इंडोनेशिया: श्रम कानूनों में बदलाव के ख़िलाफ़ छात्र और मज़दूर सड़कों पर

मजदूर विरोधी कदम का देशव्यापी प्रतिरोध जारी

इंडोनेशिया की जनता पिछले कुछ दिनों से सड़क पर सरकार द्वारा प्रस्तावित श्रम कानूनों में संशोधन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘ओमनीबस कानून’ से श्रम कानून और पर्यावरण सुरक्षा के प्रावधान कमजोर होंगे।

इंडोनेशिया के जकार्ता, बंदुंग और अन्य शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर पड़े हैं। 8 अक्टूबर को देश भर में पुलिस कार्यवाही में 600 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

5 अक्टूबर को अक्टूबर को इंडोनेशिया की संसद के निचले सदन पीपुल्स रिप्रेजेंटेटिव काउंसिल रोजगार सृजन को खत्म करने वाले कानून के पास करने के साथ देशभर में ट्रेड यूनियनों और छात्रों की तरफ से कड़ा प्रतिरोध दर्ज कराते हुए आंदोलन शुरू हो गए।

इंडोनेशिया के ट्रेड यूनियनों, छात्र समूह और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का संयुक्त मोर्चा जोको विडोडो सरकार द्वारा पारित इस कानून का देशव्यापी विरोध कर रहा है। उधर सरकार का दावा है इस नए कानून के पास होने के बाद रोजगार सृजन के अवसर बढ़ेंगे। यह नया कानून जिसे ‘ओमनी बस कानून’ कहां जा रहा है श्रम, पर्यावरण और निजी निवेश जैसे मामलों से जुड़े करीब 79 कानूनों के बदले लाया गया है।

इस नये कानून से श्रम कानूनों में गंभीर बदलाव होंगे और न्यूनतम वेतन, सवैतनिक अवकाश और छंटनी मुआवजा जैसे प्रावधान खत्म हो जाएंगे। कर्मचारियों को मिलने वाला छंटनी मुआवजा में 40% तक कटौती हो सकती है साप्ताहिक छुट्टी को घटाकर 1 दिन कर दिया जाएगा और सवैतनिक अवकाश पर भी खतरा मंडरा रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि मजदूरों को मिलने वाली न्यूनतम वेतन सुरक्षा खत्म हो जाएगी। इस कानून में इंडोनेशिया के प्रांतीय और क्षेत्रीय राज्यपालों के द्वारा तय किए गए स्थानीय न्यूनतम वेतन के मानदंडों के आधार पर तय की जाने वाले क्षेत्रगत न्यूनतम वेतन के प्रावधान को हटा दिया गया है।

यह कानून पर्यावरण सुरक्षा से संबंधित कई महत्वपूर्ण प्रावधानों सहित प्रदूषित उद्योगों पर अंकुश लगाने वाले कई प्रावधानों को भी खत्म करता है और निजी क्षेत्र के निवेश करने पर रोक वाले क्षेत्रों की संख्या को 300 से घटाकर 6 कर दिया गया है।

विडोडो सरकार ने 90 लाख रोजगार पैदा करने का वादा किया है मगर ट्रेड यूनियनों और कार्यकर्ताओं का समूह इस दावे पर सवाल उठा रहा है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडोनेशियन वर्कर्स यूनियन(KSPI) जोकि एक ट्रेड यूनियन आंदोलन है और करीब 40 लाख मजदूरों का प्रतिनिधित्व करती है, ने संसद द्वारा इस कानून के पास किए जाने के बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है और यह महासंघ इस कानून का विरोध कर रहे संयुक्त समूह की अगुवाई कर रहा है।

फरवरी माह में इस कानून के प्रावधान प्रस्ताव के रूप में पेश होने के बाद से ही ट्रेड यूनियन इसका विरोध कर रही हैं। केएसपीआई और दूसरे आंदोलनों ने ओमनी बस कानून के ऊपर सार्वजनिक चर्चा कराने की मांग उठाई मगर वीडिडो की सरकार ने इस मांग को खारिज कर दिया और सोमवार को मामूली सी चर्चा के बाद इस कानून को पारित कर दिया।

अंतरराष्ट्रीय ट्रेड यूनियन महासंघ ने जिससे केएसपीआई जुड़ी हुई है, इस कानून के पारित होने के बाद अपना बयान जारी करते हुए कहा कि:-

यह काफी आश्चर्यजनक है कि इस वक्त इंडोनेशिया को भी अन्य देशों की तरह कोविड-19 महामारी की वजह से उत्पन्न हुई तबाही से जूझना पड़ रहा है और ऐसे समय में इंडोनेशिया की सरकार द्वारा लोगों के जीवन को अस्थिर और उनके रोजगार को छीनने का प्रयास किया जा रहा है ताकि विदेशी कंपनियां देश को लूट कर मुनाफा कमा सकें।

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