“ये तो घर बैठे भी मर जाते”: हरियाणा कृषि मंत्री का शहीद हुए किसानों पर शर्मनाक बयान

जनता के दबाव में मांगनी पड़ी माफ़ी

हरियाणा के कृषि मंत्री जय प्रकाश दलाल ने कल भिवानी में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में किसान आन्दोलन पर शर्मनाक टिपण्णी करते हुए कहा कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान मरने वाले 200 किसान कहीं भी मर सकते थे। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान जो किसान मारे गए, “अगर वे घर पर रहते तो भी मर जाते”। उन्होंने भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता, राकेश टिकैत को एक स्व-इच्छुक “अवरोधक” नेता के रूप में वर्णित किया। हस्ते हस्ते बयान देने वाले जयप्रकाश की टिपण्णी हरियाणा में भाजपा सरकार की किसान आन्दोलन के प्रति नज़रिए का शर्मनाक उदाहरण है।

योगी सरकार के तहत विरोध प्रदर्शन पर प्रतिबंध की करी सराहना

उत्तर प्रदेश के किसानों की बढ़ती भागीदारी के सन्दर्भ में दलाल ने योगी सरकार की सरहाना करते हुए बोले कि यूपी में ऐसे कानून बन चुके हैं जिससे प्रदर्शन करना नामुमकिन हो गया है। सरकार के असंवेदनशील और बेपरवाह रवैये को दर्शाते हुए उन्होंने दो महीनों से चल रहे धरनों का मज्ज़ाक बनाते हुए उन्होंने कहा की किसान अगर अगले साल के अक्टूबर तक भी सड़कों पर बैठें तो हमें आपत्ति नहीं है। चल रहे उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक और किसान-नेता यशपाल मलिक को भी जिम्मेदार ठहराया, जिन्होंने उंगली उठाकर हरियाणा में परेशानी पैदा की।

बयान सुनते ही हरियाणा के विभिन्न जिलों में किसानों ने दलाल की निंदा व घेराबंदी शुरू कर दी। दबाव में आ कर वह प्रेस कॉन्फ्रेंस में माफी मांगने गया था लेकिन उसे घेर लिया गया। आज शाम, मंत्री के माफीनामे का एक वीडियो अज्ञात स्थान पर अपने स्वयं के फेसबुक पेज पर प्रकाशित किया गया था।

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