भोजन माताओं को निकालने के फरमान के विरोध में प्रदर्शन

उत्तराखंड के हरिद्वार व हल्द्वानी में जोरदार प्रतिरोध

प्रगतिशील भोजन माता संगठन उत्तराखंड नैनीताल द्वारा भोजन माताओं को न्यूनतम वेतन, स्थाई रोजगार दिए जाने व अमानवीय शासनादेश रद्द कराने के संदर्भ में 7 फरवरी को कुमाऊं मंडल में, हल्द्वानी में व गढ़वाल मंडल के हरिद्वार में विशाल प्रदर्शन व सभा तथा राज्य सरकार का पुतला दहन किया गया।

हल्द्वानी

प्रगतिशील भोजनमाता संगठन, उत्तराखंड, नैनीताल यूनियन ने अपना प्रदर्शन किया। बुद्ध पार्क हल्द्वानी में एक सभा की। सभा के बाद शहर में जुलूस निकाला गया। भोजनमाताओं की मांगों का समर्थन करते हुए कुमाऊ के सामाजिक संगठन व ट्रेड यूनियन कार्यक्रम में शामिल हुई।

सभा का संचालन करते हुए यूनियन की महामंत्री रजनी ने कहा कि भोजनमाताएं पिछले 17-18 वर्षों से खाना बनाने का कार्य कर रही है। स्कूलों में खाना बनाने के अतिरिक्त भोजनमाताऐ स्कूलों की साफ-सफाई, झाड़ी काटना, किचन गार्डन बनाना, जन्म दिवस व अध्यापकों की विदाई पार्टी में पकवान बनाना, समय-समय पर अध्यापकों को चाय बनाकर देने का कार्य करती हैं।

सभा में यूनियन के अध्यक्ष हंसी ने कहा कि हम अपना कार्य बड़ी मेहनत ईमानदारी से कर रही हैं। लेकिन सरकार भोजनमाताओं को निकालने के नए-नए जी.ओ.पारित कर रही है। सरकार का काम जनता का रोजगार छीनना नहीं बल्कि रोजगार देना होता है। भोजनमाताऐ हमेशा नौकरी से निकाले जाने के भय के कारण मानसिक तनाव में जीने को मजबूर हैं।

सभा में वक्ताओं ने कहा कि हम भोजनमाताएं गरीब परिवारों से आती हैं। हम बहुत मुश्किल से 2000 रुपये में अपने परिवार का गुजर बसर करती हैं। अब इतने बर्षो बाद अगर हमें निकाल दिया जाएगा तो हम कहां जाएंगी? क्या करेंगी? हम कैसे अपने परिवार का पालन पोषण करेंगी?

वक्ताओं ने कहा कि हमें मात्र 2000 रुपये मिलते हैं। जिसमें से 1000 रुपये केंद्र सरकार व 1000 रुपये राज्य सरकार देती है। जबकि केरल, पांडुचेरी. तमिलनाडु व अन्य कई राज्यों में भोजनमाताओं को कई गुना ज्यादा वेतन दिया जाता है।

हरिद्वार

हरिद्वार में संगठन ने सभा की और जुलूस के बाद सिटी मजिस्ट्रेट हरिद्वार के माध्यम से राज्यपाल महोदय  उत्तराखंड को ज्ञापन प्रेषित किया गया।

हरिद्वार जिले की संयोजिका दीपा ने कहा कि 18-20 सालों से बहुत कम वेतन (250रु) से नौकरी शुरू की आज आसमान छूती महंगाई में मात्र ₹2000 मिल रहा है। इसे बढ़ाना व स्थाई करना तो दूर उत्तराखंड सरकार भोजन माताओं को निकालने का अमानवीय शासनादेश ला रही है। जिसका पूरे राज्य में विरोध किया जा रहा है।

भेल मजदूर ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष राज किशोर ने कहा कि सरकार अपने विभाग में न्यूनतम वेतन न देकर खुद ही श्रम कानूनों का उल्लंघन कर रही है।

इंकलाबी मजदूर केंद्र के हरिद्वार प्रभारी पंकज कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार व राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण के झूठे नारे देती है उत्तराखंड में 27000 भोजन माता हैं इन भोजन माताओं को स्थाई करने के स्थान पर निकालने का जिओ पास कराया जा रहा है जिसकी संगठन घोर भर्त्सना करता है।

प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की निशा ने कहा कि हम भोजन माताओं के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ेंगे राज्य व केंद्र सरकार के” बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ” के झूठे नारे की पोल खोलेंगे।

क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के संयोजक नासिर अहमद ने कहा कि भोजन माताओं का बोनस व ड्रेस का पैसा अभी तक स्कूलों में नहीं मिला है कई स्कूलों में भोजन माताओं को निकाला जा रहा है यह सरकार का महिला विरोधी रुख है।

प्रदर्शन व रैली में प्रगतिशील भोजन माता संगठन की दीपा, रंजना, गीता देवी, सुरेशना ,हेमा, जानकी देवी, नूरजहां ,सुमन ,ओमवती, रेखा , सीमा, पूनम ,हसीना, संगीता आदि सैकड़ों भोजन माताऐं उपस्थित रहे।

इसके साथ प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र की निशा, दीपा, मालती, पूनम, प्रियंका, रश्मि; भेल मजदूर ट्रेड यूनियन के राजकिशोर, अवधेश कुमार, निशू कुमार, ब्रजराज सिंह, सत्यवीर सिंह; इंकलाबी मजदूर केंद्र के पंकज कुमार, राजू ,बृजेश, कुलदीप सिंह,नितिन ,हिमांशु,; फूड्स श्रमिक यूनियन आईटीसी के अध्यक्ष गोविंद सिंह ; देवभूमि श्रमिक संगठन हिंदुस्तान यूनिलीवर के अध्यक्ष शिशुपाल सिंह रावत; सत्यम ऑटो कॉम्पोनेंट्स सिडकुल के महिपाल सिंह, चंद्रेश कुमार, अंकित राठी, हरीश नेगी, विजेंद्र, नित्यानंद, कृष्णा, मिथिलेश आदि उपस्थित रहे।

प्रमुख माँगें

  • सभी भोजनमाताओं को स्थाई करो।
  • भोजनमाताओं का न्यूनतम वेतन लागू करो।
  • अमानवीय जी. ओ. रद्द करो।

भूली-बिसरी ख़बरे

%d bloggers like this: