किसान क़ानूनों के साथ बिजली संशोधन विधेयक भी खतरनाक है

सरकार का असल मक़सद है कॉरपोरेट के हवाले करना

35 दिनों से राजधानी की सीमाओं पर डटे किसान कॉरपोरेटपरास्त तीन कृषि क़ानूनों के साथ ही बिजली संशोधन विधेयक 2020 को भी खत्म करने की भी माँग कर रहे हैं। नया बिजली बिल किसानों के लिए घातक होने के साथ आम जन के लिए भी ख़तरनाक है। इसका विरोध क्यों ज़रूरी है, बता रहे हैं वरिष्ठ विश्लेषक गिरीश मालवीय

हरियाणा – पंजाब – राजस्थान के किसान दिल्ली की सीमाओं पर जिन कानूनों का विरोध कर रहे हैं उनमें तीन किसान बिलो के अलावा बिजली बिल से जुड़ा मुद्दा सबसे अहम है जिसके बारे अन्य प्रदेशों के किसानों को ठीक से जानकारी नहीं है यदि वह सही तरीके से बिजली बिल वाला मुद्दे को समझ लेंगे तो वह भी अपने किसान भाइयों के साथ आकर खड़े हो जाएंगे!

किसान आंदोलन से जुड़े नेताओं ने मोदी सरकार से बिजली संशोधन विधेयक 2020 को खत्म करने की भी माँग की है। दरअसल, इस विधेयक में कहा गया है कि क्रॉस सब्सिडी को खत्म किया जाए और किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी का भुगतान उनके खाते में किया जाएगा। जिसका मतलब है कि किसानों को पहले पूरा बिजली बिल देना होगा, इसके बाद उनके खाते में सरकार की ओर से सब्सिडी का भुगतान किया जाएगा।

क्या है क्रॉस सब्सिडी?

क्रॉस सबसिडी को समझना बेहद जरूरी है। …क्रॉस सब्सिडी का अर्थ है उन लोगों और संगठनों को ऊंची कीमत पर बिजली बेचना जिनकी हैसियत अच्छी है और यहां से हुई कमाई के जरिए उन लोगों की बिजली की दर को कम करना जिनकी हैसियत कमजोर है।

जैसे औद्योगिक क्षेत्र में बिजली की दर ऊंची रखकर किसानी क्षेत्र में बिजली की दर कम करना। अगर एक बार क्रॉस सब्सिडी की व्यवस्था खत्म हुई तो किसानों के लिए बिजली के दाम महंगे होना तय है

क्रॉस सब्सिडी की व्यवस्था अब तक यह सुनिश्चित करती हैं कि देश में किसानों को बढ़ती बिजली की लागत का अधिक प्रभाव न पड़े लेकिन इसके खत्म होते ही खेती करना बेतहाशा महंगा हो जाएगा

डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर : किसान कहाँ से भरेगा पैसा?

सरकार कह रही है कि वह डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए किसानों के खाते में सब्सिडी पहुंचा देगी। जैसे वह LPG में कर रही है। लेकिन जरा सोचिए अगर एक किसान के पास बिजली का बिल ही दस से बारह हजार रुपये का आएगा तो बाद में मिलने वाली सब्सिडी का क्या मतलब रह जाएगा ? वो पहले ये पैसा भरेगा कैसे ?

वैसे भी किसान को अपनी फसल के लिए सब्सिडी वाली बिजली नहीं चाहिए, उसे सिर्फ पानी चाहिए। अगर सरकार पानी उपलब्ध करा दे तो किसान कभी भी सस्ती बिजली की माँग नहीं करेगा!..

सरकार की असली मंशा क्या है?

इस कृषि कानूनों और साथ ही ऐसे बिजली बिल में ऐसे अमेंडमेंट को पास करना सरकार की असली मंशा को दर्शाता है कि मोदी सरकार का असल मकसद किसानों को खेती से दूर करना है, ताकि कॉरपोरेट समूह ही खेती करें। और खाद्य पदार्थ महंगे से महंगे होते जाए!

अच्छी बात यह है कि देश का किसान धीरे धीरे इन सब बातों को समझने लगा है पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के अवध के बाराबंकी में किसानो का दिल्ली किसान आंदोलन के पक्ष मे विशाल धरना प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है ऐसे ही देश भर में किसानों का इन बिलो के विरुद्ध खड़ा होना बेहद जरूरी है।

-गिरीश मालवीय की वाल से

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