26 नवम्बर : निजीकरण के विरोध में बैंकों में रहेगी हड़ताल

सभी क्षेत्रों में देशव्यापी हड़ताल की तैयारी जोरों पर

सेंट्रल ट्रेड यूनियन के आह्वान पर 26 नवंबर को बैंकों में भी हड़ताल रहेगी। सभी व्यावसायिक और ग्रामीण बैंकों में काम ठप रहेगा। ऑल इंडिया बैंक इंपलाइज एसोसिएशन, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर एसोसिएशन, बैंक इंपलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया और यूनाइटेड फोरम ऑफ ग्रामीण बैंक यूनियन के बैंक कर्मचारी व प्रबंधन हड़ताल में शामिल होंगे।

उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार की तेजी से लागू होती मज़दूर विरोधी नीतियों, निजीकरण, मज़दूर विरोधी श्रम संहिताओं, कॉरपोरेट पक्षीय कृषक बिलों, कोरोना के बहाने श्रमिकों की छँटनी, मनमाने वेतन कटौती आदि के विरोध में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर 26 नवंबर को देशव्यापी हड़ताल की तैयारी पूरी हो गई है। देश की अन्य ज्यादातर यूनियनों व मज़दूर समघों ने इसका समर्थन किया है।

बैंकों की हड़ताल के बीच स्टेट बैंक की यूनियन एनसीबीई और भारतीय मजदूर संघ का बैंक यूनियन नेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ बैंक ऑफिसर्स ने भी हड़ताल का नैतिक समर्थन किया है। इसके बावजूद हड़ताल व्यापक रहेगा।

बैंक यूनियन के नेताओं ने कहा कि सेंट्रल ट्रेड यूनियन की सामान्य मांगों के अतिरिक्त बैंक यूनियनों ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण का प्रस्ताव वापस लेने, बैंकों में जमा राशि पर ब्याज बढ़ाने, कॉरपोरेट घरानों से एनपीए ऋण की वसूली के लिए सख्त कार्रवाई करने, अस्थायी कर्मियों का नियमितीकरण, आउटसोर्सिंग पर प्रतिबंध, खाली पदों पर अविलंब नियुक्ति, 31 मार्च 2010 के बाद योगदान करने वाले बैंककर्मियों के लिए एनपीएस के बजाय पुरानी पेंशन योजना का कार्यान्वयन और ग्रामीण बैंकों में प्रायोजक व्यावसायिक बैंकों के साथ ही 11वें द्विपक्षीय वेतन समझौता को एक नवंबर 2017 के प्रभाव से लागू करने संबंधी 10 सूत्री मांगों को लेकर बैंककर्मी 26 नवंबर को हड़ताल करेंगे।

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