किसान आन्दोलन : दुनिया के कई देशों में भी हो रहे हैं प्रदर्शन

पंजाबी बुद्धिजीवियों ने लौटाए साहित्य अकादमी अवार्ड

फ्रांस, इटली, इंग्लैंड, जर्मनी, कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड सहित दुनिया के कई मुल्कों में किसानों के समर्थन में और कृषि क़ानूनों के खिलाफ़ लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। दूसरी ओर किसान आंदोलन के समर्थन व कृषि क़ानूनों के विरोध में पंजाब के बुद्धिजीवियों ने भारतीय साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिए हैं।

किसानों की हिमायत में दुनिया भर में प्रदर्शन

विश्व के कई देशों के तमाम बुद्धिजीवी और जनपक्षधर ताक़तें किसान आंदोलन के समर्थन में उठ खड़े हुई हैं। फ्रांस, इटली, इंग्लैंड, जर्मनी, कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड सहित अन्य कई मुल्कों में लगातार किसानों के समर्थन में और कृषि क़ानूनों के खिलाफ़ प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

अमेरिका में तीन बड़ी सिक्ख जत्थेबंदियों ने अमेरिकन गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, सिख कोऑर्डिनेशन कमिटी ईस्ट कोस्ट और वर्ल्ड सिख पार्लियामेंट के सदस्य किसानों की हिमायत कर रहे हैं। संगठनों ने बताया कि 5 दिसंबर को अमेरिका और यूरोप के कई देशों में भारतीय दूतावासों के सामने रोष प्रदर्शन किए गए हैं। जल्द ही भारत में संघर्ष स्थल पर मोबाइल डिस्पेंसरी का प्रबंध किया जा रहा है।

फ्रांस की राजधानी पेरिस में बड़ी तादाद में पंजाबियों ने रोष मार्च में हिस्सा लिया। फ्रांस में बसे पंजाबी भाईचारे और सिख संगठनों ने आज किसानों के हक में नारे लगाए और केंद्र सरकार से किसान विरोधी कानून रद्द करने की मांग की। इस मौके पर फेडरेशन फ्रांस इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशंस ने कहा कि पंजाब का अस्तित्व किसानों पर टिका हुआ है। किसान खत्म हो गए तो पंजाब खत्म हो जाएगा।

इटली के शहर मिलान में भी एकजुट होकर वहां के निवासियों ने किसान संघर्ष को समर्थन दिया। इटली के नौजवानों ने कहा कि संघर्ष के दौरान जिन किसानों की मौत हो गई है, उनके परिवारों की आर्थिक मदद की जाएगी।

कनाडा में बीते रविवार को विंडसर ओंटारियो कनाडा-अमेरिका सरहद के नौजवानों की ओर से किसानों के समर्थन में प्रदर्शन किया गया। इस दौरान सरहद पार कर रहे ट्रक ड्राइवरों ने भी इसमें शामिल होकर इसकी हिमायत की।

फ्रांस के कई संगठन किसानों के समर्थन में उतर आए हैं और भाजपा की केंद्र सरकार की ओर से लागू किए गए किसान विरोधी कानूनों की गूंज पूरे विश्व में फैलने लगी है।

पंजाब के बुद्धिजीवियों ने लौटाए साहित्य अकादमी पुरस्कार

पंजाबी के सिरमौर शायर डॉ. मोहनजीत, प्रसिद्ध चिंतक डॉ. जसविंदर सिंह और पंजाबी के मशहूर नाटककार और ‘पंजाबी ट्रिब्यून’ के संपादक डॉ. स्वराजबीर ने किसान आंदोलन की हिमायत और मोदी सरकार के असंवैधानिक क़ानूनों के विरोध में भारतीय साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिए हैं।

साहित्य अकादमी पुरस्कार पंजाबी - विकिपीडिया

केंद्रीय पंजाबी लेखक सभा के अध्यक्ष दर्शन बुट्टर, सीनियर उपाध्यक्ष जोगा सिंह और महासचिव सुखदेव सिंह सिरसा ने बयान जारी करते हुए कहा है कि पंजाब के किसानों की ओर से कृषि कानूनों के खिलाफ शुरू किया गया यह एक ऐतिहासिक संघर्ष है और तमाम जनवादी संगठन, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता, कलाकार और पत्रकार इस संघर्ष में किसानों के साथ हैं।

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