सुप्रीम कोर्ट ने विरोध प्रदर्शन का हक बताया, योगी सरकार ने दमन बढाया

यूपी में 6 किसान नेताओं से 50 लाख का बांड व गारंटर माँगा

उच्चतम न्यायालय ने किसानों के अहिंसक विरोध प्रदर्शन के हक को स्वीकारते हुए सुझाव दिया कि केंद्र फिलहाल इन तीन विवादास्पद कानूनों पर अमल स्थगित कर दे, क्योंकि वह एक ‘निष्पक्ष और स्वतंत्र’ समिति गठित करने पर विचार कर रहा है। उधर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने दमन का पाटा चलते हुए छह किसान नेताओं को नोटिस जारी कर प्रत्येक से 50 लाख रुपये का निजी बॉन्ड्स और उतनी ही राशि के दो गारंटर भी उपलब्ध कराने के लिए कहा है।

सुनवाई होने तक कानूनों के अमल पर रोक का सुझाव

नये कृषि कानूनों पर फिलहाल रोक लगाने का संकेत देते हुए उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस रामासुब्रमणियन की पीठ ने केंद्र सरकार से गुरुवार को पूछा कि नये कृषि कानूनों पर फिलहाल रोक लगाने की क्या संभावनाएं हैं? क्या सरकार उच्चतम न्यायालय को यह भरोसा दिला सकती है कि इस मामले की सुनवाई होने तक वह कानून को अमल में नहीं लाएगी?

चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने एजी केके वेणुगोपाल से पूछा, “क्या केंद्र सरकार यह  कह सकती है कि कानून को लागू करने की कोई कार्यकारी कार्रवाई नहीं की जाएगी, ताकि वार्ता सुगम हो सके। इस पर एजी केके वेणुगोपाल ने जवाब दिया कि केंद्र सरकार से निर्देश लेने के बाद वे इससे उच्चतम न्यायालय को अवगत कराएंगे।

पीठ ने कहा कि उसका यह भी मानना है कि विरोध प्रदर्शन करने का किसानों के अधिकार को दूसरों के निर्बाध रूप से आने जाने और आवश्यक वस्तुओं को प्राप्त करने के मौलिक अधिकारों का अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के अधिकार का मतलब पूरे शहर को अवरूद्ध कर देना नहीं हो सकता है।

पीठ ने कहा कि इस संबंध में समिति गठित करने के बारे में विरोध कर रहीं किसान यूनियनों सहित सभी पक्षों को सुनने के बाद ही कोई आदेश पारित किया जाएगा। पीठ ने कहा कि केंद्र द्वारा इन कानूनों के अमल को स्थगित रखने से किसानों के साथ बातचीत में मदद मिलेगी।

उत्तर प्रदेश में दमन का पाटा

किसान आंदोलन के बीच उत्तर प्रदेश के संभल जिला प्रशासन ने छह किसान नेताओं को नोटिस जारी कर प्रत्येक से 50 लाख रुपये का निजी बॉन्ड्स जमा करने के लिए कहा है। इसके साथ ही दो गारंटर भी उपलब्ध कराने के लिए कहा है जो उतनी ही राशि जमा करने का भरोसा दिलाएंगे।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने इस किसान नेताओं पर स्थानीय किसानों को भड़काने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। इन छह नेताओं में भारतीय किसान यूनियन (असली) के संभल जिला अध्यक्ष राजपाल सिंह के साथ जयवीर और सतेंद्र उर्फ गंगाफल हैं।

एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘पुलिस रिपोर्ट में कहा गया है कि वे गांवों में किसानों को उकसा रहे हैं, साथ ही झूठी खबरें भी फैला रहे हैं, जिससे इलाके में शांति भंग हो सकती है।’

सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट दीपेंद्र यादव ने इस घटनाक्रम की पुष्टि की। पुलिस द्वारा दाखिल रिपोर्ट के आधार पर ये नोटिस सीआरपीसी की धारा 111 (शांति भंग करने की संभावना वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ मजिस्ट्रेट का आदेश) के तहत जारी की गई।

हालांकि, बीकेयू (असली) प्रदेश युवा अध्यक्ष ऋषभ चौधरी ने कहा कि इतनी बड़ी राशि का नोटिस भेजना सरकार द्वारा उत्पीड़न है। उन्होंने कहा, ‘हम सभी शांतिपूर्वक नए कृषि कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हम सभी के पास गलत के खिलाफ आपत्ति उठाने के अधिकार हैं।’

आरोपों से इनकार करते हुए राजपाल सिंह ने कहा, ‘हम गांव में किसानों के साथ बैठकें कर रहे हैं और उन्हें नए कृषि कानून के बारे में समझा रहे हैं।’

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