8 की वार्ता फिर बेनतीजा, किसानों ने कहा हम यहीं लड़ेंगे यहीं मरेंगे

सरकार का सुप्रीम कोर्ट जाने का सुझाव, किसानों ने किया ख़ारिज

किसान यूनियनों और सरकार के बीच 15 जनवरी को दोपहर 12 बजे अगली बैठक के लिए सहमति के साथ आज की बैठक बेनतीजा खत्म हो गई। आज की बैठक में सरकार ने साफ कर दिया कि कृषि क़ानून किसी भी कीमत पर वापस नहीं लिये जाएंगे।

बैठक के बाद प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए किसान नेता हन्नान मोल्ला ने बताया कि “आज की बैठक में हमने सरकार से स्पष्ट कहा कि कृषि क़ानून रिपील करने के अतिरिक्त किसी दूसरे विकल्प पर किसान राजी नहीं हैं। इस बात पर सरकार ने कहा हम ये बात नहीं सुनेंगे बहुत सुन लिया। फिर उन्होंने कहा अगर आप कृषि कानूनों की वैधता पर सवाल है, आप इन कानूनों को  किसान विरोधी बता रहे हैं कृषि क़ानून पर सवाल उठा रहे हैं तो आप लोग सुप्रीम कोर्ट जाइए।”

हन्नान मोल्ला ने आगे बताया “ये क़ानून किसान विरोधी हैं हम इसे रिपील करवाने से कम पर नहीं वापस जायेंगे। हम यहीं लड़ेंगे यहीं मरेंगे।”डॉ. दर्शन पाल ने मीडिया से कहा, “हमने जो समाधान सरकार को दिया और जो सरकार ने हमें समाधान दिया, दोनों के समाधान में अंतर है। उनके तीनों कृषि क़ानून असंवैधानिक हैं। ये कृषि क़ानून डेथ वारंट हैं कृषि और किसान के लिए। कार्पोरेट के लिए तोहफा है ये कृषि क़ानून”।

सरकार के इस प्रस्ताव पर कि आप सुप्रीम कोर्ट जाइये किसान संगठनों ने एकमत होकर कहा है हम कोर्ट नहीं जाएंगे। चुनी हुई सरकार करे फैसला।बता दें कि आज की बैठक में सरकार द्वारा किसान यूनियनों से कहा गया है कि  आप चाहें तो सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं। सरकार ने आज की बैठक में भी किसान यूनियनों के सामने कमेटी गठित करने का प्रस्ताव दिया जिसे किसानों ने एक सुर में नकार दिया।

बैठक के बाद प्रेस कांफ्रेंस में आज सरकार का पक्ष क्या रहा इसे मीडिया से साझा करते हुए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, “आज की बैठक में कृषि क़ानूनों पर लगातार सकरात्मक चर्चा होती रही लेकिन कोई निर्णय आज नहीं हो सका। सरकार का लगातार किसान यूनियनों से आग्रह रहा कि रिपील के अतिरिक्त यदि कोई दूसरा विकल्प यूनियन दें तो सरकार उस पर विचार करेगी। लेकिन यूनियनों की तरफ से बहुत देर तक बैठक होने के बावजूद कोई विकल्प नहीं सुझाया गया।”

दोनों पक्ष के लोग 15 जनवरी दोपहर 12 बजे अगली बैठक के लिए आज की बैठक खत्म करने पर राजी हुए। देश में बहुत से लोग इस क़ानून के पक्ष में हैं। समर्थन में खड़े हैं। हम दोनों पक्ष के लोगों (जो इस क़ानून के समर्थन में हैं, और जो इस क़ानून के खिलाफ़ हैं) से बात कर रहे हैं।

सिख समुदाय के धार्मिक नेता बाबा लक्खा सिंह से आज की मुलाकात के बाबत नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा, “बाबा लक्खा सिंह जो सिख समाज के नेता हैं उनके मन में दर्द था कि किसान सर्दी में कितनी परेशानी झेल रहे हैं, किसानों की परेशानियों को लेकर वो हमसे मिलना चाहते थे। उन्होंने संदेश भिजवाया तो मैंने उनसे बात की। उन्होंने किसानों के पक्ष को हमारे सामने रखा। हमने उनके सामने कृषि क़ानून का पक्ष रखा। मैंने उनसे प्रार्थना की कि वो यूनियन से बात करें कि रिपील के अतिरिक्त वो जो भी प्रस्ताव देंगे हम विचार करेंगे। हमने लक्खा सिंह की मध्यस्थता के लिए अप्रोच नहीं किया।”

सरकार द्वारा किसानों को सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए कहे जाने पर नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ” उच्चतम न्यायालय को ही अधिकार है कि वो लोकसभा व राज्यसभा में पास क़ानून की समीक्षा करे। 11 जनवरी को कोर्ट में सुनवाई है सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला होगा हम उसका सम्मान करेंगे। सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के प्रति प्रतिबद्ध है”।

सुशील मानव

जनचौक से साभार

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