मध्यप्रदेश : सरकारी अस्पताल में अबतक 8 बच्चों की मौत

पिछले साल भी इसी अस्पताल में 6 बच्चों की हुई थी मौत

मध्य प्रदेश के शहडोल जिला अस्पताल में बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते 72 घंटों के दौरान 8 नवजात बच्चों की रहस्यमयी मौत का मामला सामने आया है। जबकि तीन बच्चों की हालत नाजुक बनी हुई है। अस्पताल ने एम्बुलेंस तक मुहैया नहीं कराया।

ख़बर के मुताबिक कुशभाई ठाकरे जिला अस्पताल में 27 से 30 नवंबर के बीच छह नवजात बच्चों की मौत के बाद 2 और बच्चों की मौत होने से अस्पताल के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) और सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में अबतक 8 बच्चों की मौत चुकी है। इसमें कई बच्चे आदिवासी समुदाय से हैं।

अस्पताल प्रशासन ने नहीं दिया एम्बुलेंस

मौत के मामले बढ़ने से जिला अस्पताल प्रबंधन पर सवाल गंभीर बन रहे हैं। बताया जा रहा है कि वॉर्ड में पर्याप्त वेंटिलेटर नहीं होने के कारण भी दिक्कत आ रही है। वहीं अस्पताल प्रबंधन द्वारा मृतक शिशुओं को ले जाने के लिए एम्बुलेंस देने से मना करने की शर्मनाक घटना भी सामने आई है।

अस्पताल पर लापरवाही का आरोप

पीड़ित परिवारों ने स्पष्ट रूप से अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। शहडोल जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश पांडेय ने आरोप का खंडन किया है। लेकिन वे खुद स्वीकार करते हैं कि अस्पताल के एसएनसीयू में 20 बेड हैं, लेकिन 33 बच्चे भर्ती हैं।

2 बच्चों की हालत नाजुक

जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती 2 और नवजातों की हालत गंभीर बनी हुई है। बताया जा रहा है कि वार्ड में पर्याप्त वेंटिलेटर नहीं होने के कारण भी दिक्कत आ रही है। पीआईसीयू में 8 और एसएनसीयू 33 बच्चे अभी भर्ती हैं।

पिछले साल भी 6 बच्चों की हुई थी मौत

ज्ञात हो कि 11 माह पूर्व भी इस अस्पताल में 24 घंटे के भीतर 6 शिशुओं की मौत हुई थी। तब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी। उस वक़्त सीएमओ और सिविल सर्जन को हटा दिया गया था।

अब भाजपा की सरकार है। लेकिन बदली हुई सरकार व प्रशासन के बावजूद हालात खराब बने हुए हैं।

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