प्रतिभा सिंटेक्स के मज़दूरों की हाई कोर्ट से शानदार जीत

मार्च, 2018 से 2000 मज़दूर लगातार हैं संघर्षरत

पीथमपुर (मध्यप्रदेश)। करीब ढाई साल से संघर्षरत गारमेंट फैक्ट्री प्रतिभा सिंटेक्स लिमिटेड के मज़दूरों को अंततः बड़ी जीत मिली है। उच्च न्यायलय ने इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल के आदेश बरकरार रखते हुए बिना बंध पत्र भराए सिर्फ शपथ पत्र भरकर काम पर वापस रखने का आदेश दिया और पूर्व वेतन की सुनवाई वापस कोर्ट खुलने पर तुरंत करने की बात कही।

शोषण के ख़िलाफ़ मज़दूरों ने उठाई थी आवाज़, हुए दमन के शिकार

पिछले 20 वर्षों से पीथमपुर में टेक्सटाइल उद्योग मे एक नामी एक्सपोर्ट यूनिट है। जिसमें धागे से लेकर गारमेंट्स बनाने तक का सम्पूर्ण कार्य किया जाता है। 1997 में एक प्लांट से शुरू हुए उद्योग के वर्तमान में 6 प्लांट हो चुके है।

इस विकास के बाद भी कंपनी के श्रमिक 7000 से लेकर 9000 में ही अपना जीवन यापन करने को मजबूर है। दिन प्रतिदिन बढ़ती महंगाई और कम तनख्वाह से त्रस्त करीब 2000 श्रमिको ने कोई श्रमिक यूनियन ना होने के कारणवश अपने प्रतिनिधि चुनकर माँग पत्र श्रम अधिकारी को दिनांक 03/03/18 को दिया।

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मज़दूरों की बर्खास्तगी और अवैध तालाबंदी

इस दौरान कपनी द्वारा 76 श्रमिको को बिना किसी घरेलु जाँच के सिर्फ बदले की कार्यवाही करते हुए जून माह में बर्खास्त कर दिया गया एवं 2000 श्रमिकों को लॉक आउट कर दिया गया।

इस अन्यायपूर्ण कारवाही के सामने श्रमिको ने सर झुकाने के बजाए संघर्ष का रास्ता चुना और दिनांक 01/07/2018 से सड़क और न्यायालय में  संघर्ष शुरू किया।

पीथमपुर, प्रतिभा सिंटेक्स में श्रमिकों की हड़ताल जारी I By Amit Trivedi -  YouTube

बंध पत्र व शपथ पत्र के ख़िलाफ़ नया संघर्ष

07/07/2018 को प्रतिभा सिंटेक्स प्रबंधन द्वारा उनके प्लांट 2 और 4 को बदनीयत से बंद कर दिये गया। मज़दूरों ने गुलामी की जंजीरों को चुनने की जगह संघर्ष के रास्ते को चुना। जिससे डर कर प्रबंधन ने कुछ ही दिनों में कंपनी फिर शुरू कर दी लेकिन एक शर्त लगा दी कि मज़दूरों को एक बंध पत्र और शपथ पत्र भर कर आना होगा। शपथ पत्र भरने को मज़दूरों स्वीकार किया, लेकिन बंध पत्र मज़दूरों को मंजूर नहीं था।

मज़दूर विरोधी उक्त बंध पत्र में कंपनी बंदी को हड़ताल स्वीकारने, जिसकी वजह से हमें नुकसान होने और इस गैरजिम्मेदाराना कृत्य के कारण नौकरी से भी निकालने जैसी बातें थीं।

अवैध तालाबंदी को हड़ताल बनाने की साजिश

कंपनी यह बंध पत्र इसलिए भरवाना चाहती थी कि उसने प्लांट नंबर 2 और 4 बिना श्रम कानूनों का पालन किए बंद कर दी थी जिसकी शिकायत श्रम विभाग में मज़दूरों द्वारा की गई थी।

प्रबंधन बंध पत्र के बहाने कंपनी की अवैध बंदी को मज़दूरों की हड़ताल साबित करना चाहती थी। इस साजिश को मज़दूरों ने समझा और बंध पत्र को भरने से मना कर दिया।

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मज़दूरों ने चुना संघर्ष का रास्ता

ऐसे में मज़दूरों ने फिर संघर्ष का रास्ता अपनाया और जमीनी लड़ाई के साथ इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल के समक्ष वाद चलाया। कंपनी को मालूम था की वो गलत है तो उसने भागना शुरू किया। पहले कंपनी भागी माननीय हाई कोर्ट की सिंगल बेंच, वहा बड़े बड़े वकील खड़े करके कोर्ट को गुमराह करके स्टे ले लिया, लेकिन माननीय हाई कोर्ट ने अंत में मज़दूरों के पक्ष में ही आदेश सुनाया।

कंपनी द्वारा सिंगल बेंच के इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट की डबल बेंच में रिट अपील दायर की गई, लेकिन बेंच द्वारा सिंगल बेंच के आदेश को यथावत रख अपीलार्थी की प्रार्थना को अस्वीकार किया गया। कंपनी को मुंह की खानी पड़ी।

ट्रिब्यूनल का फैसला मज़दूरों के हक़ में

उसके बाद इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल ने 16/05/2019 को मज़दूरों के पक्ष में आदेश सुनाया की मज़दूरों से बंध पत्र नहीं भराया जा सकता, सिर्फ शपथ पत्र भरवाया जाए जिसके लिए मज़दूर शुरू से ही राजी थे और साथ में पूरा 07/07/2018 से वेतन दिया जाए।

कोविड-19 में मज़दूरों का संकट गहराया, लेकिन मिली जीत

इस आदेश के ख़िलाफ़ कंपनी फिर हाई कोर्ट भागी। लड़ाई चल ही रही थी कि कोविड-19 महामारी के कारण कोर्ट बंद हो गए। ऐसे में संघर्षरत प्रतिभा सिंटेक्स के मज़दूरों की परेशानी बहुत बढ़ गई, कई मज़दूरों के पास राशन तक नहीं बचा।

संकटग्रस्त मज़दूर सुप्रीम कोर्ट गए। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को निर्देशित किया कि वे मज़दूरों को सुने। ऐसे में हाई कोर्ट ने सुनवाई की और 22/08/2020 को ट्रिब्यूनल के आदेश अनुसार बिना बंध पत्र भराए सिर्फ शपथ पत्र भरकर काम पर वापस रखने का आदेश दिया और पूर्व वेतन की सुनवाई वापस कोर्ट खुलने पर तुरंत करने की बात कही।

इस जीत में वकीलों व यूनियनों की अहम भूमिका

प्रतिभा सिंटेक्स के श्रमिकों की इस जीत में अधिवक्ता बी एल नागर, मोहन निमजे, धर्मपाल अधिकारी, सर्यवंशी एवं पीथमपुर की अधिकांश यूनियनों की अहम भूमिका रही।

इस जीत ने यह फिर दिखलाया कि मज़दूर अपने हक़ की लड़ाई लड़ सकता है और जीत भी सकता है वो भी कम समय में बस जरूरत है तो मज़दूरों की एकता की और एक दूसरे के साथ की।

इंदौर से अधिवक्ता विजय शर्मा की रिपोर्ट

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