बिजली की मनमानी लूट के खिलाफ 22 फरवरी से राजस्थान में एकजुटता यात्रा

बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

पीलीबंगा (राजस्थान) । किसान आंदोलन के सम्बंध में पीलीबंगा में हुई महापंचायत के दौरान बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति हनुमानगढ़ ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर बिजली बिलों में धांधली आदि रोकने की माँग की। माँगें नहीं माने जाने पर आने वाली 22 फरवरी से राजस्थान में किसान-मजदूर एकजुटता यात्रा शुरू करने की घोषणा की।

12 फरवरी को किसान आंदोलन के सम्बंध में पीलीबंगा में हुई महापंचायत हुई। इस दौरान बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति हनुमानगढ़ के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को जोधपुर डिस्कॉम प्रबन्धक के जरिए ज्ञापन सौंप कर बिजली बिलों में हुई भारी बढ़ोतरी, स्थाई शुल्क व अन्य शुल्कों  को हटाने व प्रत्येक परिवार को हर माह 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की मांग की।

इस बीच पीलीबंगा में जोधपुर डिस्कॉम प्रबन्धक से बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति के सदस्यों ने मुलाकात की।

संघर्ष समिति की ओर से कहा गया कि जहां एक तरफ राज्य पूरे देश में बिजली पैदा करने में अव्वल है वहीं सरकार प्रदेश की जनता को सबसे महंगी बिजली मुहैया करा रही है।

संघर्ष समिति के भादरा इकाई के सदस्य सुरेंद्र सोढ नेठराना  ने बताया कि हम देशव्यापी किसान आंदोलन को समर्थन करते हैं परन्तु राज्य की कांग्रेस सरकार किसानों-मजदूरों से दोहरा मापदंड अपना रही है। एक तरफ तो कांग्रेस किसानों की हिमायत कर रही है वही राजस्थान में जहां उसका  खुद का शासन है वहां आम जन को बिजली कम्पनियों के जरिए लूट रही है।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि कोरोना के चलते बकाया बिजली बिल माफ किये जायें व नाजायज बिलों को भरवाने के लिए आमजन पर कनेक्शन काटने का दबाव नहीं बनाया जाए, स्थायी शुल्क, विद्युत शुल्क व अन्य राशि के रूप में हो रही वसूली तुरंत बंद की जाए, प्रत्येक परिवार को हर महीने 200 यूनिट तक फ्री बिजली दी जाए, घटिया व तेज चलने वाले मीटर तुरंत हटाये जाएं, बिजली सेवा का निजीकरण तुरंत रोका जाए व बिजली अधिनियम 2020 खारिज किया जावे।

संघर्ष समिति ने मांगें नहीं माने जाने पर आने वाली 22 फरवरी से राजस्थान में किसान-मजदूर एकजुटता यात्रा शुरू करने की घोषणा की है।

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