स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन

फर्जी आरोपों में गिरफ्तार स्टेन स्वामी के पक्ष में उठी देश और दुनिया में आवाज़

झारखंड के मानवाधिकार कार्यकर्ता, आदिवासियों और समाज के अन्य वंचित वर्गों के लिए काम करने वाले फादर स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी को लेकर देश ही नहीं दुनिया के तमाम हिस्सों से विरोध की आवाज उठ रही है। इसके साथ ही झारखंड में कई जगहों पर इस गिरफ्तारी के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी कड़ी में रांची में मानव श्रृंखला बनाकर इस गिरफ्तारी का विरोध हुआ।

गिरफ्तारी की निंदा

पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) ने स्वामी की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए बयान जारी किया है। बयान में पीयूसीएल के सदस्यों ने कहा है कि वे स्वामी की हिरासत और उनकी गिरफ्तारी से अचंभित हैं और इसकी निंदा करते हैं।

झारखंड और देश भर के अनेक जन संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं समेत 2000 लोगों ने एक संयुक्त वक्तव्य जारी कर 8 अक्टूबर 2020 को एनआईए द्वारा स्टेन स्वामी की गिरफ़्तारी की कड़ी निंदा की है और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस गिरफ़्तारी का विरोध करने का आग्रह किया है। वक्तव्य जारी करने वालों सामाजिक और सियासी संगठनों के साथ ही तमाम बुद्धिजीवी, लेखक और सिविल सोसायटी के लोग शामिल हैं।

स्टेन स्वामी के पक्ष में उठी देश और दुनिया में आवाज, गिरफ्तारी को बताया मानवाधिकारों का उल्लंघन

विभिन्न संगठनों का संयुक्त बयान

इस संयुक्त वक्तव्य में कहा गया है कि स्टेन स्वामी की गिरफ़्तारी मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों का व्यापक उल्लंघन है। हम, विभिन्न जन संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता, फर्जी भीमा कोरेगांव केस में झारखंड में आदिवासियों और जल, जंगल, जमीन तथा विस्थापन के विरोध में दशकों से शांतिमय रूप से सक्रिय 84 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता स्टेन स्वामी की एनआईए द्वारा 8 अक्टूबर 2020 की शाम को भीमा-कोरेगांव मामले में हुई गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हैं।

स्टेन से उनके आवास स्थान, बगईचा में, पांच दिनों (27-30 जुलाई और 6 अगस्त) तक कुल 15 घंटे पूछताछ की गई थी। स्टेन ने एनआईए द्वारा प्रस्तुत विभिन्न दस्तावेजों का, जो इनके माओवादियों के साथ जुड़ाव को इंगित कर रहे थे, का पूर्ण खंडन किया और कहा कि दस्तावेज़ फ़र्ज़ी रूप से उनके कंप्यूटर में डाले गए हैं। कोविड 19 महामारी के दौरान एनआईए द्वारा एक 84 वर्षीय व्यक्ति, जिन्हें कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं हैं, की गिरफ़्तारी अमानवीय है।

स्टेन लगातार राज्य के आदिवासियों एवं मूलवासियों के हक़ में आवाज उठाते आए हैं। उन्होंने विस्थापन, कॉरपोरेट द्वारा संसाधनों की लूट और विचाराधीन कैदियों की स्थिति पर बेहद शोधपरक काम किया है। वे झारखंड की भाजपा सरकार द्वारा सीएनटी-एसपीटी कानून एवं भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 में हुए जन विरोधी संशोधनों का लगातार मुखरता से विरोध करते आए हैं।

उन्होंने रघुवर दास सरकार द्वारा गांव की जमीन को लैंड बैंक में डालकर कॉरपोरेट के हवाले करने की भी जमकर मुखालफत की थी। वे लगातार संविधान की पांचवी अनुसूची एवं पेसा कानून के क्रियान्वयन के लिए भी अभियान करते आए हैं। वक्तव्य में कहा गया है कि हम स्टेन को विशेष कर एक सज्जन, ईमानदार और जनहित में काम करने वाले इंसान के रूप में जानते हैं। हमारे मन में उनके लिए और उनके काम के लिए सर्वोच्च्च सम्मान है।

हमारी स्पष्ट मान्यता है कि भीमा कोरेगांव केस मोदी सरकार द्वारा प्रायोजित एक आधारहीन और फर्जी मुकदमा है। इस केस का उद्देश्य सिर्फ देश के शोषितों- वंचितों के हक की बात करने वाले और सरकार की जन-विरोधी नीतियों पर सवाल करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को सबक सिखाना है। मोदी सरकार पूरी तरह जनविरोधी और कॉरपोरेट परस्त है। जनता के हक की बात करने वाले हर व्यक्ति को मोदी सरकार अपना दुश्मन मानते हुए किसी भी स्तर तक जाकर षड़यंत्र कर सकती है।

इसी षड़यंत्र के तहत झारखंड के शोषितों की आवाज स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी हुई है। यह केवल एक व्यक्ति की गिरफ़्तारी नहीं बिलकुल झारखंड में मानवाधिकार और संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले सब पर हमला है।

फादर स्टेन स्वामी. (फोटो: पीटीआई)

मोदी सरकार का प्रतिशोध और दमन जारी

उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार बड़े ही शातिराना तरीके से नीतिगत विरोधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, लेखकों, पत्रकारों का लगातार दमन कर रही है और सच का गला घोंटने के लिए सत्ता का खुलेआम दुरुपयोग कर रही है। असहमति कि आवाज़ को दबाने के लिए भीमा कोरेगाँव दमन चक्र से लेकर गैर संवैधानिक सीएए विरोधी ताक़तों की गिरफ्तारियां लगातार जारी है।

ताजा घटना सामाजिक कार्यकर्ता स्टेन स्वामी कि गिरफ़्तारी के रूप में आई है। स्वामी को एल्गार परिषद मामले में चल रही कथित जाँच के तहत उत्पीडित किया गया। वह जून 2018 के बाद से इस मामले में गिरफ्तार किए गए 16वें शख्स हैं।

इस मामले में गिरफ्तार अन्य लोगों में लेखक और मुंबई के दलित अधिकार कार्यकर्ता सुधीर धावले, गढ़चिरौली के युवा कार्यकर्ता महेश राउत, नागपुर यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी साहित्य विभाग की प्रमुख रहीं शोमा सेन, वकील अरुण फरेरा और सुधा भारद्वाज, लेखक वरवरा राव, कार्यकर्ता वर्नोन गॉजाल्विस, अधिकार कार्यकर्ता रोना विल्सन, यूएपीए विशेषज्ञ और वकील सुरेंद्र गाडलिंग, दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हेनी बाबू और कबीर कला मंच के कलाकार सागर गोरखे, रमेश गाइचोर और ज्योति जगताप शामिल हैं।

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