भोपाल में फिर गैस कांड : बर्फ फ़ैक्ट्री में हुआ गैस रिसाव

अमोनिया गैस का यह रिसाव भी आबादी के बीच हुआ

भोपाल. वर्ष 1984 में दुनिया का सबसे बड़ा गैस हादसा भोपाल में हुआ था. हर औद्योगिक क्षेत्र में ऐसे हादसे आए दिन होते रहते हैं. लेकिन, गैस लीकेज से प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या बेहद कम होने के कारण इन पर ध्यान नहीं दिया जाता है. मई में विशाखापट्टनम के एक कारखाने से गैस लीक होने के कारण 11 लोगों की जान गई थी. मध्य प्रदेश के सिंगरोली में ही गैस हादसे आए दिन होते रहते हैं. भोपाल में मंगलवार को बर्फ की फैक्ट्री में जो हादसा हुआ, उसमें किसी की जान तो नहीं गई, लेकिन गैस लीकेज की घटना से फैक्ट्री के नजदीक रहने वाले लोगों में डर जरूर है. प्रशासन ने फैक्ट्री के नजदीक रहने वाले सात परिवारों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया है.

चार दशक पहले तक औद्योगिक क्षेत्र आबादी से काफी दूर बनाया जाता था. शहरों का विस्तार तेजी से होने के कारण अधिकांश स्थानों पर औद्योगिक क्षेत्र आबादी के बीच आ गए हैं. किसी भी राज्य की सरकार ने पुराने औद्योगिक क्षेत्रों को अन्यत्र शिफ्ट करने की योजना नहीं बनाई है. यह काम बेहद जटिल और मुश्किल भरा है. उद्योगपति भी इसके लिए सहमत नहीं होते हैं. भोपाल में तो सरकार ने उद्योग के लिए आवंटित की गई जमीन का वाणिज्यिक उपयोग करने का प्रस्ताव दिया है. गोविंदपुरा का औद्योगिक क्षेत्र शहर के बीचों-बीचों आ चुका है. कई कारखाने ऐसे हैं, जहां घातक रसायनों का उपयोग किया जाता है. यहां हमेशा ही वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर रहता है.

भोपाल के जिस बर्फ फैक्ट्री में मंगलवार को अमोनिया गैस का रिसाव हुआ, वह भी आबादी के बीच में ही है. एसडीएम हुजूर आकाश श्रीवास्तव ने बताया कि गर्मी के कारण अमोनिया गैस का प्रेशर बढ़ जाता है. जिसे रेगुलर चलने वाली फैक्ट्री पानी में रिलीज कर देती है, लेकिन यह कंपनी डेढ़ साल से बंद थी. बंद होने के कारण पाइप में दबाव बढ़ा और इसके कारण वॉल्व फट गया. जिसके चलते यहां आसपास के लोगों की आंखों में जलन महसूस हुई. आईस फैक्ट्री में से अमोनिया गैस का अचानक रिसाव शुरू हो गया. इससे आसपास के क्षेत्र के रहवासियों की आंखों में जलन महसूस होना शुरू हो गई. जलन और खांंसी जब ज्यादा लोगों तक पहुंची तो तत्काल नगर निगम के कंट्रोल रूम में इसकी सूचना दी गई. फायर बिग्रेड से पानी का छिड़काव किया गया.

भोपाल में हुए गैस हादसे के बाद नगर निगम का अमला इस तरह की स्थितियों से निपटने के लिए सक्षम माना जाता है. गैस के रिसाव से उसके दुष्प्रभाव को कम करने के लिए पानी का छिड़काव काफी मदद करता है. पानी से लोगों की आंख धुलाई गईं. जांच में सामने आया कि बंद पड़ी फैक्ट्री का वॉल्व खुल गया था. बड़ा सवाल यह है कि बंद फैक्ट्री में मौजूद रसायनों का ब्योरा स्थानीय प्रशासन के पास क्यों नहीं था? रिटायर्ड आईएएस अधिकारी डीएस राय कहते हैं कि फैक्ट्री बंद करने की सूचना प्रशासन को दी जाए, इसकी व्यवस्था की जाना चाहिए. बर्फ फैक्ट्री से अमोनिया गैस रिलीज होने से परेवाखेड़ा के 20 घर प्रभावित हुए हैंं. इन घरों के सदस्यों की आंखों में जलन हो रही थी. एहतियातन प्रशासन ने सात मकान खाली कराएं है. इन मकानों के रहवासियों को आंगनबाड़ी या परिजनों के यहां शिफ्ट कर दिया गया है. भेल के एक्सपर्ट के जरिए अमोनिया गैस को पानी में रिलीज कर टैंक खाली कराने की योजना जिला प्रशासन ने बनाई है.

जो कारखाने चालू हालत में हैं प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी यदा-कदा इनकी जांच कर लेते हैं, लेकिन जो कारखाने बिना किसी सूचना के बंद हो गए हैं, इनमें मौजूद रसायनों का ब्योरा कहीं नहीं मिलता है. सरकार के पास इस बात की भी पूर्ण सूचना नहीं होती कि कारखाना बंद हो चुका है. भोपाल और मंडीदीप में कई कारखाने बंद पड़े हुए हैं. यूनियन कार्बाइड का जहां कारखाना हैं, वहां भर कुछ फैक्ट्री हैं. जिला प्रशासन का ध्यान भी इन फैक्ट्रियों की ओर नहीं जाता है. भेापाल कलेक्टर अविनाश लवानिया कहते हैं कि प्रशासन जल्द ऐसे कारखानों को सूचीवद्ध कर सुरक्षा के इंतजाम करेगी. देश के हर शहर में बर्फ बनाने के कारखाने हैं. कई बंद पड़े हैं. इनसे कब गैस लीक हो जाए कोई नहीं जानता.

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