यूपी : निजीकरण के विरोध में राज्यकर्मियों का धरना

50 साल की उम्र अथवा 30 साल की अनिवार्य सेवानिवृत्ति का भी विरोध

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश की जिला इकाई से सम्बद्ध संगठनों ने 18 सूत्री मांगों के समर्थन में बुधवार को कलक्ट्रेट परिसर में धरना दिया। धरने के दौरान राज्य कर्मचारियों ने सीएम को सम्बोधित पत्रक जिलाधिकारी को सौंपकर कार्रवाई की मांग किया। साथ ही चेताया कि यदि हमारे मांगे पूरी नहीं हुई तो हम आंदोलन करने को विवश होंगे।

जनपद शाखा के मंत्री अविनाश सिसौदिया ने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर कराये जाने का अनुरोध शासन से लगातार किया जा रहा है। परिषद का रवैया सदैव शासन के प्रति सहयोगात्मक रहा है। मुख्य सचिव शासन लखनऊ के स्तर से समस्याओं के निस्तारण के सम्बन्ध मासिक बैठक करने के निर्देश दिये गये। उसके उपरान्त भी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विभागाध्यक्षों के स्तर पर कोई बैठक नहीं हो रही है। इससे विभागीय समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।

इप्सेफ व राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा घोषित आन्दोलन के क्रम में निजीकरण पर रोक, 50 साल की उम्र अथवा 30 साल की अनिवार्य सेवानिवृत्ति किए जाने के शिगूफा को लेकर, महंगाई भत्ते की तीन किस्तों को रोके जाने, पुरानी पेंशन बहाली, दिवंगत कोरोना योद्धाओं के परिवार को 50 लाख भुगतान, रिक्त पदो पर भर्ती, आउट सोर्सिंग/ संविदा कर्मचारियों को नियमित नियुक्ति में बरीयता, तथा बोनस के भुगतान आदि मांगे लम्बित हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिव कुमार सिंह व संचालन राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश जनपद शाखा मऊ अध्यक्ष पीएन सिंह ने किया। धरने में डा.सर्फराज अहमद, सतीश सिंह, सुरजन प्रसाद, अमित कुमार राय, अशुतोष शुक्ला, राधेश्याम सिंह, राहुल सिंह, गिरीश दूबे, विनोद सिंह, दुर्गविजय राय, नसीर अहमद, प्रदीप कुमार, चन्द्रमौली, अबूजर अन्सारी आदि शामिल रहे।

लाइव हिन्दुस्तान से साभार

%d bloggers like this: