ब्लाक हुआ किसान आंदोलन का फेसबुक पेज

आंदोलन से बौखलाहट, विरोध के बाद हुआ बहाल

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ राजधानी दिल्ली से सटे बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन पिछले कई हफ्तों से जारी है। इसे लेकर कई तरह की अफवाहें भी फैलाई जा रही हैं। इन अफवाहें को काउंटर करने के लिए किसान संगठनों के “आईटी सेल” ने एक फेसबुक पेज बनाया है। रविवार को यह पेज फेसबुक ने थोड़ी देर के लिए अपनी साइट से हटा दिया था। हालांकि कुछ घंटों के बाद यह वापस आ गया। इसे लेकर फेसबुक ने अफ़सोस जताया लेकिन इसके पीछे क्या वजह थी यह साफ नहीं किया है।

किसानों के मुताबिक फेसबुक ने जानबूझकर ऐसा किया है। हालांकि विरोध के बाद पेज को फिर से बहाल कर दिया गया। फेसबुक के प्रवक्ता ने इसके लिए खेद जताया और कहा कि किसान एकता मोर्चा के पेज को दोबारा से चालू कर दिया गया है। आंदोलन से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के प्रसार के लिए किसान संगठनों ने किसान एकता मोर्चा के नाम से फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर अकाउंट बनाया है। फेसबुक पेज बंद होने के बाद किसान एकता मोर्चा के ट्विटर हैंडल से कहा गया कि जब लोग आवाज उठाते हैं तो वे बस यही कर सकते हैं।

संयुक्ता किसान मोर्चा द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, शाम 7 बजे, पेज से एक फेसबुक लाइव स्ट्रीम किया जा रहा था। इस लाइव स्ट्रीमींग में बात कर रहे थे कि कैसे वे पेज के माध्यम से 94 लाख लोगों तक पहुंचे है। तभी पेज साइट से हटा दिया गया। बयान में कहा गया कि हम सभी कृषि नेताओं के साथ कल इस मुद्दे पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। इस बारे में फेसबुक का कहना था कि वह (किसानों का पेज) स्पैम पर अपने सामुदायिक मानकों के खिलाफ गया था।

किसान मोर्चा के आईटी सेल के बलजीत सिंह ने अपने बयान में कहा, “आज शाम 7 बजे फेसबुक पेज को उड़ा दिया गया। हमने आज अपनी लाइव स्ट्रिमिंग में मोदी जी के किसानों के लिए कही गई बात की क्लिप लेकर उनके जवाब दिए थे। किसान एकांत मोर्चा की पहुंच 94 लाख तक थी और एक लाख हमारे फॉलोअर्स थे। हम सभी किसान नेताओं के साथ कल उचित प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।”

किसान एकता मोर्चा के फेसबुक पेज को अनपब्लिश किए जाने पर स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव ने भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सरकार और मंत्रियों के बाद अब फेसबुक भी बौखला गया है।

बता दें पिछले चार हफ्तों से चल रहे इस आंदोलन को खत्म करने के लिए सरकार और किसान संगठनों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई है। लेकिन अबतक कोई बात नहीं बन पाई है। किसान अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना कि कानून को वापस लिया जाना चाहिए।

जनसत्ता से साभार

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