देशभर के 15 लाख बिजलीकर्मी भी 26 को रहेंगे हड़ताल पर

26 नवम्बर को सभी क्षेत्रों में होगी अखिल भारतीय हड़ताल

बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्पलॉईस एन्ड इंजीनियर्स (एनसीसी ओईईई) के आह्वान पर देश के सभी प्रांतों के 15 लाख बिजली कर्मचारी, इंजीनियर केन्द्र और राज्य सरकारों की निजीकरण की नीति के विरोध में सात सूत्रीय माँगों को लेकर 26 नवम्बर को राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहेंगे। उन्होंने उपभोक्ताओं और किसानों से भी समर्थन की अपील की है।

उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार द्वारा लाए गए मज़दूर विरोधी श्रम संहिताओं और निजीकरण के ख़िलाफ़ 26 नवम्बर को देशव्यापी हड़ताल है। इसी के साथ किसान विरोधी 3 कानूनों के ख़िलाफ़ किसानों का 26 व 27 नवम्बर को देशव्यापी प्रदर्शन के साथ दिल्ली कूच का आह्वान है। बिजली कर्मियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल भी उसी का हिस्सा है।

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लखनऊ। ऑल इण्डिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बुधवार को बताया कि कोविड -19 महामारी के बीच केन्द्र सरकार और कुछ राज्य सरकारें बिजली वितरण का निजीकरण करने पर तुली हैं जिससे देश भर के बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा है।

26 नवम्बर को देश भर में बिजली कर्मी विरोध सभाएं प्रदर्शन कर निजीकरण के उद्देश्य से लाये गए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 और बिजली वितरण के निजीकरण के स्टैण्डर्ड बिडिंग डॉकुमेंट को निरस्त करने की मांग करेंगे और निजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह वापस न की गई तो राष्ट्रव्यापी संघर्ष का संकल्प लेंगे।

बिजली कर्मी अपने विरोध में उपभोक्ताओं खासकर किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं से सहयोग करने की अपील कर रहे हैं जिन्हे निजीकरण के बाद सबसे अधिक नुकसान होने जा रहा है। इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट ) बिल 2020 और बिजली वितरण के निजीकरण के स्टैण्डर्ड बिडिंग डॉकुमेंट के अनुसार लागत से कम मूल्य पर किसी को भी बिजली नहीं दी जाएगी और सब्सिडी समाप्त कर दी जाएगी।

भोपाल। मध्य प्रदेश विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन के अध्यक्ष संतोष सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश में विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन के नेतृत्व में समस्त कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल होंगे। राष्ट्रीय स्तर पर निम्न सात मांग सरकार के समक्ष रखी गई है। यदि सरकार के द्वारा इन मांगों को नहीं माना जाता है तो 26 नवंबर को हड़ताल निश्चित होगी।

बिजली कर्मियों की प्रमुख माँगें-

विद्युत संशोधन बिल 2020 तथा स्टेनडरड बिडिंग डॉक्यूमेंट को वापस लिया जाए। ओडीशा सहित समस्त केंद्र शासित राज्यों में निजीकरण को तुरंत रोका जाए। राज्यों में कार्यरत सभी फ्रेंचाइजिस को तत्काल बंद किया जाए। समस्त कर्मचारियों एवं अधिकारियों तथा इंजीनियर के लिए पुरानी पेंशन स्कीम लागू की जाए।

बिजली कंपनियों का एकीकरण कर केरल के केएसईबी लिमिटेड की तरह सभी प्रांतों में एसईबी लिमिटेड का पुनर्गठन किया जाये जिसमें उत्पादन, पारेषण और वितरण एक साथ हों, निजीकरण और फ्रेंचाइजी की सभी प्रक्रिया निरस्त की जाए और चल रहे निजीकरण व फ्रेंचाइजी को रद्द किया जाए।

समस्त संविदा (ठेका तथा आउटसोर्स) कर्मचारियों को नियमित किया जाए। सभी विद्युत मंडलों तथा उनकी उत्तर वृत्ती कंपनियों में रिक्त नियमित पदों को शीघ्र भरा जाए।

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