गुजरात अंबुजा प्रबंधन पर धोखाधड़ी का मुक़दमा दर्ज

प्रदूषण फैलाने पर जुर्माने के बाद पीएफ-ईएसआई घोटाले में फांस

सितारगंज (उत्तराखंड)। सिडकुल क्षेत्र स्थित गुजरात अंबुजा फैक्ट्री के सीईओ, एमडी, वाइस प्रेसिडेंट एचआरडी, सहित प्रबंधकों के ऊपर पुलिस ने अमानत में खयानत का मुकदमा दर्ज किया है। कंपनी द्वारा इपीएफ व ईएसआई में गबन के खिलाफ मज़दूरों द्वारा कोर्ट में गुहार लगाने के बाद यह मुकदमा दर्ज हुआ है।

अदालत के आदेश पर पुलिस ने ईपीएफ व ईएसआई में धनराशि जमा ना करने के लिए के मामले में गुजरात अंबुजा फैक्ट्री के सीईओ मनीष गुप्ता, एमडी संदीप अग्रवाल, वाइस प्रेसिडेंट आरके गुप्ता, एचआरओ के के राय व सुमित शर्मा पर आईपीसी की धारा 406 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

उल्लेखनीय है कि गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट लिमिटेड, सितरगंज द्वारा मज़दूरों के ईपीएफ व ईएसआई आदि का अंशदान नहीं जमा कराए गए थे। जबकि कंपनी द्वारा मज़दूरों के वेतन से भी लगातार अंशदान काटे जाते रहे। मज़दूरों ने इस मामले को कई बार उठाया लेकिन स्थानीय पुलिस इसको गोलमाल करती रही।

यही नहीं, मज़दूरों ने कंपनी के इस घोटाले के ख़िलाफ़ आंदोलन किया तो पुलिस ने उल्टे उनका दमन किया और कंपनी की तहरीर पर मज़दूरों पर शांति भंग आदि के मुक़दमे ठोंक दिए थे।

मज़दूरों ने कोर्ट का लिया सहारा, कोर्ट ने दिया आदेश

इसके बाद मज़दूरों की ओर से श्रमिक नरवीर सिंह ने 156 (3) के तहत न्यायालय में केस दाखिल किया। जिसपर सुनवाई के बाद अदालत के आदेश पर पुलिस ने फैक्ट्री के 32 मज़दूरों की ईपीएफ व ईएसआई में धनराशि (अंशदान) जमा ना करने के लिए पैसों के गबन के मामले में गुजरात अंबुजा फैक्ट्री के सीईओ मनीष गुप्ता, एमडी संदीप अग्रवाल, वाइस प्रेसिडेंट आरके गुप्ता, एचआरओ के के राय व सुमित शर्मा पर आईपीसी की धारा 406 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

प्रदूषण फैलाने पर भी लगा है भारी जुर्माना

इससे पूर्व  गुजरात अंबुजा सहित 17 फैक्ट्रियों पर प्रदूषण फैलाने और अनुमति से अधिक भूमि से जल संचय के खिलाफ एनजीटी ने भारी जुर्माना लगाया है, जिसके खिलाफ गुजरात अंबुजा व अन्य कंपनियों द्वारा उच्च न्यायालय नैनीताल में दायर वाद भी खारिज हो चुका है।

इस तरह से गुजरात अंबुजा के प्रबंधन पर गैर कानूनी गतिविधियों के लिए एक के बाद एक कार्यवाहियाँ हो हो रही हैं। अभी 115 मजदूरों की गैरकानूनी गेट बंदी और श्रमिकों के उत्पीड़न तथा पंजीकृत यूनियन की मान्यता का संघर्ष जारी है।

निश्चित ही इस जीत से मज़दूरों में उम्मीद की एक लहर आई है और वह कार्यबहाली सहित अन्य मामलों में भी जीत हासिल करेंगे।

एक साल से संघर्ष जारी…

ज्ञात हो कि गुजरात अंबुजा के मज़दूर प्रबंधन के ज़ुल्म के ख़िलाफ़ जनवरी 2020 से लगातार संघर्षरत हैं। आज भी 115 मज़दूर गैरकानूनी रूप से बाहर हैं तथा प्रबंधन के दमन-उत्पीड़न और घोटालों के शिकार बने हुए हैं। आज भी उनका संघर्ष जारी है।

ऐसे में मज़दूरों के संघर्ष की यह एक अहम जीत है।

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