एचपी इंडिया में भी छँटनी के लिए वीएसएस स्कीम

नए लेबर कोड का फंडा है- स्थाई हटाओ, फिक्सड टर्म रखो!

नए श्रम संहिताओं को लागू होने से पहले ही कंपनियों में छँटनी के लिए होड़ लग गई है। होंडा बाइक, होंडा कार, टाटा मोटर्स, भारत फोर्ज, थर्मेक्स के क्रम में इलेक्ट्रॉनिक कंपनी एचपी इंडिया में भी छँटनी के लिए स्वैच्छिक सेवा त्याग योजना (वीएसएस स्कीम) जारी हो चुकी है।

एचपी इंडिया ने यह योजना अपने सभी प्लांटों के लिए अलग-अलग जारी किया है। साथ ही एक कथित प्रश्नोत्तरी अपेक्षित प्रश्न के रूप में दी गई है, जो स्वैच्छिक पृथक्करण योजना (वीएसएस) की तथाकथित खूबियों के बारे में बताता है।

इस कथित योजना के तहत मुआवजा के तौर पर 2 माह का नोटिस पे व 2 माह के एक्सग्रेशिया के अलावा कुल सेवा अवधि के प्रत्येक वर्ष के लिए एक माह का वेतन मिलेगा। यानि मामूली भुगतान पर नौकरी खत्म। हालांकि 31 दिसंबर की समय सीमा समाप्त हो जाने के बावजूद अधिकतर कर्मचारियों ने इसे स्वीकार नहीं किया है।

सरकारी से लेकर निजी कंपनियों तक में छँटनी का खेल जारी

उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार 50 साल उम्र पार या 30 साल नौकरी कर चुके सरकारी कर्मचारियों को बहार निकाल रही है। इसी तर्ज पर तमाम राज्य सरकारें भी छंटनी तेज कर चुकी हैं। रास्ता तैयार है, सो निजी कम्पनियाँ भी उसी रास्ते पर दौड़ लगा रही हैं। उधर श्रम कानूनों में बदलाव से आ रहे लेबर कोड में नियत अवधि (फिक्स्ड टर्म) का फंडा तैयार है।

एचपी की कथित वीएसएस योजना

एचपी कंपनी द्वारा पंतनगर प्लांट के लिए 1 दिसंबर 2020 को जारी सूचना में लच्छेदार भाषा में लिखा है कि समस्त कर्मचारी/कर्मचारी गण को विदित है कि हम एक संगठन के रूप में सुधरीकरण की ओर अग्रसर हो रहे हैं, जिससे कि तेजी से विकसित हो रहे कारोबारी माहौल में बेहतर ढंग से ढाला जा सके। अतः इसमें और ज्यादा कुशल संचालन विधियां अपनाना और हमारी कार्यबल आवश्यकताओं पर पुनर्विचार करना शामिल है।

सूचना में लिखा है कि इस संदर्भ में कंपनी अपने कर्मचारियों/कर्मकारों को एक “स्वैच्छिक सेवा त्याग योजना” के अंतर्गत स्वेच्छा से रोजगार छोड़ने को प्रार्थना पत्र आमंत्रित करती है।

यह कथित स्वैच्छिक सेवा त्याग योजना 1 दिसंबर 2020 से प्रारंभ होकर 1 माह के लिए प्रभावी होगा। इस अवधि में आमंत्रण दिए जाने वाले कर्मचारीगण/कर्मकार को एचपी इंडिया सेल्स प्राइवेट लिमिटेड, सिडकुल, पंतनगर, उत्तराखंड में अपने कर्तव्यों से महीने के अंतिम दिवस 31 मार्च 2020 तक कार्यमुक्त किया जा सकता है।

इस सूचना के साथ एक विवरण भी संलग्न है। जिसमें सेवा मुआवजा की बात की गई है। जिसमें प्रत्येक 6 माह के लिए कुल सेवा के प्रत्येक पूर्ण वर्ष के लिए 30 दिन की मज़दूरी/वेतन के बराबर राशि, 2 महीने का नोटिस पे, 2 महीने का वेतन/मज़दूरी एक्सग्रेशिया धनराशि के रूप में मिलेगा। इसके अलावा मज़दूरों की बकाया राशि और 1 माह के भीतर ग्रेच्युटी के भुगतान की बात लिखी है।

यही नहीं पीडीएस के तहत भुगतान में जो कटौती होगी वह भी सेवा त्यागने वाले कर्मचारी के मद से होगी और उक्त कर्मकार को समझौता भी करना पड़ेगा। सभी प्रकार के दावों का पूर्ण व अंतिम निपटारा भी इसके साथ हो जाएगा। संबंधित कर्मचारी स्वयं या उसके किसी कानूनी उत्तराधिकारी के लिए रोजगार का कोई दावा नहीं कर सकता है ना ही किसी अन्य प्लांट में उसे नियोजित किया जाएगा।

कई बड़ी कम्पनियां कर चुकी हैं वीआरएस की घोषणा

  • 11 दिसंबर से टाटा मोटर्स में स्वैच्छिक सेवानिवृत्त योजना (वीआरएस स्कीम) चल रही है। जिसकी तिथि कंपनी ने 16 जनवरी तक बढ़ दी थी।
  • होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर्स इंडिया (एचएमएसआई) ने मानेसर प्लांट से वीआरएस के बहाने भारी छंटनी का फरमान जारी कर दिया है। जिसकी अवधि पांच जनवरी से 23 जनवरी 2021 तक है।
  • होंडा ने ग्रेटर नोएडा स्थित कार प्लांट को बंद करके क़रीब 1000 स्थाई श्रमिकों को ज़बरदस्ती वीआरएस देकर प्लांट को खाली करा लिया था।
  • भारत फोर्ज ने जुलाई और सितंबर 2020 के बीच पुणे के मुंडवा और सतारा संयंत्रों में वीआरएस की पेशकश की थी, लेकिन केवल 20 श्रमिकों ने इसका विकल्प चुना। उसने नवंबर 2020 में 10 या अधिक वर्षों के अनुभव वाले श्रमिकों के लिए दूसरा वीआरएस स्कीम लागू किया है।
  • पर्यावरण और ऊर्जा कंपनी थर्मैक्स ने भी 40 साल से अधिक उम्र अथवा जिन्होंने संयंत्र में 10 साल पूरे कर लिए हैं, उन सभी कर्मचारियों के लिए वीआरएस की घोषणा की है। 285 श्रमिकों में से 200 इस योजना के लिए पात्र थे, लेकिन महज 47 ने वीआरएस लिया। 

यही है मोदी दौर का फंडा

देशी-बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हित में लगातार सक्रीय मोदी सरकार जहाँ सरकारी क्षेत्र की कंपनियों व विभागों को तेजी से निजी मुनाफाखोरों को सौंप रही है, वहीं तमाम बदलावों के साथ बेलगाम लूट के रास्ते बना रही है।

उसने मालिकों को मज़दूरों को मनमर्जी रखने व निकालने की खुली छूट के लिए 44 श्रम कानूनों को ख़त्म करके 4 श्रम संहिताएँ थोप दी हैं। सरकारी क्षेत्र में 50 साल उम्र पार या 30 साल नौकरी कर चुके सरकारी कर्मचारियों की छंटनी की योजना लागू है।

रास्ता तैयार है, सो निजी कम्पनियाँ भी उसी मार्ग पर दौड़ लगा रही हैं। उधर श्रम कानूनों में बदलाव से आ रहे लेबर कोड में नियत अवधि (फिक्स्ड टर्म) का फंडा तैयार है।

चुनौतियों से जूझने के लिए आँखें खोलो

यह आने वाले दौर की झलक मात्र है। असल में देश की व्यापक मेहनतकश अवाम, विशेष रूप से नौजवानों के लिए यह बेहद संकट की घडी है। जाहिरतौर पर यह बंद आँखें खोलने और अंधभक्ति छोड़कर इन चुनौतियों से जूझने के लिए कमर कसने की जरूरत है।

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