अशोक लेलैंड श्रमिकों का कंपनी गेट पर जबर्दस्त प्रदर्शन

डिप्लोमा और ट्रेनिंग में खटाने के बाद 800 श्रमिक हुए बाहर

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। ऑटो क्षेत्र की दिग्गज कंपनी अशोक लेलैंड ने अपने 800 श्रमिकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इससे नाराज श्रमिकों ने आज (9 फरवरी) कंपनी गेट पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया और एक सप्ताह के भीतर समस्याओं का समाधान ना होने पर उग्र आन्दोलन की चेतावनी भी दी। कम्पनी द्वारा डिप्लोमा और ट्रेनिंग के बहाने काम करवाने के बाद निकालने के खेल का ही यह परिणाम है।

दरअसल सिडकुल पंतनगर उत्तराखंड स्थित अशोक लेलैंड में कंपनी मे डिप्लोमा और ट्रेनिंग के नाम पर फोकट के मज़दूरी का एक धंधा चलता है। एनटीटीएफ और सरकार द्वारा चलाई जा रही आशीर्वाद योजना के नाम पर चार साल का डिप्लोमा और दो साल की ट्रेनिंग करवाने के बाद छात्र श्रमिकों को ना स्थाई रोजगार प्राप्त होता है, और ना ही उस डिप्लोमा सर्टिफिकेट को अन्य कंपनी मे मान्यता दी जाती है।

इसके चलते अपने भविष्य और रोजगार के प्रति खिलवाड़ और चिंता को देखते हुए आज कंपनी गेट पर एनटीटीएफ के लगभग 800 श्रमिक अपने स्थाई रोजगार की माँग को लेकर कंपनी गेट पर एकत्र होकर कार्य बहिष्कार किया और एक सप्ताह के भीतर समस्याओं का समाधान ना होने पर उग्र आन्दोलन करने की चेतावनी भी दी।

दरअसल, मोदी सरक द्वारा कंपनियों को फोकट के मज़दूर उपलब्ध करने के लिए नीम ट्रेनी जैसे कई तरीके इजाद किए हैं, उनमे से एक एनटीटीएफ है। अशोक लेलैंड जैसी कम्पनियाँ नेत्तुर टेक्निकल ट्रेनिंग फाउंडेशन (एनटीटीएफ) के तहत  डिग्री, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और कौशल विकास के बहाने दो से चार साल के लिए भर्ती करती हैं, काम लेती हैं फिर उन्हें निकल देती हैं और नए बैच भर्ती कर लेती हैं।

अशोक लेलैंड के छात्र श्रमिकों के साथ यही हुआ, जिसका विष्फोट सामने आया।

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