विडियो: किसान आन्दोलन में महिलाओं की बढ़ती भूमिका: हरिंदर बिंदु के साथ टिकरी बॉर्डर पर बात चीत

कुछ दिनों पहले, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को किसान आंदोलन के क्षेत्र से घर लौटना चाहिए। अब फिर से सिंघू, टिकरी, गाजीपुर सीमा के बारे में अफवाहें फैल रही हैं कि ये जगह लड़कियों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। यदि हम चल रहे किसान आंदोलन के बारे में थोड़ी जानकारी लेते हैं, तो हम समझ सकते हैं कि इस आंदोलन में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की भी भागीदारी है। इस आंदोलन के “आधे आकाश” की तस्वीर आंदोलन की एक नेता के साथ बातचीत में सामने आई।

भारतीय किसान यूनियन (एकता) उग्रहाँ ने टिकरी बॉर्डर पुलिस बैरिकेड से लगभग 8 किलोमीटर दूर, मोर्चा मंच से अलग धरना मंच बना कर लाखों किसानों को इकट्ठा किया है। हरिंदर बिन्दू इस संगठन के आयोजकों में से एक हैं। आंदोलन के इस नेतृत्वकारी कार्यकर्ता ने अपने कई कामों के बावजूद हमारे साथ एक घंटे से अधिक समय तक बात की।

उन्होंनें कहा, “जब से यह कृषि कानून पारित किए गए हैं, तब से हम लड़कियों, बच्चों और बुजुर्गों को इस कानून के खतरों से अवगत कराने के लिए घर-घर जा रहे हैं। हर कोई लड़ाई को समझता है और इसमें शामिल होता है।” उगराहां के बैनर तले सितंबर में पंजाब के मुख्यमंत्री के घर के सामने भी गए। इस मोर्चे में ही महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है।

इस पितृसत्तात्मक समाज में इतनी सारी महिलाओं का आंदोलन में भाग लेना कैसे संभव हुआ है? इस सवाल के जवाब में, हरिंदर ने कहा:

“पूरे साल पंजाब में कुछ हलचलें होती रहती है। हम प्रत्येक आंदोलन में लड़कियों की भागीदारी बनाने की कोशिश करते हैं। हम उनके और उनके प्रत्यक्ष हितों के बीच संबंधों को समझने की कोशिश करते हैं। हमारी आधी आबादी, महिलाओं को आगे आना होगा, हम जमीनी स्तर से लेकर नेतृत्व तक, हर जगह महिलाओं की भूमिका सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं।”

यह न केवल महिलाओं की भागीदारी का सवाल है, बल्कि यह भी सवाल है कि कैसे उनके संगठन ने आंदोलन को सभी प्रकार के धार्मिक प्रभावों से मुक्त रखने की कोशिश की है। कोई धार्मिक नारे उनके मंच से नहीं उठते। साथ ही यह मंच कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ संघर्ष को विभिन्न अन्य मुद्दों से जोड़ने की कोशिश भी करता है। पिछले साल चल रहे शाहीन बाग़ के धरने में भी उगराहां के साथी, और उनके समक्ष कई महिलाएं आन्दोलन में शरीक हुए थे। हरिंदर बिंदु, जो एक “कार्यकर्ता” होने पर गर्व करती हैं, न केवल पंजाब में बल्कि पूरे देश में संघर्षरत महिलाओं की एक प्रेरणादायक मिसाल हैं।

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