दो लाख की महासभा ने मज़दूर किसान एकता का नारा बुलंद किया

21 फरवरी, बरनाला: आज बरनाला में भारतीय किसान यूनियन (एकता) उग्रहां और पंजाब खेत मज़दूर यूनियन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित महासभा और रैली सफलता पूर्वक संपन्न हुई। महासभा में पंजाब के विभिन्न जिलों, मोगा, भटिंडा, बरनाला, पटियाला, संगरूर से दो लाख से अधिक किसान और मज़दूर शामिल हुए।

सभा को भारतीय किसान यूनियन (एकता) उग्रहान व पंजाब खेत मज़दूर यूनियन के नेता, पंजाब किसान यूनियन के रूलदू सिंह मान्न, संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य यू पी से चौधरी हरपाल सिंह बुलारी, संयुक्त किसान मोर्चा के नेता बलबीर सिंह राजेवल व अन्य किसान और मज़दूर संगठनों के नेताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम में कई कलाकार ओर सांस्कृतिक गोष्टिया भी शमिल हुईं और क्रांतिकारी गीतों से कार्यक्रम का समा बांधा।

कार्यक्रम का मुख्य ज़ोर खेत मजदूरों और ग़रीब किसानों की एकता मज़बूत करने पर था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पंजाब खेत मज़दूर यूनियन के लछमन सिंह सेवेवाला ने कहां की इस आन्दोलन का मजदूरों पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा, इसलिए किसानों के साथ जुड़ कर मजदूरों को भी संघर्ष में उतरना पड़ेगा। किसानों की ज़मीन तो बाद में जाएंगी, उसके पहले पंचायती ज़मीन का जो एक तिहाई हिस्सा खेत मजदूरों को ठेके पे मिलता है वो दलित भूमिहीन मज़दूरों के हांथ से चला जाएगा। सरकर मजदूरों में यह भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है की किसानों की ज़मीन जाने से मजदूरों में बांटी जाएगी। यह सरासर झूठ है।

संयुक्त किसान मोर्चा के नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने सरकार के साथ चली वार्ता के बारे में बताया कि हर मीटिंग में होम मिनिस्टर ने कहा की इन कानूनों में जितने संशोधन करा लो लेकिन वापस नहीं ले सकते। नहीं तो मज़दूर संगठन भी श्रम कानूनों में परिवर्तन की मांग करने लगेंगे। उन्होनें कहा कि सारी दुनिया की आंखें इस आन्दोलन पर है और आंदोलन को लंबे समय चलाने की तैयारी करनेकी ज़रूरत है।उन्होंने ने विनती की दिल्ली के बॉर्डरो पर लोगों की मौजूदगी में कोई कमी नहीं हो। जो गांव में भी धरने पर बैठे हैं वे दिल्ली गए हुए लोगों के कामों को निपटाने में सहयोग दें और बारी बारी से बॉर्डर पर चल रहे धरने में शमिल हों।

भारतीय किसान यूनियन (एकता) उग्रहां की महिला विंग की नेता हरिंदर बिंदु ने कहा की यह कानून कृषि में मौजूदा संकट को और बढ़ाएंगे। उन्होंने महिला किसानो और खेत मजदूरों की आंदोलन में भागीदारी बढ़ाने की गुहार की और कहा की जब पुरुषों द्वारा खुदखुशी के बाद औरतें पूरा घर अकेले चलाती हैं तो आंदोलन में पूरी भागीदारी क्यों नहीं ले सकती हैं?

जोगिंदर सिंह उग्रहां ने सभा का समापन करते हुए कहा की आन्दोलन की एकजुटता सबसे महत्वपूर्ण है। आंदोलन को तोड़ने के लिए सरकार कई साजिशें कर रही है। ऐसी एक साज़िश 26 जनवरी को की गई। लाल किले की घटना से सरकार हमारे संघर्ष को गलत रूप से पेश करना चाहती थी, और बाकी पड़ोसी राज्यों के साथ पंजाब के किसानों की बनी एकता को तोड़ना चाहती है और हिंसा भड़काके चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन पर दमन करने के बहाने ढूंढ रही है।

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