जज्बे के साथ विविध रूपों में मना किसान महिला दिवस

कहीं प्रदर्शन, कहीं अनशन, कहीं गीत, नाटक और नृत्य

18 जनवरी को किसान महिला दिवस के अवसर पर पूरे देश में महिलाओं का दिन था। देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा महिला आन्दोलनकारियों के ख़िलाफ़ नकारात्मक टिप्पणी की प्रतिक्रिया में पूरे देश में जबर्दस्त प्रदर्शन हुए। महिलाओं ने न केवल दिल्ली की सीमाओं पर अपने परचम लहराए बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में उनकी आवाज बुलंद हुई।

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गलन भरी सर्दी को मात देती आधी आबादी जब सड़कों पर थी तो कहीं प्रदर्शन हुए, कहीं अनशन, कहीं गीत, नाटक और नृत्य हुए। अलग-अलग रंग और अलग-अलग रूपों में जो संस्कृति सामने आयी वह अद्भुत थी।

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उल्लेखनीय है कि 11 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में चीफ़ जस्टिस बोबडे ने सवाल किया था कि ‘इस विरोध प्रदर्शन में महिलाओं और बुज़ुर्गों को क्यों शामिल किया गया है?’ जस्टिस बोबडे ने वरिष्ठ वकील एच एस फुल्का से कहा कि ‘वो आंदोलन में शामिल महिलाओं और बुज़ुर्गों को प्रदर्शन स्थल से घर वापस जाने के लिए राज़ी करें।’

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम एक महिला का पत्र

किसान आंदोलन में शामिल दिल्ली के सिंघु, टिकरी और गाज़ीपुर बॉर्डर पर बैठी औरतें सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे को जवाब दिया। तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे आंदोलन के बीच आज महिला किसान दिवस मनाया गया। जिसमें कई अन्य महिला वादी संगठनों ने भी शिरकत की और प्रदर्शन के अलग-अलग जगह से मार्च निकाला।

देश के कुछ हिस्सों में कुछ प्रदर्शनों कि झलकियाँ

कुरुक्षेत्र

महिला किसान दिवस के समर्थन में व तीनों काले कृषि कानूनो को रद्द कराने की माँग को लेकर जन संघर्ष मंच हरियाणा की ओर से गांव मिर्जापुर व शास्त्री नगर कुरुक्षेत्र में सभा- प्रदर्शन किया गया।

सभाओं में मंच की जिला सचिव चन्द्ररेखा, उपाध्यक्ष उषा कुमारी, कोमल, प्रांतीय महासचिव सुदेश कुमारी ने कहा कि मोदी सरकार ने कोरोना महामारी के काल में जो 3  काले कृषि कानून असंवैधानिक व तानाशाही पूर्ण तरीके से पास किये हैं उनके खिलाफ किसान आंदोलन में मजदूर और किसान महिलाएं बड़ी संख्या में भाग ले रही हैं, लेकिन मोदी सरकार के मंत्री और  सुप्रीम कोर्ट  आंदोलन में भाग ले रही महिलाओं व बच्चों को अपने घर लौट जाने की जो नसीहत दे रहे हैं  वह अत्यंत निंदनीय है।

उन्होंने कहा कि यह  सरकार की पितृसत्तात्मक, रूढ़ीवादी, महिला विरोधी सोच को ही प्रदर्शित करता है जबकि इतिहास इस बात का गवाह है कि देश में जितने भी आंदोलन हुए हैं उसमें महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन में अनेक क्रांतिकारी महिलाओं ने देश आजाद करवाने के लिए अपनी कुर्बानियां दी हैं महिलाओं ने यह साबित किया है कि वह किसी भी रुप में पुरुषों से कम नहीं है।

गोहाना

समतमूलक महिला संगठन, मेहनतकश किसान मज़दूर संगठन और जन संघर्ष मंच हरियाणा ने आज गोहाना शहर के चौ. छोटू राम चौक पर ‘ किसान महिला दिवस ‘ का आयोजन किया। कार्यक्रम की शुरुआत में 54 दिनों से जारी इस किसान आन्दोलन के दौरान शहीद हुए 100 से ज़्यादा किसानों को भावभीनी श्रधांजलि अर्पित की गयी।

देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री बोबड़े के बयान, “ महिलाओं को धरनास्थल से अपने घर भेज दिया जाए“ का विरोध करते हुए सब ने एक स्वर में कहा कि महिलाएँ स्वतन्त्र अभिकर्ता हैं तथा ये काले क़ानून पुरुषों की तरह उनके लिए भी विनाशकारी हैं, अतः स्त्रियाँ भी पुरुषों की तरह बढ़ चढ़ कर इस आन्दोलन में शिरकत करेंगी और श्री बोबड़े को अपना बयान वापिस लेना चाहिए।

बीरमती चहल, रितु विरोधिया, रेखा, बबीता, जया विरोधिया, कमलेश, बिमला रावत, स्नेहा, सोनिया, मूर्ति, प्रीति अत्रि तथा पूजा ने कार्यक्रम का संयोजन किया।

चीका

भारतीय किसान यूनियन, मनरेगा मजदूर यूनियन तथा जन संघर्ष मंच हरियाणा के गूहला हलका की महिलाओं ने आज स्थानीय विधायक ईश्वर सिंह के निवास के आगे  ‘किसान महिला दिवस‘ का आयोजन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मनरेगा मजदूर यूनियन की ब्लॉक गूहला प्रधान कर्मजीत कौर, भारतीय किसान यूनियन से नरेंद्र कौर ने की। महिलाओं ने विधायक से मांग की कि वे जनता का प्रतिनिधि होने के नाते मेहनतकश जनता के पक्ष में खड़े हों व किसान आंदोलन का साथ दें और जन विरोधी भाजपा सरकार से समर्थन वापिस लें।

पंतनगर

किसान आंदोलन के आह्वान पर प्रगतिशील महिला एकता केंद्र एवं इंकलाबी मजदूर केन्द्र तथा ठेका मजदूर कल्याण समिति पंतनगर द्वारा दिल्ली में आंदोलनरत किसानों के समर्थन में और मोदी सरकार के किसान विरोधी तीनों कानूनों और मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं के विरोध में पंतनगर विश्वविद्यालय के टा कालोनी मैदान से शहीद स्मारक पंतनगर तक जुलूस निकाला और शहीद स्मारक पर सभा की।

वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन में पुरुष मजदूरों के साथ महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रही है। वह चाहे लंगर में खाना बनाने का काम हो या सुरक्षा, मंचों पर भाषण और सरकार और किसानों के बीच वार्ता कमेटी में शामिल होकर आंदोलन का नेतृत्व कर रही है। सरकार और सुप्रीम कोर्ट में बैठे पुरुष-प्रधान मानसिकता के लोग बुजुर्ग, बच्चों और महिलाओं को आंदोलन से दूर घर जाने की बात कर रहे हैं। सामंती सोच से ग्रस्त वह महिलाओं की भूमिका को कम आंकने और महिलाओं को चूल्हे चौके तक सीमित करने की कोशिश कर रहे है। जबकि वर्तमान आंदोलन हो या इतिहास में महिलाओं के बहादुराना और निर्णायक संघर्ष रहे हैं।

सभा का संचालन पुष्पा सिंह ने किया। कार्यक्रम  में लक्ष्मी पंत, मीना, लक्ष्मी, पुष्पा सिंह, मीनू, बंदना, बसंती, सुनैना, नीलम, पृथ्वी, अभिलाख सिंह, सुभाष, सुरेश, भरत यादव, मनोज, रमेश, राशिद, मोहित, सुभाष, टेकबहादुर, सुभाष चौहान, पारसनाथ, सुमित, संदीप, मोती, जे. पी. सिंह, झम्मन, आदि लोग शामिल रहे।

हल्द्वानी

प्रगतिशील महिला एकता केंद्र के नेतृत्व में हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में सांकेतिक धरना दिया गया और देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा किसान आंदोलन में महिलाओं के विरुद्ध की गई टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई।

धरना-प्रदर्शन में प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की दीपा, सुनीता, रजनी, हेमा, आरती, नीता, पछास से रूपाली, उमेश, विपिन क्रलोस से टीआर पांडे, नसीम, मोहन आदि शामिल थे।

टिकरी बॉर्डर

हज़ारों महिलाओं की तरफ़ से मोदी सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन किया गया और आइएमएफ-डबलयूटीओ का पुतला जलाया गया। इस सभा में पंजाब, हरियाणा, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की महिलाओं ने भाग लिया।

इस अवसर पर हुई रैली में पंजाब किसान यूनियन की प्रमुख नेता जसबीर कौर नत, अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संघ (AIPWA) की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी, राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य प्रफ़ेसर सुधा चौधरी (राजस्थान), ऑल इंडिया स्टूडेंट असोसीएशन (aisa) नेता गीता कुमारी (हरियाणा), ट्रेड यून्यन नेता कॉमरेड लेखा अदुवि (कर्नाटक), पंजाबी थिएटर और फ़िल्मों की जानी मानी अभिनेत्री अनीता शबदीश, लोकायत नेता (कर्नाटक) ने सभा को संबोधित किया।

कोलकाता में मशाल जुलूस निकालती महिलाएं-

Kolkata: Women farmers in a torch light rally observe 'Mahila Kisan Diwas' #Gallery

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