सरकार की शरारत है कमेटी, किसान आंदोलन रहेगा जारी

किसान नेताओं ने कहा- कानून संसद से बना है सुप्रीम कोर्ट से नहीं

संयुक्त किसान मोर्चा ने कमेटी के सामने जाकर अपनी समस्या रखने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा बताया गया है कि ये कमेटी सरकार की शरारत है, सरकार सुप्रीम कोर्ट के जरिये ये कमेटी ले आई है, और कमेटी के सदस्य सरकार समर्थक हैं। ये अख़बार में किसान कानून के पक्ष में लेख लिखने वाले लोग हैं।

भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच द्वारा चार सदस्यीय कमेटी के गठन किए जाने और किसानों को उनके सामने अपनी बात रखने के आदेश के बाद आज सिंघु बॉर्डर पर किसान संगठनों ने आपात बैठक की। सिंघु बॉर्डर पर बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से कहा गया, “कमेटी के सारे सदस्य सरकार के साथ हैं, वो लगातार कृषि क़ानून के पक्ष में बोलते लिखते रहे हैं। ये कमेटी सरकार की शरारत है। ये क़ानून पार्लियामेंट ने बनाया है सुप्रीम कोर्ट ने नहीं, इसलिए हमारी लड़ाई सरकार से है।”

किसान नेता डॉ. दर्शन पाल ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने जो कमेटी बनाई है, उसके सारे सदस्य कृषि कानूनों के पक्ष में लेख लिखते रहे हैं। कमेटी के सदस्य सरकार समर्थक हैं। कमेटी में हमारा विश्वास नहीं है। कमेटी के सदस्य बदल भी जाएं तब भी हमारा आंदोलन चलता रहेगा।”

जगमोहन सिंह ने कहा, “26 जनवरी का कार्यक्रम ऐतिहासिक होगा, और आंदोलन उसके बाद भी जारी रहेगा। सरकार ने कानून बनाते वक्त जो नीति अपनाई थी, क़ानून बनाते वक़्त वैसी ही नीति कमेटी बनाते वक्त भी अपनाई गई है। किसानों से नहीं पूछा गया कि किसे कमेटी में रखा जाए।”

बता दें कि 1 दिसंबर 2020 को बैठक में सरकार द्वारा कमेटी बनाने के प्रस्ताव को उन्होंने पहले ही खारिज कर दिया था। स्वराज अभियान के योगेंद्र यादव ने कहा, “कमेटी के चारों सदस्य कृषि कानूनों के समर्थक हैं। ये लोग पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं, फिर इस कमेटी के सामने जाने का कोई औचित्य ही नहीं बचता है। जब सरकार ने कृषि क़ानून बनाने से पहले हमसे नहीं पूछा तो अब कमेटी का कोई मतलब नहीं है। सरकार सीधे कृषि कानूनों को खत्म करे।”

वहीं सुप्रीम कोर्ट के सामने सरकार के वकील और मीडिया द्वारा 26 जनवरी को प्रस्तावित किसान ट्रैक्टर परेड के बाबत फैलाए जा रहे भ्रम पर किसानों ने अपनी रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा, “लाल किले पर जाने की हमारी कोई योजना नहीं है न ही संसद के घेराव की कोई योजना है। हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण चलेगा। हमारे खिलाफ भ्रम फैलाया जा रहा है। 26 जनवरी का कार्यक्रम ऐतिहासिक होगा।”

वहीं देश के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा भी कमेटी के चारों सदस्यों के नामों पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, “कमेटी के सारे सदस्य मोदी सरकार द्वारा किसानों का खेत खलिहान हड़पने के लिए लाई गई कृषि क़ानूनों के साथ खड़े रहे हैं। ऐसे में इनका कमेटी में होना चिंताजनक है। ये जो भी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में देंगे वो पक्षपातपूर्ण होगी और सरकार के पक्ष में होगी।

जनचौक से साभार

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