5 साल में अडानी एग्री की 21 कंपनियां हुईं पंजीकृत

मोदी के शपथ लेते ही मई 2014 में 5 कंपनियों को मंजूरी

केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के निशाने पर अडानी समूह है। कुछ किसान समूहों ने आरोप लगाया है कि अडाणी समूह ऐसे भंडारण कक्ष तैयार कर रहा है जहां अनाज स्‍टोर करके रखा जाएगा और बाद में उन्‍हें ऊंची कीमत पर बेच दिया जाएगा। हालांकि, अडानी समूह की ओर से आरोपों पर सफाई भी दी गई है। अडानी समूह ने कहा है कि वह न तो किसानों से खाद्यान्न खरीदती है और न ही खाद्यान्न का मूल्य तय करती है।

दरअसल, अडानी एग्री लॉजिस्टिक ( Adani Agri Logistics) के कृषि क्षेत्र में बढ़ते कदम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अगर मिनिस्ट्री ऑफ कॉरर्पोरेट अफेयर्स की वेबसाइट के आंकड़ों को ही देखें तो बीते पांच साल में 21 कंपनियां अस्‍त‍ित्‍व में आईं और मंत्रालय ने इनके नामों को मंजूरी दी। ये सभी कंपनियां अडानी एग्री लॉजिस्टिक नेटवर्क की हैं। साल 2014 से 2018 के बीच अडानी एग्री लॉजिस्टिक लिमिटेड की ये सभी कंपनियां गुजरात में रजिस्टर्ड हुई हैं।

अडानी एग्री लॉजिस्टिक लिमिटेड की कंपनियां- भटिंडा, बरनाला, देवास, होशंगाबाद, कन्नौज, मनसा, मोगा, कटिहार, दरभंगा, समस्तीपुर सतना, उज्जैन जैसे शहरों के लिए रजिस्टर्ड की गई हैं।

मई 2014 के आखिरी हफ्ते में 5 कंपनियों को मंजूरी: वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक मई 2014 के आखिरी हफ्ते में 5 कंपनियों के नाम पर मुहर लगाई गई है। ये वही सप्ताह था, जब पहली बार नरेंद्र मोदी ने देश के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। वहीं, कांग्रेस के कार्यकाल में अडानी एग्री लॉजिस्टिक की दो कंपनियों के रजिस्ट्रेशन को मंजूरी मिली है।

अडानी एग्री लॉजिस्टिक्स के बारे में: अडानी एग्री लॉजिस्टिक्स, खाद्यान्न के थोक हैंडलिंग, भंडारण और वितरण में अग्रणी कंपनी है। भारतीय खाद्य निगम के लिए कंपनी ने 2007 में भारत का पहला आधुनिक अनाज भंडारण इंफ्रास्ट्रक्चर शुरू किया। इसने अनाज का भंडारण करने के लिए मोगा (पंजाब) और कैथल (हरियाणा) में मान्यता प्राप्त अनाज साइलो को लिया। इसके अलावा कंपनी ने मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, कोलकाता और कोयम्बटूर में साइलो की स्थापना की।

दीपक कुमार

जनसत्ता से साभार

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