मिनिस्ट्रियल कर्मी 21 सूत्रीय माँगों के साथ करेंगे आंदोलन तेज

उत्तरांचल फेडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन का ऐलान

देहरादून। उत्तरांचल फेडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन भी मांगों को लेकर आंदोलन की राह पर है। 21 सूत्रीय मांगों पर कोई कार्रवाई न होने से आक्रोशित मिनिस्टीरियल कर्मियों ने पांच मार्च से कार्यबहिष्कार कर विरोध का एलान किया है। शनिवार को कचहरी स्थित संघ भवन में आयोजित प्रांतीय बैठक में कर्मचारियों ने विभिन्न मांगों पर चर्चा की। साथ ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आंदोलन की रूपरेखा तैयार की।

बैठक में सर्वसम्मति से एसीपी-एमएसीपी की पूर्व व्यवस्था को बंद करने और वसूली के आदेश के विरोध में प्रदेशव्यापी आंदोलन चलाने का निर्णय लिया गया। फेडरेशन के प्रांतीय प्रवक्ता पंचम सिंह बिष्ट ने कहा कि सरकार की ओर से जारी शासनादेश के कारण आज प्रदेश के सैकड़ों कर्मचारियों के पेंशन प्रकरण लंबित हैं। सेवानिवृत्त कर्मचारियों से सरकार मोटी वसूली करने की तैयारी कर रही है। जो कि अनुचित है।

प्रांतीय अध्यक्ष सुनील दत्त कोठारी और महामंत्री पूर्णानंद नौटियाल ने बताया कि फेडरेशन की ओर से मुख्यमंत्री को मिनिस्टीरियल कार्मिकों के मामले में हस्तक्षेप कर संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करने का अनुरोध किया जा चुका है, लेकिन अभी तक शासन के अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।

उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारी विरोधी शासनादेश तत्काल वापस ले, अन्यथा प्रदेशव्यापी आंदोलन के साथ अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी। बैठक में बद्री प्रसाद सकलानी, जमुना प्रसाद भट्ट, अशोक राज उनियाल, सोहन सिंह रावत, महावीर सिंह तोमर, सुभाष देवलियाल, कुलदीप सिंह, रघुवीर सिंह बिष्ट आदि उपस्थित थे।

बैठक में आगामी चार मार्च से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया गया। पांच मार्च से आठ मार्च तक प्रदेश के समस्त मिनिस्टीरियल कर्मी सुबह 10 बजे कार्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने के बाद दो घंटे का पूर्ण रूप से कार्य बहिष्कार करेंगे। 12 मार्च को सभी जनपद मुख्यालयों पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन कर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा। 13 मार्च को प्रांतीय कार्यसमिति की बैठक बुलाकर अनिश्चितकालीन हड़ताल की रणनीति बनाई जाएगी, जबकि, 20 मार्च से 31 मार्च तक समस्त मिनिस्टीरियल कर्मी बाहों पर काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे।

जागरण से साभार

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