सीबीएसई : दिल्ली में दलित छात्रों की फीस 5 गुना बढ़ी

Bhopal: Students wearing protective masks appear in the higher secondary school examinations of Madhya Pradesh Board of Secondary Education, during the fifth phase of ongoing COVID-19 lockdown, in Bhopal, Tuesday, June 9, 2020. (PTI Photo) (PTI09-06-2020_000030B)

50 रुपए की बोर्ड फीस 2100 रुपए हुई

नई दिल्लीः दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया कोरोना संक्रमित हैं और एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं, यही वजह है कि वह छात्रों की शिकायतें सुनने के लिए उपलब्ध नहीं हैं.केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने पिछले साल आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए रजिस्ट्रेशन फीस 24 गुना बढ़ाते हुए 50 रुपये से बढ़ाकर 1,200 रुपये कर दी थी, जबकि सामान्य श्रेणी के छात्रों के लिए इसे पिछले साल 750 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दिया गया था.

उस समय सिसोदिया ने घोषणा की थी कि बोर्ड परीक्षाओं में बैठ रहे सभी छात्रों पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार का वहन दिल्ली सरकार करेगी.परीक्षा शुल्क में हुई इस वृद्धि से हलचल तो हुई थी लेकिन यह तुरंत शांत भी हो गई.बहरहाल, यह साल अलग है. राज्य सरकार घाटे में चल रही है. दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने सर्कुलर जारी कर स्कूलों से सीबीएसई परीक्षाओं के लिए शुल्क के भुगतान के लिए उससे (सरकार) मदद नहीं लेने को कहा है.

सीबीएसई एक राष्ट्रीय निकाय है, जो भारत में माध्यमिक स्कूली शिक्षा को नियंत्रित करता है. सीबीएसई मोटे तौर पर दो राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं कराता है, दसवीं कक्षा और बारहवीं कक्षा की.कुल मिलाकर 2020 की शुरुआत में कक्षा दसवीं के लिए 3,996,771  छात्रों और बारहवीं कक्षा के लिए 30 लाख से अधिक छात्रों ने परीक्षाएं दी थीं.इस साल दिल्ली के विभिन्न स्कूलों में सीबीएसई ने अगले साल के लिए परीक्षा रजिस्ट्रेशन शुल्क इकट्ठा करना शुरू कर दिया, जो दलित छात्रों के लिए औसतन 2,000 रुपये से अधिक है.

एक अभिभावक जिनका बेटा अगले साल कक्षा बारहवीं की बोर्ड परीक्षाएं देगा. उनका कहना है कि वह स्कूल द्वारा मांगी गई 2,100 रुपये की फीस का भुगतान नहीं कर सकते.उन्होंने कहा, ‘फीस इतनी अधिक क्यों हैं?’कोरोना वायरस के मद्देनजर लॉकडाउन की वजह से वह और उनके पति कोई काम नहीं कर सके. वह असंगठित सेक्टर में काम करते हैं और दोनों की संयुक्त मासिक आय 16,000 रुपये हैं.

अशोक विहार फेस-2 के सर्वोदय कन्या विद्यालय, जहां इस दंपति का बेटा पढ़ता है. इस स्कूल ने पुष्टि की है कि उन्होंने बोर्ड परीक्षाओं के लिए रजिस्ट्रेशन फीस मांगनी शुरू कर दी है.स्कूल ने कहा, ‘यह अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए 2,100 रुपये और सामान्य श्रेणी के छात्रों के लिए 2,400 रुपये है.’जनकपुरी के सर्वोदय कन्या विद्यालय ने कहा कि दो तरह के शुल्क स्लैब हैं, पहला- 1,500 रुपये और दूसरा 21,00 रुपये.

स्कूलों को दी गई सीबीएसई की विज्ञप्‍ति से पता चलता है कि आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए रजिस्ट्रेशन फीस 1,200 रुपये जबकि सामान्य श्रेणी के छात्रों के लिए 1,500 रुपये हैं. प्रैक्टिकल परीक्षाओं औरएडिशनल विषयों के लिए अतिरिक्त शुल्क का भी प्रावधान है. लगभग सभी विषयों में प्रैक्टिकल परीक्षाएं होंगी.

शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक से जब पिछले साल बोर्ड परीक्षाओं के लिए शुल्क वृद्धि के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने संसद को बताया कि सीबीएसई नो-प्रॉफिट, नो-लॉस के आधार पर काम करती है. उन्होंने कहा था कि सीबीएसई एक स्व-वित्तपोषित और आत्मनिर्भर बोर्ड है और यह स्वयं के संसाधनों से संचालित होता है. उन्होंने कहा था, ‘वह भारत सरकार या किसी और प्राधिकरण से किसी तरह का फंड नहीं लेता.’हालांकि निशंक ने यह भी कहा था कि दिल्ली में दलित छात्रों के लिए फीस में छूट दी गई है.

अखिल भारतीय अभिभावक संघ का कहना है कि सीबीएसई ने कोरोना की वजह से पारिवारिक आय को हुए नुकसान को ध्यान में रखते हुए इस महीने की शुरुआत में परीक्षा फीस माफ कर दी थी.अभिभावक संघ ने एक पत्र में कहा है, ‘देश में इस महामारी के समय कई अभिभावकों की नौकरियां चली गई हैं और उनकी आजीविका का स्रोत खत्म हो गया है. छात्रों और परिजनों की मदद करने के बजाए सीबीएसई ने लगभग 2,450 रुपये का रजिस्ट्रेशन शुल्क लगाकर अभिभावकों और छात्रों पर और दबाव डाल दिया.’

वहीं, सीबीएसई अधिकारी ने कहा, ‘बोर्ड को सरकार या किसी अन्य एजेंसी से परीक्षाओं के लिए किसी तरह का शुल्क नहीं मिलता. रजिस्ट्रेशन शुल्क माफ करना बोर्ड के लिए संभव नहीं है. फिर हम परीक्षाएं कैसे कराएंगे? हम नो-प्रॉफिट और नो-लॉस के आधार पर काम करते हैं.’

अपर्णा कालरा

द वायर से साभार

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