शहीदे आज़म भगतसिंह से प्रेरणा लो, दमन के खिलाफ आवाज़ बुलंद करो!

शहीदे आज़म की जयंती पर रुद्रपुर, लुधियाना, कुरुक्षेत्र, गोहाना, गुडगाँव में विविध कार्यक्रम

शहीदे आज़म भगत सिंह के 114वे जन्मदिवस पर पूरे देश में विविध कार्यक्रम हुए और उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प बाँधा गया। इसी के साथ मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं सहित सभी जनविरोधी क़ानूनों को वापस लेने व दमनकारी नीतियों पर लगाम लगाने की माँग हुई।

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उत्तराखंड

बहरे कानों तक आवाज़ पहुँचाने के लिए बम के धमाकों की ज़रुरत

  • भगत सिंह के अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प
  • लेबर कोडो के खिलाफ आवाज़ हुई बुलंद
  • मजदूर नेता शंकर गुहा नियोगी को शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि

रुदपुर (उत्तराखंड) 28सितंबर। रुद्रपुर के भगत सिंह चौक में श्रमिक संयुक्त मोर्चा द्वारा प्रतिवाद प्रदर्शन के साथ संकल्प सभा का आयोजन हुआ। भगत सिंह के विचारों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने के संकल्प के साथ मज़दूर विरोधी लेबर कोड को निरस्त करने की माँग बुलंद हुई। इसी के साथ मज़दूर नेता कॉमरेड शंकर गुहा नियोगी के शहादत दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

वक्ताओ ने शहीदे आज़म भगत सिंह के रास्ते पर चलते हुए मज़दूर एकता बनाने का आह्वान किया और कहा कि भगत सिंह के विचार ही जाति-धर्म की लड़ाई से मुक्ति दिला सकती है, तभी मज़दूरों किसानो की समस्याओं का समाधान सम्भव है।

ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार ने 44 श्रम कानून को ख़त्म कर 4 लेबर कोडो को संसद से पारित कर दिया है। महज 2 दिन में लेबर कोडो को लोकसभा व राज्य सभा से पारित कर अपना मज़दूर विरोधी चेहरा और नंगा किया है। लेबर कोड मज़दूरों का प्रोटेक्शन खत्म कर रहा है। मजदूरों को बंधुवा काम के हालतों में धकेल रहा है। लेबर कोडो से मालिकों की मनमर्जियां व हायर एन्ड फायर बढ़ जाएगा।

सभा मे मोदी सरकार से लेबर कोडो के वापसी की माँग बुलन्द हुई। साथ ही किसान बिल की वापसी, बेरोजगार को 10 हजार रु भत्ता दिए जाने आदि की मांग का समर्थन किया गया।

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संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश तिवारी के संचालन में हुई संकल्प सभा को एक्टू प्रदेश महामंत्री के के बोरा, मज़दूर सहयोग केंद्र के संरक्षक मुकुल, इंकलाबी मज़दूर केंद्र के दिनेश चंद्र, मासा के सुरेन्द्र, नेस्ले कर्मचारी संगठन के ऋषिपाल सिंह, राकेट रिद्धी सिद्धि कर्मचारी संघ के धीरज जोशी, इंट्रार्क यूनियन के विशाल, सनसेरा यूनियन के नरेद्र बानी, डेल्टा के विद्यासागर,  निर्माण मज़दूर यूनियन के उत्त्तम दास, एलजीबी के गोविंद सिंह आदि ने संबोधित किया।

नेस्ले में प्रदर्शन

पंतनगर नेस्ले इण्डिया के मजदूरों ने नेस्ले मजदूर संघ व नेस्ले कर्मचारी संगठन के नेतृत्व में शहीदे आज़म भगत सिंह को याद किया और शिफ्ट छूटने के बाद यूनियन झंडों के नीचे जमकर नारेबाजी की।

पंजाब-

शहीद भगतसिंह के जन्मदिवस पर समागम का आयोजन

लुधियाना। 27 सितम्बर की शाम महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह के जन्म की वर्षगाँठ के अवसर पर आज कारखाना मज़दूर यूनियन द्वारा ग्यासपुरा के गुरपाल नगर में समागम किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि शहीद भगत सिंह को याद करने का असल अर्थ उनके सपनों के लूट-खसूट से मुक्त समाज के निर्माण के लिए कोशिशें तेज़ करना है।

नौजवान भारत सभा की टीम ने मज़दूरों-मेहनतकशों के दुखों-दर्दों की पेशकारी करता नाटक ‘गढ्ढा’ और अनेकों क्रांतिकारी गीत पेश किए।

समागम के दौरान कारखाना मज़दूर यूनियन के नेताओं लखविंदर, आरजू खान और विमला ने तथा मोल्डल एंड स्टील वर्कर्ज यूनियन के नेता हरजिंदर सिंह ने भी संबोधित किया।

वक्ताओं ने कहा कि शहीद भगतसिंह का जन्मदिन मनाना एक रस्म अदायगी नहीं है। आज देश के मज़दूरों, मेहनतकशों, नौजवानों को जिन भयंकर हालातों से गुजरना पड़ रहा उनमें भगतिसंह को याद करना बेहद ज़रूरी है। भगतसिंह की लड़ाई महज विदेशी हकूमत के खिलाफ नहीं थी बल्कि देशी शोषक वर्गों के खिलाफ भी थी। यह स्पष्ट है कि वे भारत में मज़दूरों-मेहनतकशों का राज चाहते थे न कि पूँजीवाद।

सन् 1947 के बाद देश की हकूमत पर पूँजीपतियों के हुए कब्जे का ही नतीजा है कि आज देश की अस्सी फीसदी आबादी गरीबी-बदहाली की असहनीय परिस्थितियों का सामना कर रही है। लोकतंत्र महज नाम के लिए है, वास्तव में यहाँ लूटतंत्र है। इस लूटतंत्र के खात्मे के लिए आज जरूरी है कि मज़दूर-मेहनतकश-नौजवान जागें, एकजुट हों और क्रान्तिकारियों के सपनों का समाजवादी-लोकराज्य कायम करने के लिए संघर्ष करें। इसलिए आज शहीद भगतसिंह के विचारों और कुर्बानी से प्रेरणा लेनी होगी।

वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा मोदी हुकूमत जनआवाज़ को अनसुना करते हुए बेहद जनविरोधी नए श्रम, बिजली और श्रम कानून लागू करने की तैयारी कर रही है। इससे पहले जी.एस.टी., नोटबंदी, नागरिकता संशोधन कानून, नागरिक रजिस्टर व आबादी रजिस्टर जैसे घोर जनविरोधी कदम उठाए गए हैं। मोदी रोज में जनता पर आर्थिक, राजनीतिक, समाजिक हमला बेहद तेज़ हुआ है।

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मज़दूरों-मेहनतकशों, अल्पसंख्यकों, दलितों, राष्ट्रीयताओं, स्त्रियों पर जुल्मों-सित्म पहले से कहीं अधिक तेज़ हो चुके हैं। मज़दूरों-मेहनतकशों को मज़बूत आन्दोलन के निर्माण के जरिए फासीवादी हुक्मरानों की इन घोर जनविरोधी नीतियों का मूँह तोड़ जवाब देना होगा।

हरियाणा

जन सभा व जुलूस का आयोजन

कुरुक्षेत्र। शहीद -ए-आज़म भगतसिंह के 114वें जन्मदिवस के अवसर पर स्थानीय शहीद भगत सिंह दिशा संस्थान में स्थित शहीद भगत सिंह की प्रतिमा पर शहीद भगत सिंह दिशा ट्रस्ट व जन संघर्ष मंच हरियाणा के पदाधिकारियों व चुनिंदा कार्यकर्ताओं ने माल्यार्पण करके श्रद्धांजलि अर्पित की और संस्थान परिसर में जनसभा हुई।

जनसभा के बाद शहीद भगत सिंह दिशा संस्थान से पुराने बस अड्डे तक जुलूस निकाला गया और शहीद भगत सिंह के इन्कलाबी रास्ते पर चलने का संकल्प लिया गया।

जनसभा की अध्यक्षता मंच के राज्य प्रधान कामरेड फूल सिंह और मंच संचालन कामरेड सुरेश कुमार ने किया। मुख्य वक्ता शहीद भगत सिंह दिशा ट्रस्ट के अध्यक्ष कामरेड शयामसुंदर रहे। उन्होंने कहा कि 28 सितंबर, 1907 को हमारे देश की आजादी के आंदोलन में मेहनतकश जनता के प्रतिनिधि शहीद भगतसिंह का जन्म गांव बंगा, जिला लायलपुर (जो अब पाकिस्तान में है) में हुआ था।

कहा कि भगतसिंह ने आजादी के आंदोलन के दौरान सवाल उठाया था कि अंग्रेजों के चले जाने के बाद राज किसके हाथ में जाए- महात्मा गांधी के नेतृत्व में पूँजीपतियों के हाथ में या मज़दूर किसान के हाथ में। उन्होंने रूसी समाजवादी क्रांति से समझ लिया था कि भारत में मेहनतकश जनता को शोषण दमन से छुटकारा मार्क्स के सिद्धांतों के आधार पर गठित इन्कलाब के जरिये ही हो सकता है। भगत सिंह ने समाज को बदलने वाले मार्क्स द्वारा खोजे गये वैज्ञानिक नियमों को आत्मसात कर लिया था।

उन्होंने कहा कि हम देखते हैं कि 15 अगस्त 1947 को देश की सत्ता पूँजीपति वर्ग हथिया गया और जिसका परिणाम हम आज भुगत रहे हैं। पूँजीपति वर्ग स्वर्ग का जीवन जी रहा है और दूसरी तरफ करोड़ों-करोड़ मेहनतकश लोग नारकीय जीवन में धकेल दिये गये हैं।

मौजूदा भाजपा सरकार ने तो कोरोना जैसी महामारी को भी पूँजीपति वर्ग के हितों को पूरा करने के अवसर में बदल दिया है। महामारी की आड़ लेकर सरकार ने संवैधानिक प्रक्रिया को भी ताक पर रखकर कारपोरेट पूँजी के हित में मज़दूर व किसानों के खिलाफ कानून पास कर दिये हैं। दिल्ली दंगों ने दिखा दिया है कि मोदी सरकार के राज में कानून कैसे काम कर रहा है- पीड़ित लोगों को ही दोषी बनाकर जेलों में ठूंसा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आज देश में जनवादी मूल्यों को कायम रखने व मेहनतकश जनता को पूँजीवादी शोषण दमन से मुक्ति दिलाने तथा सांप्रदायिक दंगों का खात्मा व जातीय अत्याचारों का अंत करने के लिए शहीद भगत सिंह के इन्कलाबी रास्ते पर आगे बढ़ना होगा और इसके लिए सही क्रांतिकारी पार्टी का गठन करना होगा।

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एसओएसडी की नेता कविता विद्रोही ने शहीद भगत सिंह के जीवन संघर्ष पर विस्तार से बात रखी। उन्होंने शिक्षा के ढांचे को बर्बाद करने वाली नई शिक्षा नीति का भी विरोध किया।

मनरेगा मज़दूर यूनियन के प्रधान कामरेड पाल सिंह ने कहा कि आज सारे पूँजीवादी देश आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। बेरोजगारी बढ़ रही है। कोरोना महामारी के समय में भी संकट का सारा बोझ मेहनतकश जनता के कंधों पर डाला जा रहा है। मज़दूर किसान विरोधी कानून बनाकर मेहनतकश जनता पर हमला किया जा रहा है। आज शहीद भगत सिंह के विचार ही हमारे संघर्ष का मार्गदर्शन करते हैं।

मंच की महासचिव कामरेड सुदेश कुमारी ने पिपली में किसानों पर और चरखी दादरी में पीटीआई शिक्षकों पर किये गए लाठीचार्ज की निंदा करते हुए कहा कि कारपोरेट पूँजी के हित में किसान विरोधी कानून पास किये गए हैं। उन्होंने सांप्रदायिक जहर उगलने वाले भाजपा नेताओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि आज शहीद भगत सिंह के विचार सांप्रदायिक ताकतों का विनाश करने के लिए प्रासंगिक हैं।

सभा के अध्यक्ष कामरेड फूल सिंह ने सभा में आए हुए सभी लोगों का क्रांतिकारी धन्यवाद करते हुए शहीद ए आजम भगत सिंह के इन्कलाबी रास्ते पर चलने का संकल्प लेने को कहा। उन्होंने कहा कि जन संघर्ष मंच हरियाणा मोदी सरकार की मज़दूर किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ अपने स्तर पर और अन्य प्रगतिशील संगठनों के साथ मिलकर डटकर विरोध कर रहा है।

जनसभा को मंच सचिव कामरेड सोमनाथ ने भी संबोधित किया।

कार्यक्रम के साथ भगतसिंह व साथियों के दस्तावेज़ जारी

गोहाना (सोनीपत)। जन चेतना मंच, जन संघर्ष मंच हरियाणा और समतामूलक महिला संगठन द्वारा शहीद भगत सिंह के 114 वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में गोहाना में प्रदर्शन और जनसभा हुई।

कामरेड प्रेम चंद (IPSEF के राष्ट्रीय महासचिव) मुख्य वक्ता थे। अध्यक्षता नरेश विरोदिया ने की। डॉ सुनीता त्यागी ने देखरेख की।

कार्यक्रम के तहत गोहाना रेलवे स्टेशन से शहर में जुलूस निकालते हुए शहीद भगत सिंह पार्क में जनसभा हुई। सभा को रघुवीर विरोधिया, रमेश सैनी, सूरजभान, सत्यपाल, वीरमति, अशोक जांगड़ा, रामनिवास, साधु राम, श्याम, प्रदीप, संदीप, राजेश, देवेंद्र, अशोक, तेज प्रताप, सुमित, शांति, रेनू मूर्ति, सुरेंद्र खेड़ा, डॉ राजीव, कृष्ण मान, रंजीत रावत, प्राची व साची ने भागेदारी की।

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इस अवसर पर ‘इनक्लाब का रास्ता : शहीद भगत सिंह और उनके साथियों के क्रान्तिकारी दस्तावेज़‘ पुस्तक जारी हुई।

लाल फीता आन्दोलन के साथ भगतसिंह को याद किया

गुडगाँव। भगतसिंह जयंती पर बेलसोनिका यूनियन ने भगतसिंह को माल्यार्पण की। यूनियन द्वारा मजदूर (श्रम) विरोधी 4 सहिंताओ व कृषि विरोधी 3 अध्यादेशों के विरोध में चलाए गए लाल फीता आन्दोलन में बेलसोनिका यूनियन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लाल फीता आन्दोलन में साथ देते मारुति सुजुकी गुड़गांव व मुंजाल शोवा गुड़गांव के साथी भी शामिल रहे।

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