युवा पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि की तत्काल रिहाई हो! -संयुक्त किसान मोर्चा

18 फरवरी के रेल चक्का जाम की तैयारी तेज

‘संयुक्त किसान मोर्चा’ ने किसान आंदोलन को कमजोर करने के सरकार के प्रयासों में पुलिस की शक्ति के दुरूपयोग के बारे में गहरी चिंता जताई है। मोर्चा ने युवा पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए उनकी बिना शर्त तत्काल रिहाई की माँग की है। साथ ही आगामी कार्यक्रमों की घोषणा की है।

इस बीच मोदी सरकार के जनविरोधी तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के सभी बॉर्डर पर 26 नवंबर से चल रहा किसानों का आंदोलन 84वें दिन भी जारी है। बीते दिन संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से डाक्टर दर्शन पाल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके युवा पर्यावरणविद दिशा रवि की पुलिसिया उत्पीड़न और गिरफ़्तारी की नींद करते हुए उनको तत्काल बिना शर्त रिहा कराने की माँग की है।

‘संयुक्त किसान मोर्चा’ (एसकेएम) ने कहा कि आज के युवा पर्यावरणविद यह भली भांति समझते है कि खेती से जुड़ी वर्तमान नीतियां न सिर्फ किसानों के लिए शोषणकारी है बल्कि ये पर्यावरण के लिये भी नुकसानदायी है। यह अस्वाभाविक है कि बाजार के अनुसार खेती करते हुए किसानों ने फसल विविधता को समाप्त कर लिया है। तेजी से बड़े निगमों द्वारा अनुचित व्यापार की वजह से और जलवायु परिवर्तन से जटिल होने के कारण खेती जोखिम में पड़ी है।

मोर्चा ने कहा कि केंद्र द्वारा लाये गए तीन कृषि कानून, किसानों के लिए न सिर्फ एमएसपी के लिए एक बड़े खतरे हैं बल्कि खुले बाजारों के सहारे खेती को ज्यादा जोखिम भरा बनाते हैं। ऐसी स्थिति में, किसानों द्वारा सततपोषणीय कृषि  प्रथाओं को अपनाने की संभावना कम है। यह व्यवहार्यता और स्थिरता के बीच अंतर-संबंध है जिसे दिशा रवि जैसे कार्यकर्ताओं ने किसानों के समर्थन में विस्तार में समझा है।

दूसरी ओर, सभी फसलों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग, किसानों को धान और गेहूं के मोनोक्रॉपिंग से विविधता लाने में मदद करेगी। मिट्टी के क्षरण, वायु प्रदूषण और  अन्य स्वास्थ्य समस्या के स्थायी समाधान के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी। यह खेती के साथ साथ शहरी नागरिकों के हक़ में भी होगा। इसलिए यह बहुत ही आश्चर्यजनक नहीं है कि पर्यावरण कार्यकर्ता चल रहे किसानों के आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं।

16 फरवरी 2021 को, ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ ने धार्मिक रेखाओं के पार किसान चेतना के लिए काम करने वाले सर छोटू राम के योगदान को याद करने का आह्वान किया है। 1930 के दशक में सूदखोरी के खिलाफ एक कानून लाने वाली यूनियनिस्ट पार्टी ने किसानों को साहूकारों के चंगुल से बचाया और भूमि के अधिकार को वापस दिलाया। सर छोटू राम को भारत में मंडी प्रणाली की स्थापना का श्रेय भी दिया जाता है और वर्तमान किसान आंदोलन इन्ही मंडियों की सुरक्षा व सुधार करना चाहता है।

‘संयुक्त किसान मोर्चा’ 16 फरवरी को देशभर में अनेक कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान करता है, जो सर छोटू राम के योगदान और उनके जैसे अनुकरणीय लोगों से प्रेरणा लेते हुए चल रहे आंदोलन को और मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हैं।

18 फरवरी को, ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ ने पूरे भारत में दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक रेल रोको कार्यक्रम का आह्वान किया है।

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