बेलसोनिका यूनियन ने कि भूख हड़ताल, ठेका मज़दूरो को भी दी सदस्यता

श्रम अधिकारों को ख़त्म करने व लंबित माँगपत्र को लेकर आवाज़ हुई बुलंद

गुडगाँव 15 अक्टूबर। बेलसोनिका ऑटो कॉम्पोनेन्ट इंडिया एम्प्लाइज यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर 8 घंटे की सामूहिक भूख हड़ताल मिनी सचिवालय गुड़गांव में की। भूख हडताल के बाद यूनियन ने ठेका मजदूरो को सदस्यता दी। भूख हड़ताल की मुख्य माँगों में 44 केंद्रीय श्रम कानूनों को खत्म कर 4 श्रम सहिंताओ में घोर मजदूर विरोधी बदलाव ख़त्म करने तथा 20 माह से लंबित सामूहिक मांग पत्रों को हल करने की थी।

बैलसोनिका यूनियन ने दी ठेका मजदूरो को सदस्यता

शासक वर्ग द्वारा मजदूर वर्ग पर किये जा रहे हमलो का केवल एक ही जबाव है कि मजदूर खुद को वर्ग के तौर पर लामबंद करे। स्थाई और ठेका का विभाजन मजदूरो का खून चूसने उनकी एकता को खण्डित करने के लिए पूँजीपतियो ने किया है। हम इस विभाजन को नही मानते की घोषणा के साथ बैलसोनिका यूनियन ने आज की भूख हडताल के बाद ठेका मजदूरो को सदस्यता दी।

यूनियन ने सभी मजदूरो को वर्गीय एकजुटता का आह्वान किया। गुडगांव मे ठेका प्रथा के बाद ये पहला मौका है जब ठेका और स्थाई मजदूर को एक यूनियन मे संगठित किया गया है।

4 श्रम संहिताएँ मज़दूरों के साथ बड़ा धोखा

वक्ताओं ने कहा कि 4 श्रम सहिंताओ में घोर मजदूर विरोधी बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने मजदूरों को हड़ताल करने के कानूनी अधिकार को सीमित करते हुए पूर्व श्रम कानूनों में 15 दिन पूर्व हड़ताल के नोटिस को बदलकर 60 दिन हड़ताल से पूर्व नोटिस देने का प्रावधान कर दिया गया।

नई श्रम सम्बन्ध संहिता में अगर यूनियन का कोई डिस्प्यूट पेंडिंग हैं तो मजदूर यूनियन हड़ताल नही कर सकती हैं। अगर हड़ताल गैर कानूनी घोषित हो जाती हैं तो मजदूर व मजदूर यूनियन पर 50 हजार से 2 लाख रुपए तक का जुर्माने व जेल का प्रावधान किया गया हैं। हड़ताल का समर्थन करने वाले व्यक्ति व समूह पर भी इन्ही जुर्माने व जेल का प्रावधान किया गया है।

छंटनी व तालाबंदी की कानूनी सीमा 100 मज़दूरों से बढाकर 300 कर दी गई है। स्थाई रोजगार पर फिक्स टर्म एम्प्लॉयमेंट के तहत मजदूर कार्य पर रखे जायेंगे। एक तरीके से रखो व निकालो की खुली छूट पूँजीपतियों को देने के साथ साथ ट्रेड यूनियन आन्दोलन का अपराधिकरण करने की साजिश है।

वक्ताओं ने कहा कि ये भी सुनने में आया है कि स्थाई नौकरियों को फिक्स टर्म में बदलने का भी प्लान किया जा रहा है। इन मजदूर विरोधी श्रम सहिंताओ का बेलसोनिका यूनियन विरोध करती है।

20 माह से लंबित माँगपत्र, कोरोना बना बहाना

कोरोना महामारी को अवसर में तबदील करते हुए बेलसोनिका प्रबंधन ने 20 माह से लम्बित बेलसोनिका के स्थाई व अस्थाई मजदूरों के मांगपत्र को करोना महामारी के नाम पर घाटे का नाम लेकर हल करने से मना कर रहा है। महामारी का पूरा भार मजदूरों पर डालने पर उतारू हैं, वेतन भत्तों में कटौती से लेकर ठेका श्रमिकों को करोना महामारी के दौरान बहार निकाला गया। लंबित मांगपत्र को हल करने की बजाय प्रबंधन श्रम विभाग से मिलकर कोरोना की आड़ में वापस उठाने का दबाव बना रहा है।

मांगपत्र के चलते प्रबंधन फैक्ट्री के अंदर तरह-तरह से षड्यंत्र कर उकसावेपूर्ण कार्यवाही कर रहा है। कैंटीन के खाने में मीनू को मनमर्जी से बदलकर व कम बनवाकर मजदूरों को भूखा रहने पर मजबूर कर रहा है। मजदूरों को बिना किसी कारण ट्रान्सफर करना, मजदूरों के साथ बदले की भावना से काम करना आदि उकसावेपूर्ण कार्यवाही कर रहा है। यहां तक कि प्रबंधन सत्यापित स्थायी आदेशों में संशोधन करके मजदूर विरोधी बदलावों का फायदा उठाकर स्थायी नौकरियों पर हमला करने कि तयारी में है।

आन्दोलन होगा और तेज

बेलसोनिका यूनियन घोर मजदूर विरोधी 4 श्रम संहिताओं व 20 माह से लम्बित मांगपत्र को लेकर आज की भूख हड़ताल के बाद योजना बनाकर आगामी लड़ाई लड़ेंगे।

इस भूख हड़ताल में बेलसोनिका यूनियन के पदाधिकारी अतुल कुमार, जसबीर सिंह, अजित सिंह, मोहिंदर कपूर, मुकेश कुमार, राजपाल, राजेश कुमार व अरविन्द कुमार शामिल थे व बेलसोनिका के सारे मजदूर अपनी शिफ्टों के हिसाब से इस भूख हड़ताल में शामिल हुए।

इलाके कि कई यूनियनें भी रहीं समर्थन में

भूख हड़ताल के समर्थन में मारुति यूनियन गुड़गांव, मारुति यूनियन मानेसर, पॉवर ट्रैन यूनियन मानेसर, सुजुकी बाइक यूनियन खेड़की दौला, FMI यूनियन मानेसर, रिको यूनियन धारूहेड़ा, हेमा यूनियन गुड़गांव, सत्यम यूनियन मानेसर, मुंजाल शोवा यूनियन मानेसर, एटक से अनिल पवार, इमके से श्यामवीर, रोहित व योगेश, मुकु यूनियन के पूर्व महासचिव कुलदीप जांघू, AIUTIUC से राम कुमार, CITU से सतवीर, आशा वर्कर्स- मिड डे मील की ओर से सरोज, PTI टीचर 1983 की ओर से यूनियन नेता आदि शामिल हुए।

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