमति को दर्शाता है। हम कमेटी से अपील करते है कि ये सिफारिशें वापस ले व सरकार तीनों कानूनो को सिरे से रद्द करे।

वहीं किसानों के भारी विरोध के बाद गेंहू की खरीद से सम्बधी नए नियमों को सरकार ने वापस ले लिया है। अब गेहूं की खरीद पर वहीं पुरानी प्रणाली (जो 2020-21 में थी) चलती रहेगी। ‘सयुंक्त किसान मोर्चा’ इसे किसानो की जीत मानते हुए सभी आन्दोलनकारियों को बधाई दी है।

‘संयुक्त किसान मोर्चा’ ने कहा कि 26 मार्च के भारत बंद को सफल बनाने के लिए कई संगठनों का समर्थन मिल रहा है। राष्ट्रीय स्तर के संगठनों के बाद अब राज्य स्तर पर संगठनों से मिलकर तैयारियां की जाएंगी। यह भारत बंद पूरी तरह से बंद होगा और दिल्ली के अंदर भी इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर सब कार्यक्रम बन्द रहेंगे। ‘सयुंक्त किसान मोर्चा’ ने देश की जनता से अपील की है कि भारत बंद का समर्थन करते हुए अपने अन्नदाता का सम्मान करें।

‘संयुक्त किसान मोर्चा’ ने कहा कि भाजपा के वैचारिक अभिभावक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि कृषि कानूनों से संबंधित आन्दोलन में मोदी सरकार व किसानों के बीच “राष्ट्रविरोधी और असामाजिक ताकतों” ने गतिरोध पैदा किया हुआ है। हम आरएसएस के इस व्यवहार की कड़ी निंदा करते हैं। किसान आंदोलन पहले से ही शांतिपूर्ण रहा है व सरकार के साथ हर बातचीत में भाग लिया है। किसानों के प्रति इस तरह की सोच रखना किसानों का अपमान है। सरकार के घमंडी व्यवहार व भाजपा के विपक्षी होने के कारण किसानों का दिनों दिन अपमान हो रहा है। सरकार तीनो कृषि कानूनो को तुरंत रद्द करें व एमएसपी पर कानून बनाये।

अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के नेतृत्व में तेलंगाना राज्य के निर्मल जिले में खानपुर क्षेत्र में किसानों व आदिवासियों की रैली व जनसभा आयोजिक की गई। इसमें तीन खेती के कानूनों को रद्द कराने, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार एमएसपी का कानूनी अधिकार देने, आदिवासियों व किसानों को खेती की पोडू जमीन से विस्थापित ना करने तथा खेती करने के पट्टे वन अधिकार कानून 2006 के अनुसार देने की मांग उठाई गई।

बिहार में सासाराम जिले के नौहट्टा ब्लॉक में मुजारा लहर आंदोलन की वर्षगांठ के अवसर पर 19 मार्च को अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के नेतृत्व में किसानों ने प्रदर्शन किया। इसमें मांग की गई कि खेती के तीन काले कानून वापस हो, एमएसपी का कानून बने और बटाईदार किसानों को सभी अधिकार दिए जाएं।

तीनों कृषि काूननों को रद्द करने, बिहार विधानसभा से उसके खिलाफ प्रस्ताव पारित करने, एमएसपी को कानूनी दर्जा देने, एपीएमसी ऐक्ट की पुनर्बहाली और भूमिहीन व बटाईदार किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना का लाभ प्रदान करने सहित अन्य मांगों पर पटना के गेट पब्लिक लाइब्रेरी में अखिल भारतीय किसान महासभा व खेग्रामस के संयुक्त बैनर से आयोजित किसान-मजदूरों की महापंचायत में हजारों किसान-मजदूरों ने भागीदारी निभाई।

आज रायबरेली में किसान महापंचायत आयोजित की गई जिसमें किसान नेताओं ने आत्महत्या कर चुके किसानों का मुद्दा उठाया व इन परिवारों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की मांग की। 22 मार्च को एक विशाल महापंचायत उत्तर प्रदेश के वाराणसी में आयोजित की जाएगी, जिसमें हज़ारो की संख्या में किसानों के पहुंचने की तैयारियां है।

उतराखण्ड से चली किसान मजदूर जागृति यात्रा गुरुद्वारा बनका फार्म से चलकर हरगांव, मोहाली होते हुए मैगलगंज पहुंची। जिसमें रास्ते भर में जगह जगह अपार समूह ने जागृति मार्च का अभिवादन व स्वागत किया। रास्ते भर गांव देहातों कस्बों में मंच से मजदूरों, मझले व्यापारियों तथा किसानों को तीन काले कानूनों से अवगत करवाया गया।

मिट्टी सत्याग्रह यात्रा विकेन्द्रित रूप में 12 मार्च से 28 मार्च तक देश के कई राज्यों में जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, आसाम और पंजाब में जन संवाद अभियान चला रही है। मिट्टी सत्याग्रह यात्रा 30 मार्च को दांडी से शुरू होकर गुजरात के अन्य जिलों से होकर, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के कई जिलों से होकर 5 अप्रैल की सुबह 9 बजे शाहजहाँपुर बॉर्डर पहुँचेंगी। यात्रा के आखिरी दौर में पूरे देश की विकेन्द्रित यात्राएँ किसान बॉर्डर पर अपने राज्य के मिट्टी कलश के साथ यात्रा में शामिल होंगे।

शाहजहाँपुर बॉर्डर से ये किसान टिकरी बॉर्डर जाएँगे। अप्रैल 6 की सुबह 9 बजे सिंघु बॉर्डर और शाम 4 बजे गाजीपुर बॉर्डर पहुँचेंगे। बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा के सभी वरिष्ठ किसान साथी इस मिट्टी सत्याग्रह यात्रा का हिस्सा रहेंगे। पूरे भारत से आई मिट्टी किसान आंदोलन के शहीदों को समर्पित की जाएगी। बॉर्डर पर शहीद स्मारक बनाए जाएंगे। स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों की पुनर्स्थापित करने के  विचार को आगे बढ़ाने के लिए किसान संकल्पित हैं।

संयुक्त होरता (कर्नाटक भर में कई किसान संगठनों का एक समन्वय), कर्नाटक राज्यसभा संघ (केआरआरएस) और हसीरू सेने के सयुंक्त आयोजन में शिवमोग्गा जिले में आज एक महापंचायत हुई। इस महापंचायत में न सिर्फ किसान, बल्कि वे सब भी जो किसानो को समर्थन कर रहे है, भाग लेंगे। इसके द्वारा कर्नाटक भर में महापंचायतें आयोजित की जाएंगी।  एसकेएम के वरिष्ठ नेताओं के साथ कर्नाटक के किसान 22 मार्च को बैंगलोर में विधानसभा मार्च करेंगे।

मीडिया विजिल से साभार

भूली-बिसरी ख़बरे

%d bloggers like this: