बैंकों के निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन

मार्च में संसद घेराव और दो दिन की देशव्यापी बैंक हड़ताल

बुधवार को बैंक ऑफ इंडिया शाखा में बैंकों के निजीकरण के विरोध में यूफबीयू के तत्वावधान में विरोध प्रदर्शन किया गया। जिसमें जिले के सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारी उपस्थित हुए। सरकार के निजीकरण की नीतियों एवं सरकारी उपक्रमों एवं बैंकों के निजीकरण का विरोध किया। शाखा प्रबंधक हरीश कुमार मेहरा ने बताया कि सन 1969 में बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया।

जिसका उद्देश्य बैंकों को क्लास बैंकिंग से मार्च बैंकिंग में परिवर्तन करना था। बैंकिंग सुविधा का लाभ आम जनता, कृषि, छोटे एवं मझोले उद्योगों को पहुंचाना था। पहले यह केवल कुछ औद्योगिक घरानों तक ही सीमित था। अब वर्तमान सरकारी नीतियां हमें वापस उस और पहुंचा रही हैं। वर्तमान में सरकार निजीकरण का कारण बढ़ता एनपीए बताया गया, जो कि इन्हीं औद्योगिक घरानों को दिया गया था। यदि सरकार सही में सरकारी बैंकों की स्थिति सुधारना चाहती हैं, तो इन औद्योगिक घरानों का नाम सार्वजनिक करें जो बिलकुल डिफॉल्टर हैं।

सरकार द्वारा बैंकों के इस निजीकरण का सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता को होगा, जो गांव में रहती है। आम जनता से तात्पर्य है कि वह लोग जो विधवा, मजदूर, सरकारी स्कूल के बच्चे, वृद्ध और किसान भाई हैं। जिन्हें इन सरकारी बैंकों द्वारा वह सारी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। हम मौजूदा सरकार की सरकारी बैंकों एवं उपक्रमों के प्रति तुष्टीकरण की नीति का विरोध करते हैं एवं पुरजोर विरोध करते हैं। भविष्य में इसके विरोध में यूनाइटेड फोरम बैंक यूनियन के तत्वावधान में हड़ताल एवं धरना प्रदर्शन किए जाएंगे। इस प्रदर्शन में सृष्टि भराड़े, निलेश भाटी, मुकेश विश्वकर्मा, शाहबाजत अहमद, हरीश मेहरा, अरुण एक्का, मणिकांत शर्मा, नमन गुप्ता, राहुल नेमा, पवन चंद्रवंशी, अजय ठाकुर, कंचन ठाकुर, प्रियंका अग्रवाल आदि मौजूद थे।

नईदुनिया से साभार