बिजली बिलों में मनमानी लूट के खिलाफ जयपुर में जोरदार प्रदर्शन

संघर्ष : राजस्थान एकजुटता यात्राका पड़ाव जयपुर में

जयपुर (राजस्थान)। बिजली बिलों में धांधली, गैरवाज़िब बिजली बिलों आदि मुद्दों के साथ बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति की राजस्थान एकजुटता यात्रा राज्य के विभिन्न हिस्सों से होकर आज 3 मार्च को राजधानी जयपुर पहुँची और विशाल विरोद्ध प्रदर्शन किया। पूरे राजस्थान से सेंकडों लोगों ने हिस्सा लिया और प्रदेश के ऊर्जा मंत्री को विभिन्न माँगों का ज्ञापन दिया।

बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति की राजस्थान एकजुटता यात्रा नोहर (हनुमानगढ़) से 22 फरवरी को नोहार में किसान आंदोलन को समर्थन देने के साथ शुरू होकर राजधानी जयपुर पहुँची और जयपुर के अलग-अलग इलाक़ों में बिजली बिलों में लूट के बाबत जनता से रूबरू होने के बाद, राजस्थान विद्युत विनयामक आयोग के पास बाईस गोदाम पर ‘विशाल विरोध प्रदर्शन’ और जनसभा किया। पूरे राजस्थान से सेकडों लोगों ने हिस्सा लिया।

प्रदेश के अलग-अलग इलाक़ों से आए सेंकडों लोगों ने, बिजली मुद्दों पर संघर्षरत विभिन्न जनसंगठनों, बिजली उपभोक्ता समिति की विभिन्न ज़िलों की इकाइयों के प्रतिनिधियों और जयपुर की विभिन्न बस्तियों और इलाक़ों से आए लोगों ने हिस्सा लिया और बिजली कम्पनियों की तानाशाही और राजस्थान सरकार की जनविरोधी नीतियों का पुरज़ोर विरोध किया।

कार्यक्रम में किसान आंदोलन से जुड़े किसानों और ग्रामवासियों ने भी शिरकत की और निजीकरण और जनविरोधी नवउदारवादी सरकारी नीतियों के खिलाफ साझा विरोध व्यक्त किया।

विरोध प्रदर्शन के बाद हुई जनसभा में विभिन्न जन-प्रतिनिधियों ने बिजली के मुद्दों, बिजली आंदोलन और जनता की माँगों और परेशानियों को रखा। जयपुर से बसंत हरियाणा, अनिल गोस्वामी, आर सी शर्मा, संदीप जी (जनवादी लेखक मंच), विजय बहादुर गोड़ (राजस्थान कच्ची बस्ती महासंघ) और बेधड़क आवाज़ के सम्पादक, शेलेंद्र कवि, अवस्थी सरदार कच्ची बस्ती से गौरी जी, इंद्रा नगर बस्ती से मोहन लाल जी, अजित भारतीय (भीम आर्मी), मुकेश नेठराना (राजस्थान बिजली टेकनिकल कर्मचारी असोसीएशन), बीकानेर से अंशु, हनुमानगढ़ से सुरेंद्र सोढ, प्रताप सिंह जी और अन्य लोगों ने बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति की माँगों पर समर्थन जाताया और सरकार और बिजली कम्पनियों की लूट की पुरज़ोर निंदा की।

जनसभा में राजस्थान के अलग-अलग ज़िलों में बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति की विभिन्न इकाईयों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने ज़िलों में बिजली संघर्ष को तेज करने का ऐलान किया। समिति ने इस बाबत बिजली विनयामक बोर्ड, ऊर्जा मंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपे। साथ ही साथ समिति और आए हुए तमाम नागरिकों ने ऊर्जा विनयामक के अध्यक्ष के नाम बढ़ती बिजली दरों के खिलाफ नागरिक-आपत्ति भी जमा की।

डेढ़ साल से सतत संघर्ष जारी

बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति पिछले डेढ़ साल से राज्य सरकार व बिजली कंपनियों द्वारा आम उपभोक्ताओं के साथ बिजली बिलों के नाम पर की जा रही लूट के खिलाफ संघर्षरत है। संघर्ष समिति ने पूरे हनुमानगढ़ जिले में बिजली आंदोलन को जनता का आंदोलन बनाया है। हनुमानगढ़ ज़िले में पिछले डेढ साल से बहुत बड़ी जनसंख्या ने नाजायज़ बिजली बिलों का बहिष्कार कर रखा है।

समिति ने बताया कि पूरे देश में बिजली उत्पादन में अहम स्थान रखने के बाद भी राज्य सरकार देश में सबसे महंगी बिजली अपने राज्य की आम जनता को बेचती है। लगातार डेढ़ साल से बार-बार ज्ञापन देने विरोध प्रदर्शन एवं आंदोलन करने के बाद भी प्रशासन बहरा बना हुआ है। इसलिए संघर्ष समिति ने यह निर्णय लिया है कि हम अपनी मांगों को राजस्थान की आम जनता तक पहुंचाएंगे और बिजली आंदोलन को राज्य की जनता का आंदोलन बनाएंगे। राजस्थान एकजुटता यात्रा इस आंदोलन को एक व्यापक राज्य व्यापी आंदोलन बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

निजी कंपनियों को लाभ पहुँचने का खेल

बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति हनुमानगढ़ का कहना है, “इन तमाम समस्याओं के पीछे बिजली क्षेत्र के निजीकरण तथा इसे ‘जन-सेवा’ के साधन से, लाभ के साधन में बदलने की एक बड़ी और व्यापक योजना चल रही है।

सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को लाभदायक बनाने के नाम पर, देसी-विदेशी कम्पनियों को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध करा कर प्रदेश-देश में निवेश बढ़ाने के नाम पर, ये बिजली डिस्कॉम विभिन्न एजेंसियों (बिजली कंपनियों, केंद्र सरकार आदि) के साथ विभिन्न धाराओं और शर्तों के साथ समझौता-ज्ञापन(MoU) पर हस्ताक्षर करते हैं, अत्यधिक दरों पर बिजली खरीदते हैं, और इस बोझ को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ताओं पर डाल देते हैं।

सरकारें और सरकारी उद्यम अपनी सेवाओं को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को बेचने का काम तो कर रहे हैं, लेकिन उन तमाम लोगों को इन उद्यमों के लोकतांत्रिक निर्णय व्यवस्था में शामिल करने के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। ऐसे में लोकतंत्र का कुछ लोगों और कम्पनियों के हाथ में जा कर सिमट जाना तय है। बिजली आंदोलन मुख्य रूप से इसी के खिलाफ जनता की एक आवाज़ है।”

बिजली आंदोलन की मुख्य माँगें–

बिजली बिलों में की गई बढ़ोत्तरी वापस लो, कोरोना काल के बिजली बिल माफ करो, स्थाई शुल्क लेना बंद करो, हर परिवार को 200 यूनिट बिजली मुफ्त दो, खराब व तेज चलने वाले मीटर तुरंत बदलो, बिजली विभाग का निजीकरण बंद करो, बिजली(संशोधन) विधेयक 2020 खारिज करो, आमजन विरोधी तीनों कृषि क़ानून रद्द करो, न्यूनतम समर्थन मूल्य को पक्का क़ानून बनाओ, जन वितरण प्रणाली(PDS) को सार्विक किया जाए।

राजस्थान एकजुटता यात्रा – कुछ झलकियाँ

22 फरवरी को यात्रा नोहर में किसान आंदोलन के धरने को समर्थन देने के साथ शुरू हुई और रामगढ़ (नोहर), गोगमेडी, भादरा, डूंगराना, सिद्धमुख, राजगढ़, चूरु शहर, शेखावटी रामगढ़, फ़तेहपुर, सीकर, झुँझुनू, चोमू और इस पूरे इलाक़े में पड़ने वाले ढानी, गाँव, शहर होते हुए; आज 3 मार्च को राजधानी जयपुर पहुँची और बाईस गोदाम पर विरोध प्रदर्शन किया। रास्ते भर में यात्रा को भारी जनसमर्थन मिला और लोगों ने साथ चल कर हर तहसील और ज़िले में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे।

किसान आंदोलन को हर जगह समर्थन

यात्रा रास्ते में नोहर, डूंगराना, सिद्धमुख, डोकवा, झुनझुनू आदि स्थानों पर किसान आंदोलन के सिलसिले में चल रहे धरनों पर भी किसानों से मिली और आंदोलन को समर्थन दिया। किसानों ने भी बिजली मुद्दे पर अपना समर्थन जताया। बिजली और किसानों के मुद्दे अलग-अलग नहीं हैं। दोनों ही निजी कम्पनियों की मनमानी लूट और सरकार की जनविरोधी नवउदारवादी नीतियों से लड़ रहे हैं।

नाजायज बिजली की लूट से सभी पीड़ित

समिति का कहना है, “पिछले डेढ साल और इस पूरी यात्रा के दौरान हमें एक भी ऐसा इलाक़ा नहीं मिला जहां लोग नाजायज़ बिजली बिलों से परेशान न हों। हर जगह लोगों में इस लूट के खिलाफ आक्रोश है और बहुत सारे इलाक़ों में इसके खिलाफ तरह-तरह के संघर्ष भी सक्रिय हैं। बहुत से लोगों ने मजबूरी में और बहुत से लोगों ने ग़ुस्से में बिल भरना बंद कर रखा है।

डिसकोम, बिजली कंपनियों और प्रशासन की दंडात्मक करवाही भी तेज़ी से चल रही है। यानी एक तो मनमाने बिल थोपे जा रहे हैं, ऊपर से वसूलने के लिए नोटिस, धमकियाँ, कनेक्शन काटे जाना, मीटर उखाड़ लेना, वीसीआर जैसी दादागिरी भी की जा रही है। बिजली के अलावा इलाक़े के लोग पानी की किल्लत, घटिया सड़क, पर्यावरण परिवर्तन के कारण खेती में मुश्किलों, भारी बेरोज़गारी, महंगाई, ऑनलाइन शिक्षा की जटिलताएँ आदि से भी जूझते नजर आए।

ऐसे में जनता ने संघर्ष के रास्ते का स्वागत किया है और आंदोलन से जुड़ने की तरफ़ कदम उठाए हैं। बहुत से लोग आज जयपुर में विरोध प्रदर्शन में भी शामिल हुए।

भूली-बिसरी ख़बरे

%d bloggers like this: