चमोली आपदा पीड़ितों को श्रद्धांजलि, 25 लाख मुआवजा व विनाशकारी परियोजनाएं बन्द करने की माँग

श्रमिक संयुक्त मोर्चा ने राहत कार्य मे मज़दूरों के योगदान का आह्वान किया

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। श्रमिक संयुक्त मोर्चा उधम सिंह नगर के तत्वाधान में आज (11 फरवरी को) स्थानीय अंबेडकर पार्क में, चमोली में आई आपदा से मारे गए व लापता मज़दूरों के लिए संवेदना व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि सभा हुई और मुआवजे, पुनर्वास आदि की माँग के साथ विनाशकारी परियोजनाओं को बंद करने की माँग हुई।

श्रद्धांजलि सभा में मोर्चा अध्यक्ष दिनेश तिवारी ने कहा कि उत्तराखंड में पूँजीपतियों द्वारा मुनाफे की होड़ में नदियों को रोककर पहाड़ को खोदकर पूरे पहाड़ों को कमजोर किया जा रहा है। पहाड़ों के प्राकृतिक संसाधनों के लूट की खुली छूट दी जा रही है। जो लगातार आपदाओं को जन्म दे रही है।

अभी तक जो ख़बर मिली है उसमें 32 मज़दूरों के शव मिलने की पुष्टि हुई, दर्जनों नर कंकाल मिले हैं और सैकड़ों लापता है। लेकिन वास्तविकता इससे ज्यादा है। ऐसे में सही तस्वीर लाई जाए और सभी पीड़ितों की जानकारी जुटाकर राहत कार्य तेज किया जाए।

मज़दूर सहयोग केंद्र के मुकुल ने कहा कि वर्तमान आपदा प्राकृतिक कम, मानवीय ज्यादा है। पहाड़ों पर नदियों को रोककर पूरी नदी ही सुरंग में डालकर बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। बिजली उत्पादन प्रकृति से छेड़छाड़ कर उत्पादन कार्य कर व्यक्तिगत मुनाफे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। मुनाफे के लिए प्रकृति व पर्यावरण को तबाह किया जा रहा है।

इंकलाबी मज़दूर केंद्र के दिनेश चंद्र ने कहा कि आपदा में मारे गए लोगों को सरकार उचित मुआवजा दें साथ ही दुर्घटनाएं ना हो ऐसे पुख्ता इंतजाम किया जाए। हिमालई क्षेत्रों के प्राकृतिक आपदा हेतु आपदा प्रबंधन विभाग को चुस्त-दुरुस्त किया जाए।

श्रद्धांजलि में माँग की गई कि-

  1. मृतक आश्रितों को 25 लाख रुपए प्रति परिवार दिया जाए;
  2. मृतक आश्रित को स्थाई नौकरी दिया जाए;
  3. आपदा प्रभावित परिवारों की समुचित पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।
  4. हिमालय क्षेत्र में पर्यावरणीय क्षति पहुंचाने वाली और विनाशकारी परियोजनाओं पर तत्काल रोक लगाई जाए।

सभा में माइक्रोमैक्स से ठाकुर सिंह, रॉकेट रिद्धि सिद्धि से धीरज जोशी, एलजीबी से बालम सिंह, करौलिया लाइटिंग से सुनील यादव, भगवती इंप्लाइज यूनियन से मुकेश जोशी, मित्तल फास्टनर्स से मसुरुद्दीन खान, अशोका लीलैंड के संघर्षरत छात्र श्रमिक आदि तमाम मज़दूर शामिल थे।

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