होंडा मोटरसाइकिल में होगी छंटनी, वीआरएस की घोषणा

होंडा का धंधा : वेतन समझौते का लालीपॉप, फिर छंटनी का फ़रमान

गुडगाँव। कार प्लांट की बंदी व छंटनी तथा स्कूटर प्लांट से ठेका मज़दूरों की बड़ी छंटनी के बाद अब जापानी कंपनी होंडा ग्रुप ने अपने मोटरसाइकिल प्लांट से वीआरएस के बहाने भारी छंटनी का फरमान जारी कर दिया है। जापानी होंडा का यह धंधा है, पहले वेतन समझौता करो, फिर मज़दूरों पर प्रहार करो! होंडा जनरेटर, रुद्रपुर से होंडा बाइक मानेसर तक यही खेल जारी है।

दो पहिया वाहन बनाने वाली देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी होंडा ने बुधवार को घोषणा की कि वह अपनी मोटरसाइकिल और स्कूटर इकाई में से कुछ स्थायी कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देने जा रही है। ऐसा वह परिचालन क्षमता में सुधार लाने और दीर्घकालिक व्यापार स्थिरता सुनिश्चित करने के के बहाने कर रही है।

महामारी की आड़ और कथित मंदी के बहाने मज़दूरों पर यह एक बड़ा हमला है। यह मज़दूर विरोधी श्रम संहिताओं को लागू होने के ठीक पूर्व की स्थिति है।

उल्लेखनीय है कि एक साल पूर्व होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर्स इंडिया (एचएमएसआई) ने मानेसर प्लांट से क़रीब ढाई हजार मज़दूरों को बहार का रास्ता दिखा दिया था।

पिछले दिनों होंडा ने ग्रेटर नोएडा स्थित कार प्लांट को बंद करके क़रीब 1000 परमानेंट वर्करों को ज़बरदस्ती वीआरएस देकर प्लांट को खाली करा लिया गया था। सन 2016 में उसने क़रीब 3000 स्थाई व ठेका मज़दूरों को बहार कर दिया था। अब उसने मानेसर प्लांट स्थाई श्रमिकों को जबरिया वीआरएस के तहत निकलने की नोटिस चस्पा कर दी है।

मानेसर प्लांट में वीआरएस की नोटिस चस्पा

होंडा कंपनी ने मानेसर प्लांट में मेंटेनेंस के नाम पर दिसम्बर में शट डाउन घोषित कर दिया था। इस बीच बीते पांच जनवरी को कंपनी ने वीआरएस से संबंधित एक नोटिस जारी कर कर दिया। डिवीज़नल हेड जनरल अफ़ेयर्स नवीन शर्मा द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में कहा गया है कि पांच जनवरी से 23 जनवरी 2021 तक ये योजना चलेगी और 31 जनवरी 2021 तक जो लोग 10 साल पूरा कर चुके होंगे या 40 साल की उम्र पार कर चुके होंगे, वे पात्र होंगे।

पत्र में लिखा है कि यह योजना उन सभी स्थायी कर्मचारियों के लिए खुली है, जिन्होंने 10 साल की सेवा पूरी कर ली है या वे 31 जनवरी 2021 तक 40 वर्ष से अधिक के हैं। इसके मुताबिक सेवा के वर्षों की संख्या के आधार पर एक वरिष्ठ प्रबंधक या वाइस प्रेसीडेंट को 7.2 मिलियन रुपए दिए जाएंगे। हालांकि यह तुरंत स्पष्ट नहीं था कि कितने कर्मचारी सेवानिवृत्त के योग्य होंगे।

कंपनी को इतनी जल्दी है कि नोटिस में कहा गया है कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले पहले 400 लोगों को पाँच लाख रुपए अतिरिक्त मिलेंगे। अगर इससे अधिक आवेदन आते हैं तो सभी को 4 लाख रुपये दिए जाएंगे। वीआरएस योजना में सीनियर मैनेजर, वाइस प्रेसिडेंट, मैनेजर, डिप्टी मैनेजर, असिस्टेंट मैनेजर, सीनियर एक्ज़ीक्युटिव, एक्ज़ीक्युटिव, एक्ज़ीक्युटिव, असिस्टेंट एक्ज़ीक्युटिव और परमानेंट वर्कर अप्लाई कर सकते हैं।

होंडा कम्पनी ने की थी घोषणा

हाल ही में जापानी वाहन निर्माता ने घोषणा की थी कि वह भारत में माँग में कमी के चलते अपने दो संयत्रों में से एक में ताला लगाने जा रहा है। भारत में दो कार संयंत्रों में से एक नोएडा प्लांट को बंद किया जा चुका है। इसके कुछ ही हफ्तों बाद होंडा कंपनी ने वीआरएस स्कीम की यह घोषणा की। पांच जनवरी को होंडा मोटरसाइकिल्स एंड स्कूटर्स इंडिया ने अपने कर्मचारियों को पत्र के माध्यम से इसकी जानकारी दी।

यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन के पास फाइलिंग के मुताबिक होंडा मोटरसाइकिल्स एंड स्कूटर्स इंडिया (एचएमएसआई) के 31 मार्च 2020 तक भारत के चार संयंत्रों में 7,000 से अधिक कर्मचारी थे।

छंटनी के ख़िलाफ़ ठेका मज़दूरों का हुआ था एतिहासिक आन्दोलन

क़रीब साल भर पहले 5 नवम्बर, 2019 को होंडा मानेसर प्लांट में छंटनी के ख़िलाफ़ ठेका मज़दूरों की एक ऐतिहासिक हड़ताल हुई थी। ये मज़दूर कंपनी के अंदर 14 दिन तक बैठे रहे, इसके बाद 19 नवंबर को मज़दूर कंपनी से बाहर धरने पर बैठ गए थे।

इस आंदोलन में ठेका मज़दूरों के साथ स्थाई मज़दूरों की यूनियन भी समर्थन में खड़ी हुई थी और इस कारण यूनियन के तत्कालीन प्रधान को निलंबित कर दिया गया था, जो अभी भी बाहर हैं। चार महीने तक कंपनी के सामने बैठने के बावजूद कंपनी और मज़दूरों के बीच निराशाजनक हल निकला था।

उक्त समझौते के तहत छँटनी मुआवजा व बकाया राशि के आलावा 23 हजार रुपए मुआवजे के तौर देकर प्रबंधन ने क़रीब 2500 ठेका मज़दूरों को निकला दिया था। 16 अगस्त, 2020 को यूनियन से हुए समझौते के तहत स्थाई श्रमिकों के वेतन समझौते के साथ 36 ठेका श्रमिकों को कंपनी कैजुअल/ट्रेनी पर लेने और 2 बर्ख़ास्त श्रमिकों पर वार्ता जारी रहने पर सहमति बनी थी।

पहले वेतन समझौता, अब वीआरएस का धंधा

गौरतलब है कि अभी पांच महीने पहले ही होंडा की एम्प्लाईज़ यूनियन और मैनेजमेंट के बीच वेतन समझौता हुआ था और मज़दूर इसे अपनी जीत के रूप में ले रहे थे लेकिन मैनेजमेंट की रणनीति कुछ और थी।

दरअसल, होंडा कम्पनी का यह अजमाया नुस्खा है। सन 2007 में रुद्रपुर (उत्तराखंड) में होंडा जनरेटर प्लांट होंडा पॉवर प्रोडक्ट्स लिमिटेड में यूनियन के साथ वेतन समझौता के बाद प्लांट शिफ्टिंग का फरमान जारी किया था।

श्रीराम होंडा श्रमिक संगठन के तत्कालीन महामंत्री अमर सिंह ने बताया कि उस वक्त दो साल के लम्बे संघर्ष के बाद 2009 में यूनियन से समझौते के बाद नोयडा ना जाने वालों के लिए वीआरएस व जाने वालों के लिए विस्थापन भत्ता के समझौते के बाद प्लांट ग्रेटर नोएडा शिफ्ट हुआ था।

मुनाफा बटोरो, छंटनी करो

आज ज्यादातर कम्पनियों का धंधा बन गया है कि, मज़दूरों के खून-पसीने से मुनाफा बटोरो और फिर उनके पेट पर लात मारकर पलायन कर जाओ। इसी प्रकोप के साथ भगवती-माइक्रोमैक्स के मज़दूर पिछले दो साल से गैरकानूनी छंटनी के ख़िलाफ़ संघर्षरत हैं।

होंडा ने 2009 में होंडा जनरेटर, रुद्रपुर से पलायन किया था। उसने 2016 में टापूकड़ा (राजस्थान) मोटरसाईकिल प्लांट से यूनियन बनाने पर स्थाई-अस्थाई 3000 मज़दूरों को बहार किया था। ग्रेटर नोएडा स्थित कार प्लांट को बंद करके हजारों मज़दूरों को बेरोजगार किया। अब मानेसर प्लांट से ठेका मज़दूरों को निकलने के बाद स्थाई मज़दूरों के लिए वीआरएस का फरमान जारी कर दिया है।

कानून बदलने के बाद हालात और भयावह होंगे

ये हालत तो तब हैं, जब पुराने श्रम कानून लागू हैं। अभी मोदी सरकार ने 44 श्रम क़ानूनों को ख़त्म करके चार लेबर कोड बनाकर मालिकों को रखने और निकालने की खुली छूट दे दी है। इसे में मज़दूर जमात के सामने स्थितियां और भयावह होने वाली हैं।

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