अधिवेशन : रेलवे में निजीकरण नहीं होगा स्वीकार

रेलकर्मी करेंगे देशव्यापी प्रदर्शन

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि । रेलवे जिस रफ्तार से निजीकरण कर रहा है, उससे यह साफ होता है कि आने वाले समय में रेल संरक्षा का काम भी निजी हाथों में सौंप दिया जाएगा। रेलवे का निजीकरण किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शुक्रवार को हुए डब्ल्यूसीआरईयू के वार्षिक अधिवेशन में एआईएफआर के महामंत्री शिवगोपाल शर्मा ने रेलवे को चेतावनी देते हुए यह बात कही।

पूंजीपतियों के हाथों में भारतीय रेल को बेचना चाहती है: मदन महल रेलवे स्टेशन स्थित उत्सव सामुदायिक भवन में वेस्ट सेंट्रल रेलवे एम्पलाइज यूनियन का 18 वां वार्षिक अधिवेशन का आयोजन किया गया। इस मौके पर अध्यक्षता करते हुए महामंत्री शर्मा ने कहा कि सरकार पूंजीपतियों के हाथों में भारतीय रेल को बेच देना चाहती है, लेकिन यूनियन ऐसा नहीं होने देगी, सरकार को इस साजिश की कीमत चुकानी पड़ेगी। केन्द्र सरकार को रेलवे को निजी हाथों में बेचने के गंभीर परिणाम भोगने पड़ेंगे। मिश्रा ने कहा कि सरकार कोरोना की आड़ में रेल कर्मचारियों की हितों पर कुठाराघात कर रही है।

पुरानी पेंशन स्कीम हासिल करके रहेंगे: अधिवेशन के मुख्य अतिथि पमरे के महाप्रबंधक शैलेंद्र कुमार सिंह ने अपने कहा कि रेल कर्मचारियों के हित में सार्थक प्रयास जारी रखने की बात कही। वहीं यूनियन के महामंत्री मुकेश गालव ने कहा कि एनपीएस का विरोध राष्ट्रीय स्तर पर होगा, जिसकी शुरुआत जबलपुर से होगी। चाहे जो हालात हों, पुरानी पेंशन स्कीम को हासिल करके रहेंगे। इस अवसर पर जबलपुर मंडल सचिव नवीन लिटोरिया और मंडल अध्यक्ष बीएन शुक्ला ने कहा कि एनपीएस की जगह ओपीएस लागू करने, एक जनवरी 2020 से फ्रीज डीए के आदेश जारी कर भुगतान करने, रात्रिकालीन ड्यूटी भत्ता की सीलिंग लिमिट समाप्त कर सभी कर्मचारियों को भुगतान करने, खाली पड़े रिक्त पदों को शीघ्र की मांग पर जोर दिया।

नईदुनिया से साभार

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