मेहनतकश किसानों के मुद्दे मुखर, काले कृषि कानून वापसी की माँग

किसानों के मुद्दों पर ‘मेहनतकश किसान मोर्चा’ का सम्मेलन

नेठराना (राजस्थान)। देश भर में चल रहे किसान आंदोलन का समर्थन लागातार बढ़ता ही जा रहा है। इसी बीच नेथराना में मेहनतकश किसान मोर्चा, राजस्थान का सम्मेलन सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में मेहनतकश किसानों की बुनियादी समस्याओं पर चर्चा के साथ जनविरोधी कृषि कानूनी को रद्द करने की माँग बुलंद हुई।

नेथराना (भादरा, हनुमानगढ़) में 14 मार्च को हुए सम्मेलन में मेहनतकश किसान-मज़दूर विरोधी 3 कृषि कानूनों को रद्द करने व एमएसपी (MSP ) – न्यूनतम  समर्थन मूल्य – पर फसलों की सरकारी खरीद की गारंटी का कानूनी अधिकार और जनविरोधी बिजली बिल 2020 की वापसी व अमरसिंह ब्रांच में पूरे पानी की मांग को लेकर गांव नेठराना में सैंकड़ों ग्रामीण एकजुट हुए।

ग्रामीणों ने मेहनतकश किसान मोर्चा के बेनर तले किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए गांव में खेती से जुड़ी समस्याओं, किसानों के कर्ज में डूबने व आत्महत्या के बढ़ते ग्राफ के साथ अमरसिंह ब्रांच में पूरा पानी दिए जाने व बिजली बिलों की मनमानी लूट सहित कई मुद्दों पर आने वाले समय में मिलकर संघर्ष करने का संकल्प लिया तथा निजीकरण के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया।

सभा में किसान आंदोलन से जुड़े हरियाणा से आएं साथियों ने किसान आंदोलन को केवल किसान तक सीमित न रखते हुए,  मेहनतकश,  सीमांत व गरीब और मझोले किसान, मज़दूर और आम मेहनतकश जनता पर कानूनों से होने वाले भयावह प्रभाव को समझाया।

साथ ही मेहनतकश किसान मोर्चा ने संयुक्त किसान मोर्चा का समर्थन करते हुए, आगामी कार्यक्रम और प्रदर्शन पर भी चर्चा की।

सम्मेलन में उपस्थित ग्रामीणों ने 14 मार्च के मौके पर मज़दूर वर्ग के महान शिक्षक कार्ल मार्क्स की 138 वीं पुण्यतिथि पर,  उन्हें याद करते हुए,  उनके विचारों को लेकर संघर्ष करने का आह्वान किया।

बिजली बिलों में मनमानी लूट के खिलाफ धरना जारी

नेठराना (भादरा) बिजली बिलों में मनमानी लूट के खिलाफ 10 मार्च से बेमियादी धरना जारी है। इस दौरान जन उभार लगातार बढ़ता ही जा रहा है। बिजली विभाग द्वारा जबरन कनेक्शन काटने, ग्रामीणों पर झुठे मुकदमे करने व धमकी देने के षड़यंत्र को ग्रामीण भाप चुके हैं। और अपने हक़ की लड़ाई व जिम्मेदारी को समझते हुए रोज नए लोग धरने में शामिल हो रहे हैं।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि कोरोना के चलते बकाया बिजली बिल माफ किये जायें व नाजायज बिलों को भरवाने के लिए आमजन पर कनेक्शन काटने का दबाव नहीं बनाया जाए, स्थायी शुल्क, विद्युत शुल्क व अन्य राशि के रूप में हो रही वसूली तुरंत बंद की जाए, प्रत्येक परिवार को हर महीने 200 यूनिट तक फ्री बिजली दी जाए, घटिया व तेज चलने वाले मीटर तुरंत हटाये जाएं, बिजली सेवा का निजीकरण तुरंत रोका जाए व बिजली अधिनियम 2020 ख़ारिज किया जाए। बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति के सदस्यों और गांव वालों पर लगाए गए झुठे मुकदमे ख़ारिज करो।

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