यूपी : रोजगार के सवाल पर युवाओं का प्रदर्शन

रिक्त पदों को छह माह में भरने की मांग

इलाहाबाद के बालसन चौराहे पर युवा मंच के बैनर तले युवाओं ने रोजगार अधिकार के लिए प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रदर्शन कर योगी सरकार को चेतावनी दी कि अगर 17 सितंबर को राष्ट्रीय स्तर पर हुए आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री योगी के छह महीने के अंदर सभी रिक्त पदों पर नियुक्ति पत्र देने की घोषणा को अमल में लाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इस आंदोलन का खामियाजा सरकार को भुगतना होगा।

युवाओं ने सभी रिक्त पदों पर भर्ती की मुख्यमंत्री की घोषणा पर अमल करो, रोजगार को मौलिक अधिकारों में शामिल करो, देश भर में रिक्त 24 लाख पदों को तत्काल भरा जाए, शांतिपूर्ण आंदोलनों पर दमनचक्र बंद करो, तानाशाही नहीं चलेगी, भ्रष्टाचार-भाईभतीजावाद बंद करो, काले कृषि कानूनों को रद्द करो के नारे लगाए गए।  मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम सदर को सौंपा गया।

प्रदर्शन का नेतृत्व युवा मंच के संयोजक राजेश सचान, अध्यक्ष अनिल सिंह, महासचिव अमरेंद्र सिंह, कार्यकारिणी सदस्य इं. राम बहादुर पटेल ने किया। सभा को संबोधित करते हुए युवा मंच पदाधिकारियों ने योगी सरकार को आगाह किया कि प्रदेश में बेरोजगारी की भयावह स्थिति को स्वीकार कर रोजगार के सवाल को हल करे। प्रदेश का युवा सच्चाई को जानता है और अब सरकार के प्रोपगंडा से गुमराह होने वाला नहीं है। योगी सरकार दावा चाहे जो करे, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में 2017 में सत्तारूढ़ होने के बाद से लगातार बेरोजगारी की दर में इजाफा हुआ है।

2017 में शिक्षक भर्ती के तकरीबन चार रिक्त पदों में से एक भी पद के लिए विज्ञापन जारी नहीं किया गया। टीजीटी पीजीटी के 2019 में 40 हजार पदों के अधियाचन में 60% की कटौती कर जो विज्ञापन जारी किया गया उसे भी रद्द कर दिया गया। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में 2017 में ही 40 हजार से ज्यादा रिक्त पदों का ब्यौरा की मीडिया रिपोर्ट्स आती रही हैं, उसे फिर से बंपर भर्तियों की सौगात, नौकरियों की बहार जैसे चुनावी नारों के साथ दोहराया जा रहा है।

युवा नेताओं ने कहा कि तकनीकी संवर्ग में एक लाख से ज्यादा पद अरसे से रिक्त हैं, लेकिन आज तक सरकार के पास इनका ब्यौरा तक उपलब्ध है। बिजली विभाग के 4102 तकनीशियन के पदों का जो विज्ञापन जारी भी किया गया था, उसे भी रद्द कर दिया गया। संचार क्रांति की वकालत करने वाली सरकार, टीजीटी-पीजीटी में कंप्यूटर शिक्षक पदों को सृजित करने के लिए तैयार नहीं है। योगी सरकार सरकारी नौकरियों को लेकर कितना गंभीर है, इसका अंदाजा अधीनस्थ से जुड़ी ढेरों भर्तियां जो पिछली सरकार द्वारा शुरू की गई थीं, उनके अभी तक अधर में रहने से लगा सकते हैं।

युवा मंच नेताओं ने कहा कि अंबानी-अडानी सहित कारपोरेट्स के हित में लागू जिन नीतियों के विरुद्ध किसानों ने ऐतिहासिक आंदोलन का आगाज किया है, उन्हीं नीतियों के खिलाफ युवाओं का भी संघर्ष है, इसलिए देश भर के युवाओं ने किसान आंदोलन से एकजुटता जाहिर की है और कहा कि इन दोनों आंदोलनों के संयोजन के लिए अच्छी पहल की जा रही है। दरअसल खेती आधारित अर्थव्यवस्था से ही आजीविका का सवाल भी हल किया जा सकता है। रोजगार के अधिकार के लिए छात्रों-युवाओं में राष्ट्रीय स्तर शुरू हुए विमर्श को आगे बढ़ाने और युवाओं की व्यापक गोलबंदी वक्त की जरूरत है, जिससे रोजगार के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने और 24 लाख रिक्त पदों को भरने के लिए सघंर्ष को अंजाम तक पहुंचाया जा सके।

उन्होंने बताया कि आंदोलन को तेज करने के लिए जल्द ही मीटिंग बुलाई जाएगी। आज के धरना प्रदर्शन में अखिलेश यादव, अशोक दुबे, अरुण तिवारी, अजरुद्दीन, दीप चंद्र प्रजापति, राजेंद्र यादव, संजय तिवारी, रवि प्रकाश, सुजित यादव, चंद्र केश यादव, रमाकांत यादव, अविनाश कुमार, प्रशांत  कुमार प्रधान, प्रमोद पटेल, अखिलेश यादव राहुल सिंह पटेल, प्रकाश यादव, संजय सम्राट, दीपचंद, हरिकेश सहित सैकड़ों छात्र मौजूद रहे।

जनचौक से साभार

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